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मालदीव राजनीतिक संकट: आर्मी भी भेजी तो हम भी एक्शन लेंगे: चीन की भारत को वॉर्निंग

मालदीव में पिछले 12 दिन से राजनीतिक संकट बना हुआ है। सरकार ने 5 फरवरी को देश में 15 दिन की इमरजेंसी लगाई है।

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 10:05 PM IST
चीन ने कुछ दिन पहले कहा था कि भारत ने इस देश में दखल दिया तो हालात और बिगड़ेंगे। (फाइल) चीन ने कुछ दिन पहले कहा था कि भारत ने इस देश में दखल दिया तो हालात और बिगड़ेंगे। (फाइल)

बीजिंग/नई दिल्ली. मालदीव में जारी राजनीतिक संकट पर चीन ने भारत को एक बार फिर वॉर्निंग दी है। चीन ने कहा कि अगर भारत मालदीव में सेना भेजने का फैसला करता है तो वह एक्शन लेने में पीछे नहीं हटेगा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में कहा गया कि भारत चीन के विरोध को नजरअंदाज न करे। बता दें कि इससे पहले भी चीन ने कहा था कि भारत ने इस देश में दखल दिया तो हालात और बिगड़ेंगे। मालदीव में पिछले 12 दिन से राजनीतिक संकट बना हुआ है।

- ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में लिखा- "यूएन की इजाजत के बिना, कोई भी ऑर्म्ड फोर्स किसी भी देश में दखल नहीं कर सकती। चीन मालदीव के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा। इसका मतलब यह नहीं कि बीजिंग उस वक्त चुप बैठा रहे, जब नई दिल्ली नियम-कायदों को तोड़े। भारत यदि एकतरफा कार्रवाई करते हुए मालदीव में सेना भेजता है तो चीन भी उसे रोकने के लिए जरूरी एक्शन लेगा।"

- यह संपादकीय 'माले में अनधिकृत सैन्य हस्तक्षेप रोका जाना चाहिए' टाइटल से लिखा गया। इसमें कहा गया कि माले में तनावपूर्ण हालात देखते हुए भारत को संयम बरतना चाहिए। मालदीव इस वक्त संकट से जूझ रहा है। यह देश का आंतरिक मामला है और चीन किसी भी बाहरी दखल का सख्त विरोध करता है।

मालदीव में राजनीतिक संकट कब से और क्यों है?
- 2008 में मोहम्मद नशीद पहली बार देश के चुने हुए राष्ट्रपति बने थे। 2012 में उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद से ही मालदीव में संकट शुरू हुआ।
- एक फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत 9 लोगों के खिलाफ दायर एक मामले को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इन नेताओं की रिहाई के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की पार्टी से अलग होने के बाद बर्खास्त किए गए 12 विधायकों की बहाली का भी ऑर्डर दिया था।

- सरकार ने कोर्ट का यह ऑर्डर मानने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते सरकार और कोर्ट के बीच तनातनी शुरू हो गई। कई लोग राष्ट्रपति अब्दुल्ला के विरोध में सड़कों पर आए थे। विरोध देखते हुए सरकार ने 5 फरवरी को देशभर में 15 दिन की इमरजेंसी का एलान कर दिया।
- निर्वासित एक्स-प्रेसिडेंट मोहम्मद नशीद ने भारत से मदद मांगी है।


चीन के करीबी माने जाते हैं राष्ट्रपति यामीन
- चीन ने मालदीव के इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी इन्वेस्टमेंट किया है। पाकिस्तान के बाद मालदीव दूसरा ऐसा देश है जिसके साथ चीन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। दोनों देशों में ये समझौता 2017 में हुआ था। यामीन सरकार ने इस समझौते को लागू कराने के लिए संसद में काफी जल्दी दिखाई थी, जिसपर विपक्षी पार्टियों और भारत ने चिंता जताई थी।
- चीन और राष्ट्रपति यामीन की बढ़ती करीबियों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि मालदीव में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है। ये चीन के भारत को घेरने के प्लान के तौर पर देखा जा रहा है। यामीन चीन के वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को भी समर्थन दे चुके हैं। इसके तहत चीन पोर्ट्स, रेलवे और सी-लेन्स के जरिए एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ना चाहता है।

4 लाख आबादी, लेकिन भारत के लिए अहम
- मालदीव की आबादी 4.15 लाख है। यह भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से मालदीव, भारत के लिए अहम है। चीन इसके डेवलपमेंट पर पैसे लगा रहा है। 2011 तक चीन की यहां एंबेसी भी नहीं थी, लेकिन अब यहां मिलिटरी बेस बनाना चाहता है। राष्ट्रपति यामीन को चीन का करीबी माना जाता है। मालदीव अब चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है। इनके बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी हुए हैं।

सेना को तैयार रख सकता है भारत
- मालदीव में लागू इमरजेंसी के बीच माना जा रहा है कि भारत इस मामले में दखल देने के लिए अपनी सेना को तैयार रख सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई है। चीन को यह चिंता है कि अगर भारत ऐसा करता है तो उसे इस देश पर अपना प्रभाव जमाने में दिक्कत होगी।

- बता दें कि भारत पहले ही मालदीव के हालातों पर चिंता जाहिर कर चुका है। वहां रहने वाले भारतीयों को MEA की तरफ से वॉर्निंग भी जारी की जा चुकी हैं।

मालदीव की आबादी 4.15 लाख है। यह भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। चीन यहां डेवलपमेंट के लिए पैसे लगा रहा है। (फाइल) मालदीव की आबादी 4.15 लाख है। यह भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। चीन यहां डेवलपमेंट के लिए पैसे लगा रहा है। (फाइल)
मौजूदा सरकार ने 5 फरवरी को देशभर में 15 दिन की इमरजेंसी का एलान कर दिया। (फाइल) मौजूदा सरकार ने 5 फरवरी को देशभर में 15 दिन की इमरजेंसी का एलान कर दिया। (फाइल)