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गूगल मैप इंडिया इस शख्स की है देन

अनजान जगहों को ढूंढने के लिए करोड़ों लोग गूगल मैप की मदद लेते हैं, इसलिए ये इतना पॉपुलर है।

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 01:02 PM IST
Lalitesh Katragadda Developed Google Map Maker

अनजान जगहों को ढूंढने के लिए करोड़ों लोग गूगल मैप की मदद लेते हैं, इसलिए ये इंडिया में इतना पॉपुलर है। समय के साथ-साथ ये मैप काफी एडवांस होता रहता है, इसलिए भी इसकी क्रेडिबिलिटी बनी हुई है। जब रियल टाइम मैपिंग की बात आती है तो गूगल से बेहतर कुछ नहीं लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गूगल मैप्स इंडिया के पीछे आखिर है कौन? आंध्रप्रदेश के ललितेश ने दिया है ये तोहफा...


- आंध्रप्रदेश की तेलुगु फैमिली में जन्मे ललितेश कात्रागद्दा की बदौलत ही आज लोग इस फेसिलिटी का यूज कर पा रहे हैं। मुंबई में पले-बढ़े ललितेश ने केंद्रीय विद्यालय में अपनी पढ़ाई की।


- एरोस्पेस एंजीनियरिंग में इन्होंने आईआईटी-मुंबई से बैचलर डिग्री ली और इसके बाद लोवा स्टेट यूनिवर्सिटी से एरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया।


- कानेजी मेलन यूनिवर्सिटी से इन्होंने रोबोटिक्स में पीएचडी भी की। इसके बाद सेन फ्रांसिस्को में इन्होंने रोबोटिक स्टार्ट-अप स्फेरीयो की स्थापना की। साल 2002 में ये गूगल का हिस्सा बने और इन्होंने गूगल मैप मेकर बनाया।


- इस काम में इन्होंने तकरीबन 300 वॉलेन्टियर्स के सजेशन और मैप के स्कैचेस की मदद ली। ये वॉलेन्टियर्स उनके क्लोस सर्कल का ही हिस्सा थे जो नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की रडार में इंडिया की 30 सिटीज की मैपिंग पर काम कर रहे थे।


- 30 हजार बदलाव और कई वेरिफिकेशंस के बाद इंडिया में गूगल मैप का यूज फाइनली लोग साल 2008 में करने लगे। एक इंटरव्यू में ललितेश ने बताया था कि गूगल मैप का सफर साल 2004 से 2012 तक चला। इनका बनाया मैप इतना यूजफुल रहा कि यूएस की कई प्री-एग्जिस्टिंग बॉर्डर और रूट भी ढूंढने में भी काफी मदद मिली।


- ललितेश कहते हैं, “मैंने अपने अब तक के सफर से सीखा है, आप भले ही असफल होंगे, लेकिन ईमानदारी से काम करोगे तो मिशन हमेशा सफल रहेगा।”

अगली स्लाइड्स में देखें ललितेश के कुछ और फोटोज...

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