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फ्रांस के राष्ट्रपति का दौरा अगले 3 दिन में मोदी तय करेंगे देश का 'पावर'फुल फ्यूचर

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिन के दौरे पर भारत आ रहे हैं।

Danik Bhaskar | Mar 09, 2018, 07:33 PM IST
मोदी और मैक्रों इस प्लांट का सोमवार को 75 मेगावॉट वाले प्लांट का इनॉगरेशन करेंगे। मोदी और मैक्रों इस प्लांट का सोमवार को 75 मेगावॉट वाले प्लांट का इनॉगरेशन करेंगे।

स्पेशल डेस्क. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिन के दौरे पर भारत आ रहे हैं। शनिवार से शुरू होने वाले इस दौरे में दोनों देश एक-दूसरे से बहुत कुछ पा सकते हैं। ये दौरा इसलिए भी अहम है, क्योंकि पहली बार फ्रांस के सहयोग से यूपी के मिर्जापुर में सोलर एनर्जी प्लांट तैयार किया गया है। मोदी और मैक्रों इस प्लांट का सोमवार को 75 मेगावॉट वाले प्लांट का इनॉगरेशन करेंगे। मिर्जापुर में तैयारी जोरों पर हैं। एनर्जी प्लांट में इस प्रोग्राम के लिए पांच हैलीपेड तैयार किए गए हैं।

क्याें लग रहा है सोलर प्लांट?
दरअसल, ये पूरा मामला क्लाइमेट चेंज से जुड़ा हुआ है। पेरिस में 2015 में मोदी ने क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशनल सोलर एलायंस एग्रीमेंट (ISA) पर दस्तखत किए गए थे। उसके तहत को भारत में सोलर एनर्जी प्लांट में फ्रांस मदद करेगा। बता दें कि मौजूदा समय में भारत सोलर एनर्जी से 20 हजार मेगावॉट पैदा कर रहा है। इसके अलावा नई दिल्ली में मैक्रों और मोदी ISA की पहली समिट होगा। इसकी थीम क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण है। ये समिट राष्ट्रपति भवन में होगा। इसमें 21 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और चार देशों के प्रधानमंत्रियों के अलावा 125 देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।


क्या है इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA)?
ISA ग्लोबल संस्था है, जिसमें 121 देश मेंबर है। ये संस्था 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर में दुनियाभर में 1000 गीगावॉट सोलर इन्स्टॉल करेगा। भारत ने सोलर एनर्जी प्रोड्यूस करने लक्ष्य से करीब तीन साल आगे चल रहा है। भारत को 2030 तक 40% को रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करना है। लेकिन ये टारगेट 2027 में ही पूरा होता दिख रहा है। भारत का दमन और दीव 100% सोलर एनर्जी प्रोड्यूस करने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है।


क्या चाहता है फ्रांस?
ऐसा नहीं है कि फ्रांस सिर्फ साेलर एनर्जी प्लांट लगाने में ही भारत की मदद कर रहा है। इसके बदले में वो भारत में अपने हथियारों का बिजनेस भी करना चाहता है। इसलिए फ्रांस को भारत से डिफेंस डील होने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल डील करीब 54 हजार करोड़ रुपए की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को 100 से 150 राफेल प्लेन बेचना चाहता है। इसके अलावा स्कॉर्पियन-क्लास की पनडुब्बी भी देना चाहता है। इसलिए फ्रांस प्रेसिडेंट के साथ देश के टॉप डिफेंस फर्म के सीईओ भी आ रहे हैं। इसमें डसाल्ट एविएशन, नावेल, थेल्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। इस दौर में 5वीं पीढ़ी के प्लेन बनाने पर भी समझौता हो सकता है।

भारत को क्या मिल सकता है?
भारत-फ्रांस के बीच लॉजिस्टिक एरिया में समझौता हो सकता है। फ्रांस मेडागास्कर के पास मौजूद रियूनियन आइसलैंड और अफ्रीकी बंदरगाह जिबूती में भारतीय जहाज को प्रवेश दे सकता है। इससे भारत का समुद्री कारोबार मजबूत होगा। जिबूती में चीनी सैन्य बेस भी है। यानी इसका रणनीतिक महत्व भी है।