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उइगर आतंकियों से डरा चीन, अफगानिस्तान में बनाना चाहता है आर्मी बेस

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:59 PM IST

अफगानिस्तान की सीमा पर स्थित वाखान कॉरीडोर पर बनाना चाहता है आर्मी कैंप।
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    अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए मिलिट्री बेस बनाना चाहता है चीन।

    काबुल. चीन अफगानिस्तान में मिलिट्री बेस बनाना चाहता है। इसके लिए दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। अफगानिस्तान के अफसरों के मुताबिक, चीन ये आर्मी कैंप दूर-दराज के पहाड़ी इलाके वाखान कॉरीडोर के पास बनाना चाहता है। यहां पर चीन की सीमा अफगानिस्तान से मिलती है। चीन को डर है कि ईस्ट तुर्केस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के उइगर आतंकी इसी कॉरीडोर से उसके शिन्जियांग प्रांत में घुसना चाहते हैं। वाखान में रहने वाले लोगों के मुताबिक, चीन और अफगानिस्तान के सैनिक इस जगह मिलिट्री ट्रेनिंग भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं चीन अफगानिस्तान को चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर में भी शामिल करना चाहता है।


    अफगानिस्तान में क्यों बेस बनाना चाहता है चीन?

    - साउथ एशिया में अपना दबदबा बनाने के लिए चीन यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर अरबों डॉलर्स खर्च कर रहा है। डिफेंस एनालिस्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान में चीन का कोई भी एक्शन सिक्युरिटी की नजर से अहम है।
    - बता दें कि चीन काफी वक्त से वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) जैसी योजनाओं से अपने लिए नए स्ट्रैटिजिक रूट बनाना चाहता है। इसके लिए वो पाकिस्तान में पहले ही काफी इन्वेस्टमेंट कर चुका है। अब अफगानिस्तान में बेस बनाकर चीन यहां भी खुद को मजबूत करना चाहता है।
    - चीन का कहना है कि अफगानिस्तान में बेस बनाकर वो शिन्जियांग में घुसने वाले आतंकियों को रोक सकता है। बीजिंग को डर है कि ईस्ट तुर्केस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) से निकाले गए उइगर मुस्लिम वाखान कॉरीडोर से चीन में घुसकर आतंकी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।

    मिलिट्री बेस पर अफगानिस्तान का पक्ष?

    - अफगानिस्तान की डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन मोहम्मद रदमनेश के मुताबिक, दोनों ही देशों के अधिकारी दिसंबर से इस प्लान पर बात कर रहे हैं। हालांकि, इस पर ज्यादा से ज्यादा डिटेल्स ली जा रही हैं।
    - रदमनेश ने एक न्यूज एजेंसी को बताया “हम बेस बनाएंगे, लेकिन चीनी सरकार ने हमें भरोसा दिया है कि वो सिर्फ अफगान सैनिकों को ट्रेनिंग देंगे और फंड मुहैया कराएंगे।
    - वहीं चीनी एम्बेसी के एक सीनियर अफसर के मुताबिक, बीजिंग वहां सिर्फ अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है।

    अफगानिस्तान में कितनी है चीन की मौजूदगी?

    - वाखान में रहने वाले किर्गिज अल्पसंख्यकों के मुताबिक, बीते कई महीनों से अफगान और चीनी मिलिट्री इस जगह पर आ रहे हैं।
    - एक न्यूज एजेंसी को दिए बयान में किर्गिज चीफ अब्दुल राशिद ने कहा, “चीनी सेना अपने झंडों वाली गाड़ियों में बैठकर कई बार इस इलाके के दौर पर आ चुके हैं। हमें सख्ती से कहा गया था कि उनके पास ना जाएं और ना ही उनसे बात करें।
    - राशिद के अलावा भी समुदाय के एक और चीफ जो बोइ ने कहा कि मार्च 2017 में जाने से पहले चीनी मिलिट्री इस इलाके में करीब एक साल तक रह चुकी है।
    - बोइ का कहना है कि चीनी सेना यहां रहने वालों के लिए कई बार बड़ी मात्रा में खाने-पीने का सामान और गर्म कपड़े ला चुकी है।
    - हालांकि, चीन और अफगानिस्तान दोनों ही देशों के अधिकारी इन दावों को नकार चुके हैं। चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक, चीनी सेना वाखान काॅरीडोर में कोई मिलिट्री ऑपरेशन नहीं चला रही है।

    अफगानिस्तान को क्या मदद दे रहा चीन?

    - काबुल के सेंटर फॉर स्ट्रैटिजिक एंड रीजनल स्टडीज के रिसर्चर अहमद बिलाल खलील ने बताया कि चीन को डर है कि आतंकी गतिविधियां बढ़ने से इस क्षेत्र में खतरा पैदा हो सकता है। इसीलिए, चीन पिछले 3 साल में अफगानिस्तान को सुरक्षा के नाम पर करीब 70 मिलियन डॉलर्स दे चुका है।
    - इतना ही नहीं, चीन अफगानिस्तान को 54 बिलियन डॉलर्स के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर में शामिल करने के संकेत भी दे चुका है।
    - पॉलिटिकल एनालिस्ट विली लैम के मुताबिक, चीन अफगानिस्तान से आतंकियों को खत्म करने से ज्यादा अपने CPEC के सपने को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।

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    पिछले साल दिसंबर से ही दोनों देशों के बीच मिलिट्री बेस को लेकर बात शुरू हो चुकी है।
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Web Title: China Wants To Build Military Base In Afghanistan To Stop Terrorists
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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