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इस गुरुद्वारे में अंग्रेजों ने चलवा दी थीं गोलियां, अब है पाकिस्तान का हिस्सा

पंजाब प्रांत के ननकाना साहिब जिले में मौजूद ये गुरुद्वारा सिखों के पहले गुरु यानी गुरु नानक के नाम पर है।

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 01:25 PM IST
पाकिस्तान का ननकाना साहिब गुरुद्वारा। पाकिस्तान का ननकाना साहिब गुरुद्वारा।

इंटरनेशनल डेस्क. पाकिस्तान का ननकाना साहिब गुरुद्वारा सिखों के सबसे अहम तीर्थ स्थलों में से एक है। आज से करीब 97 साल पहले अंग्रेजों ने यहां भयानक नरसंहार को अंजाम दिया था, जिसमें 70 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। पंजाब प्रांत के ननकाना साहिब जिले में मौजूद ये गुरुद्वारा सिखों के पहले गुरु यानी गुरु नानक के नाम पर है। उनका जन्म इसी शहर में हुआ था। सभा में चलाई गईं गोलियां...

- बात 1921 की है, जब देश में अंग्रेज शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू ही हुआ था। ननकाना साहिब गुरुद्वारे में स्थानीय लोगों ने मिलकर शांतिपूर्ण ढंग से एक सभा का आयोजन किया था।
- सभा चल ही रही थी कि सैनिक यहां पहुंच गए और गोलियां चला दीं। सभा में मौजूद 70 लोगों की जान गई। इस गोलीबारी की बहुत निंदा हुई थी।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड के 2 साल के अंदर ही हुए इस हत्याकांड के बाद अंग्रेज सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और भी हिंसक हो गए।

अब पाकिस्तान में है गुरुद्वारा
- ननकाना साहिब का पुराना नाम 'राय-भोई-दी-तलवंडी' था। उस समय राय बुलर भट्टी इस इलाके का शासक था।
- गुरु नानकदेव की आध्यात्मिक रुचियों को सबसे पहले उनकी बहन नानकी और राय बुलर भट्टी ने ही पहचाना था।
- राय बुलर ने तलवंडी शहर के आसपास की 20 हजार एकड़ जमीन गुरु नानकदेव को तोहफे में दी थी, जिसे 'ननकाना साहिब' कहा जाने लगा।
- लमहाराजा रणजीत सिंह ने गुरु नानकदेव के जन्म स्थान पर गुरुद्वारे का निर्माण कराया, जो ननकाना साहिब गुरुद्वारा कहा जाता है।
- साहिब के आसपास मुख्य गुरुद्वारे समेत नौ गुरुद्वारे हैं। ये सभी गुरु नानकदेव के जीवन के अहम पहलुओं से संबंधित हैं।

आगे की स्लाइड्स में देखें इस गुरुद्वारे की फोटोज...