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ईरान ने पाकिस्तान और चीन को दिया चाबहार प्रोजेक्ट में शामिल होने का प्रस्ताव, सीपैक से जुड़ने की जताई मंशा

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर के तहत पाकिस्तान में भी बन रहा है ग्वादर पोर्ट

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 09:55 PM IST
भारत और अफगानिस्तान के साथ मिलकर चाबहार पोर्ट पर काम कर रहा है ईरान।          -फाइल भारत और अफगानिस्तान के साथ मिलकर चाबहार पोर्ट पर काम कर रहा है ईरान। -फाइल

इस्लामाबाद. ईरान ने पाकिस्तान और चीन को चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट से जुड़ने का न्योता दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 दिन के पाकिस्तान दौरे पर इस्लामाबाद पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने सोमवार को कहा कि चाबहार प्रोजेक्ट किसी को घेरने या दबाने के लिए नहीं है और इसीलिए उन्होंने पाकिस्तान और चीन को इस प्रोजेक्ट से जुड़ने के लिए कहा है। जावेद ने ईरान के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर में शामिल होने की मंशा भी जताई। बता दें कि चाबहार प्रोजेक्ट पर भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच 2016 में समझौता हुआ था। इसके बनने से भारत बिना पाकिस्तान से गुजरे मिडिल ईस्ट के देशों से जुड़ जाएगा।

ईरान के भारत से रिश्ते मजबूत
- इस्लामाबाद के इंस्टीट्यूट आॅफ स्ट्रैटिजिक स्टडीज में जावेद ने कहा, “ईरान किसी को भी पाकिस्तान को चोट नहीं पहुंचाने देगा, ठीक उसी तरह जैसे पाकिस्तान किसी को ईरान के खिलाफ अपनी जमीन नहीं इस्तेमाल करने देगा।”
- जावेद ने कहा कि पाकिस्तान को चाबहार प्रोजेक्ट से जुड़ने का खुला न्योता है और हम इसके लिए उपाय भी कर रहे हैं।
- वहीं, भारत के साथ ईरान के रिश्तों पर जावेद ने कहा, “भारत के साथ हमारे रिश्ते वैसे ही हैं, जैसे पाकिस्तान के सउदी अरब से। हम इस्लामाबाद के खिलाफ नहीं है, क्योंकि हम समझते हैं कि सउदी अरब के साथ रिश्ते रखने के बावजूद पाकिस्तान ईरान के खिलाफ नहीं है।”

चीन को भी प्रोजेक्ट से जुड़ने का निमंत्रण
- जावेद ने कहा, “ईरान चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर में शामिल होना चाहता है और इसलिए हमने पाकिस्तान और चीन को चाबहार से जुड़ने का न्योता दिया है।”

क्या है चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट?
- चाबहार पोर्ट को भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच नए स्ट्रैटेजिक रूट माना जा रहा है। इस पोर्ट के जरिए भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच कारोबार में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। हाल ही में भारत ने पहली बार इस पोर्ट से अफगानिस्तान को गेंहू की बड़ी खेप भेजी थी।
- इस पोर्ट के जरिए भारत अब बिना पाकिस्तान गए ही अफगानिस्तान और उससे आगे रूस, यूरोप से जुड़ सकेगा। अभी तक भारत को पाकिस्तान होकर अफगानिस्तान जाना पड़ता था। दोनों ही देश चाहते हैं कि चाबहार का काम तय वक्त से पहले पूरा किया जाए। ईरान में इससे रोजगार बढ़ेगा।

क्या है CPEC?
- 46 बिलियन डॉलर का चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर अभी काम चल रहा है। इसके तहत पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट भी बनाया जा रहा है।
- CPEC के तहत पाक के ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ा जा रहा है। इसमें रोड, रेलवे, पावर प्लान्ट्स समेत कई इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किए जाएंगे।
- CPEC को लेकर भारत विरोध करता रहा है। हमारा दावा है कि कॉरिडोर पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से गुजरेगा, तो इससे सुरक्षा जैसे मसलों पर असर पड़ेगा।

चाबहार पोर्ट के जरिए भारत को मिडिल ईस्ट से जुड़ने के लिए पाकिस्तान से नहीं गुजरना होगा। चाबहार पोर्ट के जरिए भारत को मिडिल ईस्ट से जुड़ने के लिए पाकिस्तान से नहीं गुजरना होगा।
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भारत और अफगानिस्तान के साथ मिलकर चाबहार पोर्ट पर काम कर रहा है ईरान।          -फाइलभारत और अफगानिस्तान के साथ मिलकर चाबहार पोर्ट पर काम कर रहा है ईरान। -फाइल
चाबहार पोर्ट के जरिए भारत को मिडिल ईस्ट से जुड़ने के लिए पाकिस्तान से नहीं गुजरना होगा।चाबहार पोर्ट के जरिए भारत को मिडिल ईस्ट से जुड़ने के लिए पाकिस्तान से नहीं गुजरना होगा।
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