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ऐसी बदतर है यहां इंसान की LIFE, जानवर के पिंजरे जैसे घरों में रहने को मजबूर

हांगकांग में काफिन के साइज के 6 फीट लंबे और ढाई से तीन फीट चौड़े केज होम्स और क्यूबिकल होम्स भी किराए पर लेना महंगा है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 20, 2018, 07:56 PM IST

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    हांगकांग में रहने के लिए इतनी कम जगह है कि यहां कुकिंग एरिया और टॉयलेट स्पेस एक जगह हैं।

    इंटरनेशनल डेस्क.हांगकांग को दुनिया के सबसे रिचेस्ट शहरों में गिना जाता है, जहां प्रति व्यक्ति आय 56,701 डॉलर (38 लाख रुपए) है। बावजूद इसके यहां रह रहे लोगों की हालत जानवरों से भी बदतर है। लाखों की संख्या में लोग मेटल वायर के बने छोटे-छोटे पिंजरों जैसे घरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, कुछ का ठिकाना क्यूबिकल होम्स हैं। इन घरों को यहां इनएडिक्वेट हाउसिंग के नाम से जाना जाता है।कॉफिन जैसे घर का किराया भी महंगा...

    - हाउसिंग क्राइसिस के चलते यहां मकान खरीदना सबके बस की बात नहीं है। ठीक-ठाक मकान किराए पर भी लेने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है।
    - ऐसे में गरीब तबके के लोगों के लिए केज होम्स और क्यूबिकल होम्स ही एकमात्र रास्ता है। काफिन के साइज के 6 फीट लंबे और ढाई से तीन फीट चौड़े केज होम्स और क्यूबिकल होम्स भी किराए पर लेना महंगा है।
    - ऐसे केज और क्यूबिकल होम्स के लिए भी करीब 11500 रुपए महीने के चुकाने पड़ते हैं। इनमें से कुछ केज होम्स की हालत तो ऐसी है कि उनमें पैर फैलाना भी मुश्किल है।
    - यहां सिंगल बेडरूम वाले छोटे से फ्लैट के लिए हर महीने सवा लाख रुपए तक किराया देना पड़ता है।

    कब शुरू हुआ ऐसे मकानों का दौर?
    - ऐसे मकानों का दौर 1950 और 60 में तब शुरू हुआ, जब चाइनीज सिविल वॉर के बाद यहां बड़ी संख्या में चीनी माइग्रेंट्स पहुंचे। उस वक्त हांगकांग की आबादी 20 लाख के पार हो गई।
    - आबादी बढ़ने के साथ रहने के लिए जगह मिलना मुश्किल हो गई और केज होम्स विकल्प के तौर पर सामने आए। माइग्रेंट्स के लिए काफी संख्या में केज होम्स तैयार हुए।
    - 1990 तक भी इन केज होम्स की संख्या हजारों में ही थी, लेकिन 1997 तक ये एक लाख हो गई। हालांकि, कई जगहों पर केज होम्स गैरकानूनी रूप से चलाए जा रहे हैं इसलिए रहने वालों का सही आंकड़ा मिलना मुश्किल है।

    सरकार की दलील
    - हांगकांग सरकार के मुताबिक, दो लाख से ज्यादा लोग पब्लिक हाउसिंग के लिए अभी वेटिंग लिस्ट में हैं। इनमें से आधे सिंगल हैं। सरकार के मुताबिक, इन्हें अपने मकानों के लिए कम से कम अभी तीन साल तक का इंतजार करना पड़ेगा।

    आगे की स्लाइड्स में देखें हांगकांग के इन घरों की फोटोज...

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    यूनाइटेड नेशन हांगकांग के ऐसे अपार्टमेंट्स को इंसानियत का अपमान बताया था।
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    हांगकांग के शाम शुई पो इलाके में मौजूद स्लम एरिया, जहां लोग ऐसे कॉफिन अपार्टमेंट में रहते हैं।
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    छोटे से रूम में रहती चार लोगों की फैमिली। बच्चे सामान के बीच लेटे दिख रहे हैं।
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    हांगकांग में 88,000 से करीब ऐसे डिवाइड किए गए छोटे अपार्टमेंट हैं।
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    यहां घर इतने छोटे हैं कि सिंक, टॉयलेट और चॉपिंग बोर्ड सभी एक छोटे से एरिया में मौजूद हैं।
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    एक कमरे के एक छोटे से एरिया में खाने से लेकर कपड़े, टीवी, फैन तक घर के सभी सामान मौजूद रहते हैं।
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    हांगकांग के एक छोटे से फ्लैट में मौजूद बुजुर्ग महिला।
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    इसमें कई फ्लैट सिंगर मैट्रेस के साइज के भी हैं, जिनमें पूरा पैर तक फैलाना मुश्किल है।
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    हांगकांग के एक कॉफिन हाउस का हाल।
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    यहां किचन और टॉयलेट में भी दूरी नहीं है।
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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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