इजरायल-फलस्तीन के बीच की कट्टर दुश्मनी, ये हैं इनके चर्चित किस्से

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा येरुशलम को इजरायल की राजधानी घोषित करने के बाद से ही गाजा में बवाल मचा हुआ है।

dainikbhaskar.com| Last Modified - Dec 18, 2017, 10:26 AM IST

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Palestine and Israel fighting over jerusalem
इजरायली सैनिक को पकड़े हुए फलस्तीनी।
इंटरनेशनल डेस्क. हाल ही में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा येरुशलम को इजरायल की राजधानी घोषित करने के बाद से ही फलस्तीन में बवाल मचा हुआ है। फलस्तीनी प्रदर्शनकारी पश्चिमी तट में इजरायली जवानों को निशाना बना रहे हैं। बता दें, इजरायल और फिलिस्तीन के बीच इजरायल के गठन (1948) से ही विवाद चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच जंग होना आम बात है। इसी सिलसिले में आज हम आपको इनकी दुश्मनी के कुछ ऐसे किस्से बता रहे हैं, जो दुनिया भर की मीडिया की सुर्खियों में रहे। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें...
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इजरायली बच्चों का का मैसेज

जुलाई 2006 में इजरायल की फलस्तीन और लेबनान के बीच जंग छिड़ी थी। इस दौरान इजरायल के इन बच्चों की फोटोज वायरल हुई थीं। इन रॉकेट्स पर बच्चे फलस्तीन के लिए मैसेज लिखते नजर आए थे। मैसेज में लिखा था कि फलस्तीन के लिए इजरायल का गिफ्ट। इस जंग में लेबनान के 1200 से अधिक नागरिक मारे गए थे। दो हफ्तों तक चली इस जंग में इजरायल ने फलस्तीन और लेबनान में जबर्दस्त तरीके से बमबारी की थी।

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फलस्तीन की बर्बादी का नजारा देखते इजरायली

जुलाई 2014 में हमास के रॉकेट हमलों के बाद इजरायल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गाजा पट्टी पर अंधाधुंध बम बरसाए थे। इस दौरान इजरायल के लोग फिलिस्तीन पर गिराए जा रहे बमों का नजारा देखने ऊंचे टीले पर जमा थे। इस दौरान ये फोटोज मीडिया में जबर्दस्त तरीके से वायरल हुई थीं।

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दो हफ्तो की जंग में मारे गए थे सैकड़ों लोग।

जुलाई 2014 में फलस्तीन के विद्रोही गुट हमास ने इजरायल की आर्मी पर कई रॉकेट दागे थे, जिसके चलते दोनों देशों के बीच जंग छिड़ गई थी। दो हफ्तों तक चली इस जंग में फलस्तीन के 500 से अधिक नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। वहीं, इजरायल के 27 सोल्जर्स और 25 आम नागरिक मारे गए थे। 

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इजरायल की बॉर्डर वॉल।

फलस्तीन के विद्रोही गुट हमास अक्सर इजरायल में रॉकेट हमले करता रहता है। इसके चलते इजरायल ने फलस्तीन से लगी अपनी बॉर्डर को सेंसर वाली 438 किमी लंदी दीवार से लैस किया। दीवार का निर्माण कार्य 2000 से शुरू होकर 2006 में कंम्पलीट हुआ। इस दौरान इजरायल और हमास के लड़ाकों के बीच कई बार हिंसक झड़प हुई। इजरायल की जवाबी कार्रवाई में सैकड़ों फलस्तीनी मारे गए। सऊदी अरब, जॉर्डन, ईरान, इराक समेत कई मुस्लिम देशों ने इजरायल की इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। बता दें इस दीवार निर्माण में दो बिलियन डॉलर यानि आज के हिसाब से 13,354 करोड़ रुपए लगे हैं। इस दीवार की लंबाई 700 किमी व ऊंचाई आठ से 10 मीटर है। दीवार के बीच में हर एक किमी पर दो आर्मी पोस्ट हैं, जिस पर से आर्मी फलस्तीन पर नजर रखती है।

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फलस्तीन के एक्स प्रेसिडेंट स्व. यासिर अराफात (बीच में)

इजरायली आर्मी ने फलस्तीन के प्रेसिडेंट को उनके ही मुख्यालय में कर दिया था नजरबंद 
एक्स प्रेसिडेंट स्व. यासिर अराफात यासिर अराफात फलस्तीनी नेता एवं फलस्तीनी मुक्ति संगठन के अध्यक्ष थे। अराफात ऐसे पहले शख्स थे, जिन्हें किसी राष्ट्र का नेतृत्व न करते हुए भी संयुक्त राष्ट्र में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया था। अराफात इजरायल से कट्टर दुश्मनों में से एक थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ ने अराफात को मारने की कई बार कोशिश की थी। वहीं, 2001 में इजरायल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने घोषणा की कि यासिर अराफात अप्रासंगिक हो चुके हैं। इसके बाद इजरायली आर्मी ने रमल्ला में उनके मुख्यालय की घेराबंदी कर दी थी। इसराइल ने रमल्ला में बहुत सी इमारतो को ध्वस्त कर दिया और यासिर अराफात को भी उनके ही मुख्यालय में नजरबंद कर दिया था।

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इजरायली आर्मी से भिड़ती हुई एक फलस्तीनी बच्ची।
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इजरायली टैंकों पर पथराव करते हुए फलस्तीनी बच्चे।
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