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पीएम मोदी के अरुणाचल दौरे का चीन को आपत्ति, दर्ज कराएगा राजनायिक विरोध

चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चीन अरुणाचल प्रदेश के अस्तित्व को नहीं मानता।

Danik Bhaskar | Feb 15, 2018, 04:59 PM IST
प्रधानमंत्री मोदी के अरुणाचल दौरे का राजनायिक विरोध दर्ज करवाएगा चीन। प्रधानमंत्री मोदी के अरुणाचल दौरे का राजनायिक विरोध दर्ज करवाएगा चीन।

बीजिंग. चीन ने नरेंद्र मोदी के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर आपत्ति जताई है। चीन ने कहा- दोनों देशों की सीमा की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। यहां किसी भी तरह का एक्शन सीमा विवाद को उलझा सकता है। हम अरुणाचल प्रदेश का अस्तित्व ही नहीं मानते। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का कड़ा राजनयिक विरोध किया जाएगा। बता दें कि मोदी गुरुवार को अरुणाचल दौरे पर गए थे और उन्होंने एक रैली भी की थी। दरअसल, चीन दावा करता है कि अरुणाचल उसके कब्जे वाले साउथ तिब्बत का हिस्सा है। जबकि, भारत चीन से लगी मैकमोहन लाइन को ही असल सीमा मानता है।

सीमा विवाद साथ निपटाएं

- मोदी के अरुणाचल दौरे के बाद चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, “चीन और भारत सीमा विवाद निपटाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। जल्द ही इस पर सहमति बन सकती है। चीन भारत से अपने वादे की इज्जत करने और उस पर बने रहने की अपील करता है। भारत को ऐसे किसी भी एक्शन से बचना चाहिए जिससे सीमा विवाद और ज्यादा उलझे।

- उन्होंने भारत से सीमा विवाद निपटाने के लिए बातचीत का माहौल बनाए रखने की भी बात कही। गेंग ने दोनों देशों के आपसी संबंध मजबूत करने पर भी जोर दिया।
- बता दें कि चीन लगातार भारतीय नेताओं और सेना की अरुणाचल प्रदेश में मौजूदगी का विरोध करता आया है। चीन इस इलाके को अपना हिस्सा बताता है।

गुरुवार को अरुणाचल पहुंचे थे मोदी

- पीएम मोदी गुरूवार को अरूणाचल प्रदेश पहुंचे थे। उन्होंने यहां एक रैली को संबोधित किया। इसके बाद उन्होंने ईटानगर स्थित कन्वेंशन सेंटर का भी उद्धाटन किया।
- मोदी ने कहा कि अरुणाचल के नए कन्वेंशन सेंटर में कॉन्फ्रेंस और कल्चरल एक्टिविटीज रखी जाएंगी, जिससे सरकारी अधिकारी और प्राइवेट कंपनियां अरुणाचल प्रदेश आना चाहेंगे। पीएम ने कहा कि वो खुद लोगों से मीटिंग्स के लिए अरुणाचल प्रदेश जाने की अपील करेंगे।

भारत-चीन के बीच क्या है सीमा विवाद?

- भारत-चीन के बीच विवादित इलाका 4000 किलोमीटर का है। लेकिन चीन का कहना है कि विवाद वाला इलाका महज 2000 किलोमीटर का है।
- इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर में से अक्साई चीन को चीन के ही सुपुर्द कर दिया है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच 18 दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि, अब तक नतीजा नहीं निकल सका है।
- चीन के साथ भारत का विवाद 64 साल पुराना है। इसका एक बड़ा कारण इंटरनेशनल बॉर्डर क्लियर न होना है। भारत मानता है कि चीन जानबूझकर इस विवाद का हल नहीं कर रहा है। भारत मैकमोहन लाइन को सही मानता है। चीन इस लाइन को अवैध बताता है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा- ऐसा एक्शन लेकर सीमा विवाद को उलझा रहा है भारत। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा- ऐसा एक्शन लेकर सीमा विवाद को उलझा रहा है भारत।
अरुणाचल को अपने कब्जे वाले साउथ तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है चीन। अरुणाचल को अपने कब्जे वाले साउथ तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है चीन।