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'दोस्त पाकिस्तान' ने चीन के सिल्क रोड प्रोजेक्ट पर अटकाए रोड़े

चीन की महात्वाकांक्षी आधुनिक सिल्क रोड योजना खटाई में पड़ती दिख रही है।

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2018, 06:34 PM IST
सिल्क रूट प्लान के कई प्रोजेक् सिल्क रूट प्लान के कई प्रोजेक्

बीजिंग. एशिया को यूरोप से जोड़ने के लिए रेलवे, पोर्ट और दूसरी फैसिलिटीज वाले चीन के सिल्क रोड प्रोजेक्ट में पाकिस्तान में ही दिक्कतें आ रही हैं। ऐसा तब है, जब दोनों देशों के रिश्ते बेहद करीबी हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान के अफसर चीन को अपना "आयरन ब्रदर" कहते हैं। इसके बावजूद डेमर-बाशा डैम बनाने के प्लान को PAK की वाटर अथॉरिटी ने ये कहकर अटका दिया कि बीजिंग इस हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का मालिकाना हक चाहता है और ऐसे में ये पाकिस्तान के हितों के खिलाफ है। चीन ने इसे खारिज किया, लेकिन अफसरों ने दूसरे प्रोजेक्ट्स में से डैम को हटा दिया।

सिल्क रोड में किस तरह की अड़चनें?

1) कहीं प्रोजेक्ट कैंसल, तो कहीं देरी

- न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट में कहा गया, "पाकिस्तान से लेकर तंजानिया और फिर हंगरी तक चीन के प्रेसीडेंट शी जिनपिंग का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव अड़चनों का सामना कर रहा है। इसके प्रोजेक्ट कहीं कैंसल हो रहे हैं, तो कहीं इनमें देरी हो रही है। देरी की वजह लागत को लेकर विवाद है या फिर इस पर कि प्रोजेक्ट से पाकिस्तान को बहुत कम फायदा हासिल हो रहा है, जबकि ये चीन की कंपनियां बना रही हैं और इसके लिए लोन चीन ने दिया है... जिसे हर हाल में वापस करना ही है।"

2) सियासी दिक्कतें

- "इस प्रोजेक्ट को पॉलिटिकल अड़चनोें का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पाकिस्तान को एशिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी के वर्चस्व के सामने झुकना पड़ सकता है।"

- हांगकांग की रिसर्च फर्म इकोनॉमिस्ट कॉरपोरेट नेटवर्क के एनालिस्ट रॉबर्ट कोएप ने कहा, "पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जो चीन की जेब में है। पाकिस्तान का ऐसा कहना है कि हम इस तरह से काम नहीं करेंगे, ये दिखाता है कि उनके लिए उतना फायदा नहीं है... जितना कि चीन बता रहा है।"

क्या है सिल्क रोड प्रोजेक्ट?

- 2013 में शी जिनपिंग ने सिल्क रोड प्रोजेक्ट का एलान किया था। इसका मकसद सिल्क रूट के जरिए एशिया-यूरोप-अफ्रीका के 65 देशों की इकोनॉमी को जोड़ना है। 2000 साल पहले चीन ने ऐसा ही एक रूट बनाया था। चीन ने व्यापार के लिए इस रूट से मध्य एशिया और अरब देशों को जोड़ा था। उस वक्त चीन की पहचान उसके सिल्क से होती थी और एक्सपोर्ट का मेन प्रोडक्ट भी यही था, ऐसे में इस रूट को सिल्क रूट का नाम दिया गया था।

किस तरह देशों को जोड़ेगा प्रोजेक्ट?

- इस प्रोजेक्ट के तहत चीन पड़ोसी देशों के अलावा यूरोप को सड़क से जोड़ेगा। ये चीन को दुनिया के कई पोर्ट्स से भी जोड़ देगा।

- एक रूट बीजिंग को तुर्की तक जोड़ने के लिए प्रपोज्ड है। यह इकोनॉमिक रूट सड़कों के जरिए गुजरेगा और रूस-ईरान-इराक को कवर करेगा।
- दूसरा रूट साउथ चाइना सी के जरिए इंडोनेशिया, बंगाल की खाड़ी, श्रीलंका, भारत, पाकिस्तान, ओमान के रास्ते इराक तक जाएगा।
- पाक से साथ बन रहे CPEC को इसी का हिस्सा माना जा सकता है। फिलहाल, 46 बिलियन डॉलर के चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर काम चल रहा है। बांग्लादेश, चीन, भारत और म्यांमार के साथ एक कॉरिडोर (BCIM) का प्लान है।
- CPEC के तहत पाक के ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ा जा रहा है। इसमें रोड, रेलवे, पावर प्लान्ट्स समेत कई इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किए जाएंगे।

भारत-अमेरिका-रूस की क्या है चिंता?

- अमेरिका, भारत और रूस चीन के इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर परेशान है। दरअसल, उन्हें लगता है कि चीन इस प्रोजेक्ट के जरिए चाइना सेंटर्ड पॉलिटिकल स्ट्रक्चर खड़ा करने की कोशिश कर रहा है, जो दूसरों के प्रभाव को कम कर देगा।

- भारत ने इसीलिए सिल्क रूट या चीन के वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) प्रोजेक्ट का बायकॉट किया था। भारत ने कहा था कि वह ऐसे किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बनेगा जो उसकी सॉवेरीनटी (संप्रभुता) और टेरिटोरियल इंटेग्रिटी (क्षेत्रीय अखंडता) का वॉयलेशन करता हो। CPEC को लेकर भी भारत विरोध करता रहा है। भारत ने दावा किया था कि कि कॉरिडोर पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से गुजरेगा, तो इससे सुरक्षा जैसे मसलों पर असर पड़ेगा।

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