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चीन के विदेश मंत्री वांग यी को मिली भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी, डोकलाम विवाद पर दे चुके हैं धमकी

चीन की संसद ने प्रधानमंत्री ली केकियांग के सुझाव के बाद वांग यी को दी स्टेट काउंसलर की अतिरिक्त जिम्मेदारी।

Dainik Bhaskar

Mar 19, 2018, 07:38 PM IST
चीन के विदेश मंत्री हाल ही में भारत के साथ मजबूत संबंध रखने पर जोर दे चुके हैं। चीन के विदेश मंत्री हाल ही में भारत के साथ मजबूत संबंध रखने पर जोर दे चुके हैं।

बीजिंग. चीन के विदेश मंत्री वांग यी को नए कैबिनेट गठन में स्टेट काउंसलर की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। ये पद मिलने के बाद भारत-चीन सीमा मामलों में वांग का रोल और भी ज्यादा अहम हो गया। दरअसल, विदेश मंत्री रहने के दौरान वांग भारत को डोकलाम विवाद पर धमकी दे चुके हैं। हालांकि, कुछ ही दिन पहले उन्होंने भारत और चीन के मजबूत रिश्तों पर जोर देते हुए कहा था कि अगर दोनों देश साथ आ जाएं तो हिमालय भी हमारी दोस्ती के बीच नहीं आ सकता। चीन की सरकारी शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीन में ऐसा कई सालों बाद हुआ है कि किसी अधिकारी को एक साथ दो बड़े पद दिए गए हों।


विदेश मंत्री से बड़ा है स्टेट काउंसलर का पद

- वांग का नाम प्रधानमंत्री ली केकियांग की ओर से प्रस्तावित किया गया था। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (चीन की संसद) ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए वांग को एक साथ दो पद सौंप दिए।
- चीन में ताकतवर पद की बात की जाए तो स्टेट काउंसलर का पद विदेश मंत्री के पद से बड़ा माना जाता है। स्टेट काउंसलर की जिम्मेदारी होती है कि वो सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की नीतियों को ठीक ढंग से लागू करवाए।
- वांग को ये पद 67 साल के यांग जीएची की जगह पर मिला है। जीएची को पिछले साल ही सीपीसी पोलितब्यूरो का सदस्य चुना गया था। बता दें कि पोलितब्यूरो सीपीसी की उच्च कमेटी है, जिसके अध्यक्ष खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं।

कौन हैं वांग?

- वांग इससे पहले चीन के उप-विदेश मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा वो जापान में चीन के एम्बेस्डर और ताइवान अफेयर्स ऑफिस में डायरेक्टर के पद पर भी रह चुके हैं।
- वांग अंग्रेजी और जापानी भाषा के अच्छे जानकार हैं। 2013 में यांग के हटने के बाद उन्हें विदेश मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था।

सीमा विवाद सुलझाने में निभा सकते हैं अहम भूमिका

- स्टेट काउंसलर चुने जाने के साथ ही वांग अब भारत चीन बॉर्डर मामलों पर चीन के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव होंगे। भारत की तरफ से ये जिम्मेदारी नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल संभालते हैं।
- हालांकि, आधिकारियों मुताबिक, जबतक सरकार इस बात का कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन नहीं जारी कर देती तब तक इसपर कुछ भी कहना मुश्किल है।

लगा चुके हैं चीन में अवैध तरीके से घुसने का आरोप
- डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं लगातार 73 दिन तक आमने-सामने रही थीं। भारत ने भूटान में अवैध तरीके से सड़क बनाने के लिए चीनी सेना को रोक दिया था। इसपर तब वांग ने भारत पर गलत तरीके से चीन की सीमा में घुसने का आरोप लगाया था।
- वांग ने धमकाने के अंदाज में कहा था कि भारत कबूल चुका है कि उसने सीमा को पार किया है, इसलिए उन्हें तुरंत हमारी जमीन से वापस लौट जाना चाहिए। वर्ना इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
- हालांकि, कुछ ही दिनों पहले वांग ने भारत और चीन संबंधों को अहमियत देते हुए कहा था कि चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी को लड़ना नहीं चाहिए, बल्कि साथ आकर मजबूत संबंधों पर जोर देना चाहिए। अगर दोनों देश साथ आ गए तो एक और एक दो नहीं ग्यारह हो जाएंगे।

क्या हैं चीन भारत के बीच सीमा विवाद?
- दरअसल, चीन और भारत के बीच 3488 किलोमीटर की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) को लेकर विवाद हैं। जहां चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताकर अपना हक जताता है, वहीं भारत दावा करता है कि अक्साई चीन का इलाका भी उसका है, जिसे चीन ने 1962 के युद्ध में छीन लिया था।

डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने रही थीं। डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने रही थीं।
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चीन के विदेश मंत्री हाल ही में भारत के साथ मजबूत संबंध रखने पर जोर दे चुके हैं।चीन के विदेश मंत्री हाल ही में भारत के साथ मजबूत संबंध रखने पर जोर दे चुके हैं।
डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने रही थीं।डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने रही थीं।
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