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15 देशों में -20 से नीचे पहुंचा टेम्प्रेचर, झील-नदियां और समुद्र के किनारे तक जमे

रूस में नदी-झीलें जम गईं। समुद्री तट भी जम गए हैं। मॉस्को में टेम्प्रेचर माइनस 21 डिग्री रहा।

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 12:29 PM IST
Europe Encounters Record Lower Temperature and Icy weather

लंदन. यूरोप में बर्फीले तूफान ने भारी तबाही मचाई है। झील, नदियां और समुद्र के किनारे तक जम गए हैं। सड़कों पर बर्फ की चादर बिछी है। ट्रेनें भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। यूरोपीय देश आर्कटिक से भी ज्यादा ठंडे हो रहे हैं। 15 से ज्यादा देशों में पारा आर्कटिक (माइनस 20 डिग्री सेल्सियस) से नीचे चला गया है। बर्फीले तूफान से कम से कम 35 लोगों की मौत हो गई। 2 दिन में 300 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल की गई हैं।

नॉर्थ ग्रीनलैंड में टेम्प्रेचर -43 डिग्री

- ब्रिटेन में टेम्प्रेचर माइनस 23 डिग्री तक रहा। यह 55 साल में सबसे कम है। दो दिनों से स्कूल बंद हैं। सड़कों पर हजारों लोग फंसे हैं। स्कॉटलैंड में रेड अलर्ट जारी किया गया है।
- इटली के नेपल्स में बर्फबारी ने 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राजधानी रोम में 32 साल में दूसरी बार बर्फ गिरी है।
- पोलैंड में सर्दी से इस सीजन में 50 से ज्यादा मौतें हुई हैं। 8 मौतें बुधवार को हुईं। सड़कों पर फंसे लोगों को निकालने और बर्फ हटाने के लिए सेना को तैनात किया गया है।
- रूस में नदी-झीलें जम गईं। समुद्री तट भी जम गए हैं। मॉस्को में टेम्प्रेचर माइनस 21 डिग्री रहा। यह सीजन में सबसे कम है।

क्या है आर्कटिक ब्लास्ट और इसके पीछे की वजह?

- आर्कटिक में अभी औसत टेम्प्रेचर माइनस 20 डिग्री है। यहां लो प्रेशर जोन बनने से धरती के ध्रुवों (Poles) से ठंडी हवाएं यूरोप की तरफ बह रही हैं। इस स्थिति को आर्कटिक ब्लास्ट कहा जाता है।

यहां झील रातों रात ब्लू आइस में बदली

- अमेरिका के मिशिगन की ग्रेट लेक जमने के बाद ब्लू आइस में बदल गई है। झील से 30 फीट ऊपर तक ब्लू आइस बिछी हुई है।
- एक्सपर्ट के मुताबिक, यह दुर्लभ प्राकृतिक घटना है। साफ पानी की झील में बर्फ जमने के बाद जब इसमें सूरज की रोशनी पड़ती है तो उसका रिफलेक्शन पानी की सतह पर बनी बर्फ पर दिखता है। ये रिफलेक्शन ही नीले रंग का होता है।

आगे की स्लाइड्स में देखें माइनस 20 टेम्प्रेचर में कैसा है इन जगहों का हाल...

अमेरिका के मिशिगन की ग्रेट लेक जमने के बाद ब्लू आइस में बदल गई है। अमेरिका के मिशिगन की ग्रेट लेक जमने के बाद ब्लू आइस में बदल गई है।
स्विजरलैंड की रोमनशोर्न पोर्ट पर झील पर बर्फ की मोटी परत जम गई। स्विजरलैंड की रोमनशोर्न पोर्ट पर झील पर बर्फ की मोटी परत जम गई।
रोम की राजधानी इटली में ठंडे के चलते फाउंटेन के जम चुके पानी की तस्वीर लेती महिला। रोम की राजधानी इटली में ठंडे के चलते फाउंटेन के जम चुके पानी की तस्वीर लेती महिला।
जर्मनी की सबसे बड़ी झीलों में शामिल कॉन्सटेंस लेक का पानी भी पूरी तरह जम चुका है। जर्मनी की सबसे बड़ी झीलों में शामिल कॉन्सटेंस लेक का पानी भी पूरी तरह जम चुका है।
मॉस्को में तापमान माइनस 21 डिग्री रहा। यह सीजन में सबसे कम है। मॉस्को में तापमान माइनस 21 डिग्री रहा। यह सीजन में सबसे कम है।
लंदन में भारी बर्फबारी के दौरान मिलेनियम ब्रिज से गुजरता राहगीर। लंदन में भारी बर्फबारी के दौरान मिलेनियम ब्रिज से गुजरता राहगीर।
करीब 15 यूरापीय देशों में शीतलहर के चलते बर्फ की चादर बिछ गई है। करीब 15 यूरापीय देशों में शीतलहर के चलते बर्फ की चादर बिछ गई है।
सड़कों पर बर्फ की चादर बिछी है। ट्रेनें भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। सड़कों पर बर्फ की चादर बिछी है। ट्रेनें भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
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अमेरिका के मिशिगन की ग्रेट लेक जमने के बाद ब्लू आइस में बदल गई है।अमेरिका के मिशिगन की ग्रेट लेक जमने के बाद ब्लू आइस में बदल गई है।
स्विजरलैंड की रोमनशोर्न पोर्ट पर झील पर बर्फ की मोटी परत जम गई।स्विजरलैंड की रोमनशोर्न पोर्ट पर झील पर बर्फ की मोटी परत जम गई।
रोम की राजधानी इटली में ठंडे के चलते फाउंटेन के जम चुके पानी की तस्वीर लेती महिला।रोम की राजधानी इटली में ठंडे के चलते फाउंटेन के जम चुके पानी की तस्वीर लेती महिला।
जर्मनी की सबसे बड़ी झीलों में शामिल कॉन्सटेंस लेक का पानी भी पूरी तरह जम चुका है।जर्मनी की सबसे बड़ी झीलों में शामिल कॉन्सटेंस लेक का पानी भी पूरी तरह जम चुका है।
मॉस्को में तापमान माइनस 21 डिग्री रहा। यह सीजन में सबसे कम है।मॉस्को में तापमान माइनस 21 डिग्री रहा। यह सीजन में सबसे कम है।
लंदन में भारी बर्फबारी के दौरान मिलेनियम ब्रिज से गुजरता राहगीर।लंदन में भारी बर्फबारी के दौरान मिलेनियम ब्रिज से गुजरता राहगीर।
करीब 15 यूरापीय देशों में शीतलहर के चलते बर्फ की चादर बिछ गई है।करीब 15 यूरापीय देशों में शीतलहर के चलते बर्फ की चादर बिछ गई है।
सड़कों पर बर्फ की चादर बिछी है। ट्रेनें भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।सड़कों पर बर्फ की चादर बिछी है। ट्रेनें भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
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