• Home
  • International
  • protests against president yameen has intensified in maldives opposition continues to pressure on the govt
--Advertisement--

मालदीव: सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी, विपक्षी सांसद गिरफ्तार; पुलिस राजनेताओं के परिजन पर छिड़क रही मिर्च

कैपिटल ट्रैवल्स एंड टूअर्स के सीईओ यूसुफ रिफत कहते हैं, इमरजेंसी के चलते मालदीव में हालात खराब हैं। इकोनॉमी गिर रही है।

Danik Bhaskar | Mar 03, 2018, 08:49 AM IST
पोस्टर लेकर प्रदर्शन करतीं पूर्व प्रेसिडेंट नशीद की मां। पोस्टर लेकर प्रदर्शन करतीं पूर्व प्रेसिडेंट नशीद की मां।

माले. मालदीव में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग प्रेसिडेंट अब्दुल्ला यामीन के खिलाफ रैली निकाल रहे हैं। विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर सरकार पर दबाव डाल रही हैं कि वह सुप्रीम कोर्ट का एक फरवरी का फैसला लागू करे। बता दें कि मालदीव में करीब एक महीने से राजनीतिक संकट चल रहा है। मालदीव के मौजूदा प्रेसिडेंट अब्दुल्ला यामीन ने देश में इमरजेंसी का एलान कर रखा है। फरवरी में सेना ने संसद को घेर लिया था और मेंबर्स को भीतर दाखिल होने से रोक दिया था।


पुलिस ने अपोजिशन के सांसदों के गिरफ्तार किया
- न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पुलिस ने शुक्रवार को तीन सांसदों अब्दुल्ला शाहिद, अब्दुल्ला रियाज और अब्दुल्ला लतीफ को गिरफ्तार कर लिया। अब तक विपक्ष के 6 सांसदों को अरेस्ट किया जा चुका है।
- अधालत पार्टी के डिप्टी लीडर अली जहीर ने प्रेसिडेंट यामीन पर देश में अशांति फैलाने का आरोप लगाया। अली कहते हैं, "सभी निर्देश प्रेसिडेंट की तरफ से ही दिए गए हैं। यामीन और उनकी सरकार तानाशाह की तरह काम कर रही है।"
- पुलिस पर आरोप है कि वह जेल भेजे गए राजनेताओं के परिवार को निशाना बना रही है।


नेताओं के परिजन पर मिर्च छिड़की जा रही है: सांसद
- एक सांसद ईवा अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, "पुलिस योजनाबद्ध तरीके से पॉलिटिकल लीडर्स की पत्नियों और मांओं को निशाने पर ले रही है। पूर्व प्रेसिडेंट मोहम्मद नशीद की मां, कर्नल नाजिम की पत्नी के साथ बुरा सलूक किया गया। उनके करीब जाकर मिर्च का छिड़काव किया गया।"
- उधऱ, प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए सांसदों को रिहा करने की मांग कर रहे हैं।
- एक अन्य सांसद अली हुसैन ने ट्विटर पर लिखा, "पूर्व प्रेसिडेंट नशीद की मां सांसदों को रिहा (फ्री एमपी) करने के लिए पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। फारिस, प्रेसिडेंट मौमून के बेटे हैं। वे संदेश दे रही हैं कि मालदीव किसी भी सूरत में अन्याय सहन नहीं करेगा।"

मालदीव संकट का क्या असर?
- मालदीव में चल रहे संकट का सबसे बुरा असर टूरिज्म सेक्टर पर पड़ा है। रिजॉर्ट्स और होटलों में रोज 40% बुकिंग कैंसिल हो रही हैं।
- कैपिटल ट्रैवल्स एंड टूअर्स के सीईओ यूसुफ रिफत कहते हैं, "इमरजेंसी के चलते मालदीव में हालात खराब हो चुके हैं। देश एक राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। निवेशकों का भरोसा हिल चुका है। इकोनॉमी नीचे जा रही है। बातचीत से कोई हल निकाला जाना चाहिए। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।"


मालदीव में राजनीतिक संकट क्यों?
- 2008 में मोहम्मद नशीद पहली बार देश के चुने हुए राष्ट्रपति बने थे। 2012 में उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद से ही मालदीव में संकट शुरू हुआ।
- एक फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत 9 लोगों के खिलाफ दायर एक मामले को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इन नेताओं की रिहाई के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की पार्टी से अलग होने के बाद बर्खास्त किए गए 12 विधायकों की बहाली का भी ऑर्डर दिया था।
- सरकार ने कोर्ट का यह ऑर्डर मानने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते सरकार और कोर्ट के बीच तनातनी शुरू हो गई।

मालदीव के राष्ट्रपति ने क्या कदम उठाया, क्या दलील दी?
- लोग राष्ट्रपति अब्दुल्ला के विरोध में सड़कों पर आए थे। विरोध देखते हुए सरकार ने 5 फरवरी को देशभर में 15 दिन की इमरजेंसी का एलान कर दिया।
- अब्दुल्ला ने इमरजेंसी पर दलील दी थी कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही थी और इसकी जांच के लिए इमरजेंसी लगाई दी गई।
- 20 फरवरी को पार्लियामेंट ने स्टेट इमरजेंसी को 30 दिन बढ़ाने का प्रस्ताव पास कर दिया।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: मालदीव पर किसका क्या स्टेंड...

प्रेसिडेंट अब्दुल्ला यामीन ने फरवरी में मालदीव में इमरजेंसी का एलान किया था। प्रेसिडेंट अब्दुल्ला यामीन ने फरवरी में मालदीव में इमरजेंसी का एलान किया था।

मालदीव पर किसका क्या स्टैंड है?
भारत: नरेंद्र मोदी ने मालदीव के मसले पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बात की थी। व्हाइट हाउस ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा था कि दोनों नेता चाहते हैं कि मालदीव में कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू होनी चाहिए। हलांकि, इस दौरान ये भी रिपोर्ट आई कि भारतीय सेना मालदीव में दखल देने के लिए तैयार है।

 

चीन: मालदीव को लेकर चीन का स्टैंड बदलता रहा है। पहले चीन ने कहा कि भारत और उसके बीच मालदीव विवाद की वजह नहीं बनेगा। लेकिन, मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में लिखा- "यूएन की इजाजत के बिना, कोई भी ऑर्म्ड फोर्स किसी भी देश में दखल नहीं कर सकती। चीन मालदीव के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा। इसका मतलब यह नहीं कि बीजिंग उस वक्त चुप बैठा रहे, जब नई दिल्ली नियम-कायदों को तोड़े। भारत यदि एकतरफा कार्रवाई करते हुए मालदीव में सेना भेजता है तो चीन भी उसे रोकने के लिए जरूरी एक्शन लेगा।"

 

यूनाइटेड नेशंस: UN में ह्यूमन राइट्स हाईकमिश्नर जिया राद अल हुसैन ने मालदीव में इमरजेंसी लगाए जाने को लोकतंत्र की हत्या बताया था। UN सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने मालदीव की सरकार से जल्द इमरजेंसी हटाने की मांग की थी। बता दें कि यूरोपियन यूनियन ने भी राष्ट्रपति अब्दुल्ला से मुलाकात की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया था।

 

भारत के लिए अहम क्यों है मालदीव?
- मालदीव की आबादी 4.15 लाख है। यह भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से मालदीव, भारत के लिए अहम है। 
- चीन मालदीव के डेवलपमेंट पर पैसे लगा रहा है। 2011 तक चीन की यहां एंबेसी भी नहीं थी, लेकिन अब यहां मिलिटरी बेस बनाना चाहता है। राष्ट्रपति यामीन को चीन का करीबी माना जाता है। मालदीव अब चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है। इनके बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी हुए हैं।

 

पूर्व प्रेसिडेंट मो. नशीद ने इमरजेंसी पर क्या कहा?
- 2008 में मालदीव में लोकतंत्र की स्थापना के बाद मो. नशीद प्रेसिडेंट बने थे। 2015 में उन्हें आतंकवादी विरोधी कानूनों के तहत सत्ता से बेदखल कर दिया गया था और तब से वे निर्वासित हैं। नशीद भारत के करीबी माने जाते हैं और उन्होंने राजनीतिक संकट से उबरने के लिए मालदीव में भारत से सैन्य दखल की अपील की थी।

मालदीव में अब तक 6 सांसदों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मालदीव में अब तक 6 सांसदों को गिरफ्तार किया जा चुका है।