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चीन ने पाकिस्तान को दिया खुफिया ट्रैकिंग सिस्टम, मिसाइलों के टेस्ट और डेवलपमेंट में होगा इस्तेमाल

चीन के रिसर्चर ने कहा कि हमने पाकिस्तान को आंखों का जोड़ा दिया है, वो इसका इस्तेमाल कुछ भी देखने में कर सकते हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 22, 2018, 05:27 PM IST

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    चीन की टीम करीब तीन महीने तक ये सिस्टम लगाने के लिए वहां पर थी। - सिम्बॉलिक इमेज

    बीजिंग.चीन ने अत्याधुनिक और खुफिया ट्रैकिंग सिस्टम पाकिस्तान को दिया है। इसके जरिए पाकिस्तान मल्टी-वारहेड्स बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि थिंक टैंक को लगता है कि इतना आधुनिक और ताकतवर सिस्टम पाकिस्तान को देने वाला पहला देश है। बता दें कि चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्म्स सप्लायर है।

    कब मिला पाकिस्तान को ये सिस्टम?
    - चाइना अकैडमी ऑफ साइंस (CAS) के रिसर्चर झेंग मेंग्वेई ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया, "हाल ही में पाकिस्तान की मिलिट्री ने अपनी फायरिंग रेंज में चीन का बना सिस्टम लगाया है। इसका इस्तेमाल नई मिसाइलों के परीक्षण और विकास में होता है। चीन की टीम करीब तीन महीने तक ये सिस्टम लगाने के लिए वहां पर थी और हमारी टीम ने वहां मिले वीआईपी ट्रीटमेंट का काफी लुत्फ उठाया। टीम ने सिस्टम असेंबल किया और वहां के टेक्निकल स्टाफ को इसके इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी। इस सिस्टम का प्रदर्शन उनकी उम्मीदों से भी कहीं ज्यादा था। हालांकि, नई तकनीक के लिए पाकिस्तान ने कितनी राशि चीन को दी है, ये पता नहीं चल पाया है।"

    पाकिस्तान के लिए क्यों खास है ये सिस्टम?

    - ये एक तरह का नजर रखने वाला सिस्टम है और मिसाइल परीक्षण के लिए ये बेहद अहम होता है। इसमें लेजर रेंजर के साथ हाई परफॉर्मेंस टेलिस्कोप भी लगे होते हैं। इसके अलावा हाईस्पीड कैमरा, इन्फ्ररेड डिटेक्टर और सेंट्रलाइज्ड कंप्यूटर सिस्टम भी होता है, जो चलते हुए लक्ष्य पर नजर रखता है और उसका पीछा करता है। ये मिसाइल के दागे जाने से लेकर लक्ष्य को भेदने तक के हर चरण की हाई रिजोल्यूशन वाली तस्वीरें दर्ज करता है।
    - झेंग ने कहा, "पाकिस्तान को दिया गया सिस्टम इस लिहाज से खास है, क्योंकि इसमें 4 टेलिस्कोप यूनिट्स का इस्तेमाल किया गया है। ये सामान्यतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले टेलिस्कोपिक संख्या से ज्यादा है। हर टेलिस्कोप, जिनकी रेंज सैकड़ों किलोमीटर होती है... अलग-अलग जगहों पर लगाए जाते हैं। इनकी टाइमिंग को एटॉमिक क्लॉक के साथ मिलाया जाता है।"

    पाकिस्तान कैसे सिस्टम का फायदा उठाएगा?
    - ये सिस्टम पाकिस्तान को विजुअल इन्फर्मेशन और मिसाइल की क्षमता के बारे में सटीक जानकारी देगा। इसका इस्तेमाल मिसाइल के डिजाइन को ज्यादा बेहतर और इंजिन की क्षमता को बढ़ाने में किया जाएगा। ज्यादा टेलिस्कोप का इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में सिस्टम वारहेड्स के मूवमेंट को अलग-अलग एंगल से ट्रैक कर सकता है और इससे लक्ष्य से भटकने के खतरे को कम किया जा सकता है।
    - झेंग ने कहा, "आसान शब्दों में कहें तो हमने उन्हें (पाकिस्तान) आंखों का जोड़ा दिया है। वो इसका इस्तेमाल कुछ भी देखने में कर सकते हैं, चाहे तो चांद भी देख सकते हैं।"

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Web Title: China Sells Pakistan Sensitive Missile Technology
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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