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1300 साल पुरानी है पुनर्जन्म की ये कहानी, सच जानकर भी नहीं होगा यकीन

प्रिंस जब थोड़े बड़े हुए तो और बातें सामने आने लगीं। उन्होंने दावा किया पिछले जन्म में उन्होंने नालंदा से पढ़ाई की है।

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 05:43 PM IST
भूटान के 4 साल के प्रिंस जिग्मी जिग्तेन आंग्चुक। भूटान के 4 साल के प्रिंस जिग्मी जिग्तेन आंग्चुक।

इंटरनेशनल डेस्क. पुनर्जन्म की बात में कोई सच्चाई है या नहीं? ये कहना बहुत मुश्किल है। आमतौर पर पुनर्जन्म की जो कहानियां सामने आती रही हैं, वो 100 साल या उसके आस-पास की होती हैं। पर भूटान के शाही परिवार के राजकुमार की ये कहानी 1300 साल से ज्यादा पुरानी है। 4 साल के प्रिंस जिग्मी जिग्तेन आंग्चुक ने दावा किया कि उसने पिछले जन्म में प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। पिछले साल वो अपने परिवार के साथ नालंदा घूमने भी आए थे। भूटान प्रिंस का भारत कनेक्शन...

- इस कहानी की शुरुआत तब हुई जब भूटान के प्रिंस जिग्मी ने एक साल की उम्र में थोड़ा-बहुत बोलना शुरू किया था। तब वो नालंदा विश्वविद्यालय का नाम लेते थे।
- प्रिंस जब थोड़े बड़े हुए तो और बातें सामने आने लगीं। उन्होंने दावा किया पिछले जन्म में उन्होंने नालंदा से पढ़ाई की है।
- इन दावों और बातों को जांचने-परखने के लिए पिछले साल उनका परिवार भारत भी आया था। वो अपनी मां और दादी यानी राजमाता दोजी आंग्मो के साथ यहां आए थे।
- महज तीन साल की उम्र में वो नालंदा विवि में पहुंचते ही उनकी अजीबोगरीब एक्टिविटीज शुरु हो गईं। वो खुद-ब-खुद वहां की जगहों के बारे में बताने लगा।

पहचान लिया था अपना क्लास रूम
- वहां का दौरा करने के बाद राजमाता ने भी बताया था कि नालंदा पहुंचते ही जिग्मी वहां के खंडहरों को दौड़-भागकर देखने लगा। उसने अपने क्लास रूम तक के बारे में बता दिया।
- प्रिंस जिग्मी आठवीं सदी पूर्व में जन्मे थे। उस दौर में उनका नाम विरोचना था और उन्होंने नालंदा विश्वविद्याल से पढ़ाई की थी।

- राजमाता ने बताया था कि जिग्मी ने उन लोगों से नालंदा के स्तूप से लेकर हर चीज का जो आकार और संरचना बताई थी, वो यहां आने के बाद वैसे ही निकली।
- जिग्मी ने शाही परिवार को अपने पिछले जन्म की जितनी भी बातें बताई थीं, वो सब नालंदा आने के बाद बिल्कुल सच निकलीं।

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