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इन 10 गलतियों के कारण पाकिस्तान का हुआ बेड़ा गर्क

वो गलतियां जिसका खामियाजा पाकिस्तान आज तक भुगत रहा है।

DAINIKBHASAKR.COM | Last Modified - Jan 02, 2018, 12:01 PM IST

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    इंटरनेशनल डेस्क. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने एक ट्वीट कर पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद रोकने का एलान किया है। उन्होंने ट्वीट किया कि पाकिस्तान हमारे लीडर्स को बेवकूफ समझता है। अमेरिका ने 15 साल तक पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर यानी 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की मदद की। लेकिन बदले में पाकिस्तान ने धोखा दिया और झूठ बोला है। ट्रम्प का यह एलान पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। लेकिन पाकिस्तान ने खुद भी कुछ ऐसी गलतियां की हैं जिसका खामियाजा आज तक भुगत रहा है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी इन भूलों पर व्यापक रूप से चर्चा करते हैं। उनके द्वारा बताई गई पाकिस्तान की कुछ भूलों पर यहां संक्षेप में चर्चा की जा रही है।


    पहली भूल
    आजादी के बाद अमेरिका के साथ स्ट्रैटेजिक एलायंस बनाना पाकिस्तान की सबसे बड़ी भूल थी। यह पहली हिमाकत थी। हथियार और पैसे की चाह में पाकिस्तान अमेरिका का मोहरा बन गया। शुरुआत में अमेरिका ने पाकिस्तान को कोई अहमियत नहीं दी, लेकिन 1954 में पहली बार अमेरिकी लीडर जॉन फोस्टर डेलेस ने कोल्ड वार पॉलिसी बनाई। रूस के खिलाफ दुनिया के अलग-अलग इलाकों में सहयोगियों की जरूरत थी। पाकिस्तान ने अमेरिकियों के साथ कई तरह के पैक्ट किए। एवज में पैसा और हथियार मिलने लगा। जब अमेरिका पैसे देता है, तब पाकिस्तान के एफ-16 उड़ान भरते हैं। इसका सबसे बड़ा परिणाम यह हुआ कि सेना को अप्रत्यक्ष रूप से ताकत मिल गई। सिविल ब्यूरोक्रेट्स और आर्मी ब्यूरोक्रेट्स ने हाथ जोड़ लिए। भारत ने इसके उलट गुटनिरपेक्ष नीति पर चला। खुद मुख्तार मूवमेंट की शुरुआत की। उसने दोनों विश्व शक्तियों से दूरी बनाए रखी।


    दूसरी भूल
    साल 1954 में गर्वनर जनरल गुलाम मोहम्मद और जस्टिस मुनीर लॉ ऑफ नेसेसिटी (आवश्यकता का कानून) लेकर पहली बार सामने आए। इससे सेना को लोकतांत्रिक सरकार को बर्खास्त करने और हटाने की ताकत आ गई। परिणामस्वरूप सभी तानाशाह अयूब खान, याहया खान, जिया उल हक और मुशर्रफ ने पाकिस्तान में तख्तापलट किया।


    तीसरी भूल
    तीसरी बड़ी भूल पाकिस्तान को पूरी यूनिट बनाना था।1954 में प्रधानमंत्री मोहम्मद अली बोगरा और 1962 में अयूब खान ने ईस्ट और वेस्ट पाकिस्तान को एक यूनिट में तब्दील करने का फैसला लिया। वेस्ट पाकिस्तान में स्वात घाटी में कई कबाइली इलाके थे, जिनकी अपनी संस्कृति थी। इस फैसले से सभी नाराज हो गए। बलूचिस्तान और पख्तूनिस्तान की आजादी छीन ली गई। इस वजह से वहां हालात आज भी खराब हैं और ईस्ट पाकिस्तान बांग्लादेश में बदल कर अलग हो गया।


    चौथी भूल
    बांग्लादेश में मिलिट्री एक्शन करना बहुत बड़ी भूल थी। जनरल याह्या खान और सिविल मिलिट्री ब्यूरोक्रेट्स ने चुनाव में हुई शेख मुजीबुर रहमान की जीत को खारिज कर दिया। यही कारण था, मुजीबुर रहमान ने भारत के साथ मिलकर बांग्लादेश के लिए लड़ाई लड़ी और पाकिस्तान से अलग हो गए।


    पांचवीं भूल
    न्यायप्रणाली ऐसी थी, जिसमें प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी की सजा दी जा सकी। इसका सीधा फायदा राजनीतिक खानदानों को हुआ, जिन्होंने हमदर्द वोट बैंक तैयार कर लिए। राजनीतिक घरानों का उदय हुआ। इन सभी चीजों से पाकिस्तानी सियासत में अवसरवाद को जगह मिल गई।

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    छठवीं भूल
    1980 के दौर में सैनिक तानाशाह अमेरिका के पेशेवर कातिल बन गए थे। उन्होंने अफगानिस्तान में रूस के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने पाकिस्तान में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दिया और अफगानिस्तान में जिहाद के नाम पर इस्लामीकरण किया। अल्लाह के नाम पर उन्होंने जिहाद को सही ठहराया। इसके परिणामस्वरूप अफगानिस्तान में ड्रग कल्चर, एके-47, हिंसा, इस्लामी सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया गया।


    सातवीं भूल
    1999 में पाकिस्तान का भारत के साथ युद्ध करना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। इस बात पर पूरी पाकिस्तानी कौम को आज भी शर्म आती है। अधिकतर पाकिस्तानियों के मानना है कि मुशर्रफ ने देश की इज्जत पर बट्टा लगाया है। इस जंग में भारत की जीत हुई थी।


    आठवीं भूल
    अमेरिका में 9/11 हमले के बाद पूरी दुनिया मानो बदल गई। पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई मुल्ला उमर को ओसामा बिन लादेन से गठजोड़ करने से नहीं रोक सका। ओसामा को अमेरिका को किसी भी कीमत पर न देने की बात भी कही। इसका नतीजा यह हुआ कि 35000 पाकिस्तानी और 4000 पाक सैनिक मारे गए। 65 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ अलग से।


    नौवीं भूल
    सैनिक तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने जस्टिस इफ्तेखार चौधरी को बर्खास्त किया और उनकी बेइज्जती की। इससे देश में वकीलों का आंदोलन शुरू हुआ। मुल्क अस्थिर हो गया। नतीजतन भारत के साथ शांति वार्ता को धक्का लगा। कश्मीर मुद्दा सुलझते-सुलझते रह गया। बेनजीर की हत्या से पूरी दुनिया को यह पता चल गया कि पाक में हालात कि्स कदर खराब हो चुके हैं। 2006 के बाद मुशर्रफ की लोकप्रियता घट गई।


    दसवीं भूल
    आखिर में जरदारी को पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनाना पाकिस्तान की सबसे बड़ी भूल थी।

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Web Title: 10 Blunders In The History Of Pakistan
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