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जापान की कोबे स्टील में 1970 से क्वालिटी की हेराफेरी, सीईओ ने अब दिया इस्तीफा

बोइंग, एयरबस, जीएम जैसी कंपनियों को घटिया क्वालिटी के स्टील, कॉपर और एल्युमिनियम की सप्लाई की।

Danik Bhaskar | Mar 07, 2018, 08:20 AM IST
कावासाकी ने मीडिया के सामने झुककर गलती स्वीकार की। जापान में गलती इसी तरह स्वीकार करने की परंपरा है। कावासाकी ने मीडिया के सामने झुककर गलती स्वीकार की। जापान में गलती इसी तरह स्वीकार करने की परंपरा है।

टोक्यो. एक तरफ भारत में बड़े-बड़े बिजनेसमैन बैंकों को चूना लगाकर भाग रहे हैं और पैसा न लौटाने की एवज में, जो करना है कर लो की धमकी दे रहे हैं। ऐसे समय में जापान के इस उदाहण से हमें सीखना चाहिए। जापान की कोबे स्टील को दुनिया की जानी-मानी मेटल कंपनियों में शुमार किया जाता था। लेकिन यहां प्रोडक्ट की क्वालिटी को लेकर 1970 के दशक से हेराफेरी की जा रही थी। यह बात सामने आने के बाद कंपनी के चेयरमैन और सीईओ हिरोया कावासाकी ने मंगलवार को इस्तीफा देने की घोषणा की।

कोबे ने दुनियाभर की करीब 700 कंपनियों को स्टील, कॉपर और एल्युमिनियम की सप्लाई की थी। इनमें बोइंग, एयरबस और जनरल मोटर्स भी हैं। इसने कार इंजन और टायर में इस्तेमाल होने वाले स्टील वायर और बुलेट ट्रेन बनाने में इस्तेमाल होने वाले एल्युमिनियम की क्वालिटी को भी बढ़ा-चढ़ाकर बताया।

2013 में कंपनी ज्वाइन करने वाले कावासाकी का इस्तीफा 1 अप्रैल से प्रभावी होगा। उन्होंने कहा, 'हमने बहुत सारे लोगों के लिए समस्याएं पैदा की हैं। अब नए हाथों में कंपनी की जिम्मेदारी सौंपने का वक्त आ गया है।' कंपनी ने एक बयान में कहा कि कई सीनियर एक्जीक्यूटिव्स को भी हटाया जा रहा है।

कोबे ने नए सीईओ की अभी घोषणा नहीं की है। कंपनी की जांच में पता चला कि इसके कर्मचारियों ने विभिन्न प्रोडक्ट्स की क्वालिटी से जुड़े 163 मामलों में आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। इस काम में कई अधिकारी भी शामिल थे।

112 साल पुरानी कंपनी, पीएम आबे भी कर चुके हैं काम: कोबे स्टील 112 साल पुरानी कंपनी है। स्थापना 1905 में हुई थी। प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी कभी यहां नौकरी करते थे। पहली बार इस घोटाले का खुलासा अक्टूबर 2017 में हुआ था।

पिछले साल तीन जापानी कंपनियों में धोखाधड़ी सामने आई थी
निसान मोटर्स: पिछले साल अक्टूबर में बिना पूरी जांच के 12 लाख कारें घरेलू बाजार में बेच दीं। धोखाधड़ी सामने आने पर इन्हें रिकॉल करना पड़ा।
सुबारू ऑटो: इस कंपनी ने भी निसान की तरह ही धोखाधड़ी की थी। इसके बात इसने 4 लाख गाड़ियां रिकॉल की थीं।
मित्सुबिशी: कार्बन फाइबर बनाने वाली दुनिया की शीर्ष कंपनियों में शुमार मित्सुबिशी मैटेरियल ने पिछले साल क्वालिटी के आंकड़ों में हेराफेरी की बात मानी थी।