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जिनपिंग के विचार चीन के पाठयक्रमों में शामिल, 'शी थॉट' के लिए 7 महीनों में खोले गए 30 शोध संस्थान

पिछले साल अक्टूबर में ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में शी के विचारों को संविधान में शामिल किया गया था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 22, 2018, 09:19 PM IST

  • जिनपिंग के विचार चीन के पाठयक्रमों में शामिल, 'शी थॉट' के लिए 7 महीनों में खोले गए 30 शोध संस्थान
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    शी जिनपिंग के विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का ऐलान अक्टूबर में सीपीसी की बैठक में किया गया था। -फाइल

    • पिछले साल राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विचारधारा को संविधान में शामिल किया गया था
    • 'शी थॉट' से चीन के सिस्टम मेंजिनपिंगकी पकड़ और मजबूती होगी

    बीजिंग. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के विचारों को चीन के विश्वविद्यालयों के पाठयक्रमों में शामिल करने की कवायद और तेज हो गई है। इसके लिए देशभर में ऑनलाइन कोर्स, फंडिंग और नए रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाए जा रहे हैं, ताकि छात्रों के माध्यम से पूरी दुनिया में शी थॉट यानी उनके विचारों को फैलाया जा सके। कुछ कॉलेज और विश्वविद्यालयों में शी के विचारों को पढ़ाना भी शुरू कर दिया है। चीन के सबसे बड़े नेता माओत्से तुंग के बाद जिनपिंग दूसरे नेता हैं, जिनके विचारों को स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाया जा रहा है। इसके लिए पिछले 7 महीनों में देश में 30 शोध संस्थान खोले गए हैं।

    जानकारों का मानना है कि चीन में शी जैसे किसी नेता का उभरना वक्त की जरूरत है। बीजिंग के फेडरेशन ऑफ सोशल साइंसेज के मुताबिक, देश की राजधानी में स्थित शी थॉट इंस्टीट्यूट के लिए सरकार ने 2018 में 16 मिलियन युआन (करीब 17 करोड़ रुपए) का बजट दिया है। साथ ही इसमें रिसर्च के लिए आवेदन करने वालों को प्रोजेक्ट के लिए 80 हजार से 3 लाख युआन तक की राशि भी मुहैया कराई जा रही है।

    देशभर में लेक्चर कोर्स भी शुरू किए गए​:अक्टूबर से अब तक पूरे चीन में शी के विचारों के प्रसार करने के लिए विश्वविद्यालय, सरकारी दफ्तर और मंत्रालयों में करीब 30 शोध संस्थान खोले जा चुके हैं। साथ ही छात्रों, अधिकारियों और आम लोगों के लिए के लिए देशभर में लेक्चर कोर्स भी शुरू किए गए हैं। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) ने पिछले साल 19वीं कांग्रेस की बैठक में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विचारधारा को संविधान में शामिल किया था। उन्हें चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता और राष्ट्रपिता कहे जाने वाले माओत्से तुंग के बराबर दर्जा दिया गया था। इसके अलावा जिनपिंग को देश के मार्गदर्शन के लिए दोबारा राष्ट्रपति चुना गया था। इस साल मार्च में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल बढ़ाने के लिए भी कांग्रेस में सहमति बनी थी। इसके जरिए जिनपिंग के जिंदगीभर चीन के राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया।

    चीन के विकास के लिए जरूरी है ‘शी थॉट’:चीन के जाने-माने शिंघुआ विश्वविद्यालय में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हु अनांग के मुताबिक, चीन में शी जैसे किसी नेता का उभरना समय की जरूरत है। ऐसा नेता जो चीन की राजनीतिक प्रणाली का मार्गदर्शन करे और उसे अमेरिका की तरह सुपरपावर के स्तर पर खड़ा कर दे। हु ने कहा कि चीन अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है और अपने संसाधन दुनिया की जरूरत के लिए इस्तेमाल करने लगा है। वहीं सूहाउ शहर में शियान यातोंग-लिवरपूल यूनिवर्सिटी में चीनी एजुकेशन के जानकार माइकल गाओ के मुताबिक, जिनपिंग चाहते हैं कि उनकी पार्टी की विचारधारा को चीन के लोग स्वीकार करें, ताकि उनके शासन को ज्यादा वैधता मिले।

    सिर्फ नारों तक सीमित हैं शी के विचार: जहां चीनी जानकार शी के विचारों को देश में बदलाव लाने का जरिया मानते हैं, वहीं कई लोगों का मानना है कि ‘शी थॉट’ से देश में कोई भी खास बदलाव नहीं आएगा। एक चीनी छात्र ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि राजनीतिक चर्चाओं का अभी भी लोगों की जिंदगी से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। शी के विचार सिर्फ नारों और लक्ष्य तक ही सीमित हैं।

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    इसी साल मार्च में चीन की कांग्रेस ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए संविधान में बदलाव कर दिया था।
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    सीपीसी ने जिनपिंग को असीमित ताकत देते हुए उनके आजीवन राष्ट्रपति बने रहने के रास्ते को साफ कर दिया था।
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