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ऐसे जमीन के नीचे बसा है ये गांव, यहां सब रहते हैं अंडरग्राउंड

अब यहां कुछ फैमिलीज ही बची हैं। हालांकि, वो इस जगह से इतने अटैच हैं कि इसे छोड़कर जाना नहीं चाहते हैं।

Danik Bhaskar | Feb 24, 2018, 06:11 PM IST

इंटरनेशनल डेस्क. ये फोटोज ट्यूनिशिया के दजेबल दहर की है, जहां आज भी लोग अंडरग्राउंड मकानों में रह रहे हैं। जमीन के नीचे पुराने तरीकों से बने इन घरों पर न गर्मी का असर है और न ही सर्दी का। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में यहां की आबादी काफी कम हो गई। अब यहां कुछ फैमिलीज ही बची हैं। हालांकि, वो इस जगह से इतने अटैच हैं कि इसे छोड़कर जाना नहीं चाहते हैं। घर न छोड़ने की बताई ये वजह...

- इस अंडरग्राउंड गांव को तिज्मा के नाम से जाना जाता है। ट्यूनिशिया के प्रेसिडेंट रहे हबीब बॉर्गुइबा ने मॉर्डेनाइजेशन कैंपेन के तहत 1960 और 1970 में नया टाउन बसाया। तब यहां से कई फैमिलीज ने अंडरग्राउंड मकानों को छोड़ दिया।
- दरअसल, सूखे और भारी बारिश के चलते यहां मकान गिरने लगते हैं। ऐसे में कुछ लोगों ने आस-पास की जमीन में ही नए मकान बना लिए हैं। वहीं, पारंपरिक घरों को वो स्तबल और वर्कशॉप के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
- यहां पांच कमरों वाले घर में रहने वाली लतीफा बेन याहिया ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बताया, ''मेरे मां-बाप की मौत हो गई। सभी लड़कियों की शादियां हो गईं और वो अपने घर चली गईं। अब मैं घर में सिर्फ अकेली बची हूं। अगर मैंने भी घर छोड़ दिया, तो ये घर तो खत्म हो जाएगा।''
- यहां रहने वाली 36 साल की सलीहा मोहम्मेदी ने कहा कि वो इस घर में अपने हसबैंड और चार बच्चों के साथ रह रही हैं और उन्हें यहां रहने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्हें अगर यहां दूसरा मकान भी मिलता है, तो उसे अपने बच्चों को दे देंगी। सलीहा का कहना है कि ये वो जगह है, जहां हमने अपनी जिंदगी गुजारी है।
- गांव में छोटी सी दुकान चलाने वाले हेदी अली काएल इस इलाके में बचे वो आखिरी शख्स हैं, जिसे इस बात की जानकारी है कि ये मकान कैसे बने हैं और कैसे मेंटेन किए जाते हैं। उन्होंने यहां आखिरी मकान 1970 में बनाया था। वो अब भी इन मकानों को सुरक्षित रखने में लगे हुए हैं।

ज्वालामुखी के गड्ढे जैसे हैं दिखते
- तिज्मा गांव में बने सभी मकान ज्वालामुखी के जैसे गड्ढे और गुफा में मौजूद हैं। इनके आस-पास ऊपर पाम और जैतून के पेड़ लगे हैं। इन सभी का कंस्ट्रक्शन एक जैसा है। अजीबोगरीब दिखने वाले ये मकान लीबिया के बॉर्डर से लगे इलाकों में मौजूद हैं। वहीं, दजेबल दहर के बाकी हिस्सों में बने मकान और स्टोररूम पत्थरों को काटकर और जमीन के ऊपर बनाए गए हैं।

टूरिज्म कमाई का जरिया
- यहां रह रहे लोगों के गुजारा जैतून की फार्मिंग और टूरिज्म से होता है। ये जगह तब पॉपुलर डेस्टिनेशन में तब्दील हो गई, जब यहां के अंडरग्राउंड मकानों में होटल खुल गया।
- 1970 में स्टार वॉर्स ने यहां होटल सेट किया था। हालांकि, ट्यूनिशिया में टूरिज्म अभी रिकवरी के दौर में है। 2011 में अरब क्रांति के बाद यहां टूरिज्म में काफी गिरावट आई है।
- यहां रहने वाली सलीहा का कहना है कि अरब क्रांति से पहले यहां टूरिज्म था, लेकिन उसके बाद से गिनती के लोग ही आते हैं।

- उनका कहना है कि छुट्टियों के दौरान यहां ट्यूनिशिया के कुछ लोग घूमने-फिरने के लिए आ जाते हैं, तो उन्हें कुछ टिप दे जाते हैं।

आगे की स्लाइड्स में देखें इस गांव और यहां बने मकानों की फोटोज...

ट्यूनिशिया का अंडरग्राउंड गांव। ट्यूनिशिया का अंडरग्राउंड गांव।