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कभी ऐसी दिखती थी हमारी सेना, भारतीय जवानों की RARE PHOTOS

फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान भारत में अंग्रेजों का राज था। इसके चलते ब्रिटिश शासकों ने जंग में भारतीय सेना की भी मदद ली।

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 12:10 AM IST
गैस अटैक ड्रिल करते भारतीय जवान। गैस अटैक ड्रिल करते भारतीय जवान।

इंटरनेशनल डेस्क. फर्स्ट वर्ल्ड वॉर को हुए पूरी लगभग एक सदी बीत चुकी है। 1914 से 1918 के बीच यह युद्ध दो विरोधी सैन्य गठबंधनों के बीच लड़ा गया था। एक तरफ अमेरिका, रूस और फ्रांस थे, तो दूसरी ओर जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी और इटली थे। इसके बाद एक के बाद एक ढेरों देश इस जंग में कूद पड़े। ब्रिटेन की तरफ से हजारों भारतीय सैनिकों ने जंग में हिस्सा लिया था। कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन के मुताबिक, जंग में अविभाजित भारत से 11 लाख सैनिक शामिल हुए थे। मुट्ठी भर जवानों को आती थी अंग्रेजी...

- फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के दौरान भारत में अंग्रेजों का राज था। इसके चलते ब्रिटिश शासकों ने जंग में भारतीय सेना की भी मदद ली।
- इस दौरान भारतीय सेना (जिसे कभी-कभी ब्रिटिश भारतीय सेना कहा जाता है) ने वर्ल्ड वॉर में यूरोपीय, भूमध्यसागरीय और मध्य पूर्व के युद्ध क्षेत्रों में अपने अनेक डिविजनों और स्वतंत्र ब्रिगेडों का योगदान दिया था।
- 11 लाख भारतीय सैनिकों में से करीब 62,000 सैनिक मारे गए थे और करीब 67,000 घायल हो गए थे। वहीं, लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 9200 से भी ज्यादा को वीरता पदक से सम्मानित किया गया था।
- उस वक्त पंजाब में साक्षरता की दर महज पांच फीसदी थी। भारतीय सैनिकों में आधे से ज्यादा लोग इसी सूबे से लड़ने जाते थे। उनमें से कई लोग दस्तखत करना जानते थे और मुट्ठी भर ऐसे जवान भी थे, जो अंग्रेसी में लिख सकते थे।

जंग के लिए जानवर भी भेजे गए
- चार साल चली इस जंग के दौरान भारत से 1 लाख 70 हजार जानवर भी बाहर भेजे गए। इनमें घोड़े, खच्चर, टट्टू, ऊंट, बैल और दूध देने वाले जानवर भी शामिल थे।
- इनमें 8970 खच्चर और टट्टू ऐसे भी थे जिन्हें बाहर से भारत लाकर ट्रेनिंग दी गई और फिर युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाता था।

आगे की स्लाइड्स में देखें फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में भारतीय सेना की फोटोज...

मिलिट्री ऑपरेशन में सपोर्ट के लिए लाए जाते भारतीय जवान। मिलिट्री ऑपरेशन में सपोर्ट के लिए लाए जाते भारतीय जवान।
मार्च-पास्ट करते भारतीय जवानों की ड्रेस पर फूल लगाती महिला। वो इस तरह जवानों को ट्रेडिश्नल वेलकम दे रही हैं। मार्च-पास्ट करते भारतीय जवानों की ड्रेस पर फूल लगाती महिला। वो इस तरह जवानों को ट्रेडिश्नल वेलकम दे रही हैं।
1918 की गर्मियों में फलस्तीन की अउजा नदी में नहाते हुए भारतीय जवान। 1918 की गर्मियों में फलस्तीन की अउजा नदी में नहाते हुए भारतीय जवान।
फ्रांस में कैम्प के पास भारतीय सोल्जर खाना बनाते हुए। फ्रांस में कैम्प के पास भारतीय सोल्जर खाना बनाते हुए।
पूरे साजो सामान के साथ लैस यूरोपीय सैनिकों की वर्दी पहने दो भारतीय। दूसरी फोटो बास्तिल डे परेड के बाद की है, जिसमें पारसी समुदाय के लोग भारतीय सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए। पूरे साजो सामान के साथ लैस यूरोपीय सैनिकों की वर्दी पहने दो भारतीय। दूसरी फोटो बास्तिल डे परेड के बाद की है, जिसमें पारसी समुदाय के लोग भारतीय सैनिकों का उत्साह बढ़ाते हुए।
1915 की ये फोटो गल्लीपोली में इंडियन म्यूल कंपनी के दो भारतीय अफसरों की है। 1915 की ये फोटो गल्लीपोली में इंडियन म्यूल कंपनी के दो भारतीय अफसरों की है।
बगदाद रेलवे स्टेशन पर तैनात भारतीय सोल्जर। ये फोटो मार्च 1917 की है। बगदाद रेलवे स्टेशन पर तैनात भारतीय सोल्जर। ये फोटो मार्च 1917 की है।
बेनेट (संगीन) की प्रैक्टिस करते जवान। बेनेट (संगीन) की प्रैक्टिस करते जवान।
सालोनिका में स्पोर्ट्स डे पर जिमनास्टिक परफॉर्म करते भारतीय जवान। सालोनिका में स्पोर्ट्स डे पर जिमनास्टिक परफॉर्म करते भारतीय जवान।
ब्रिगटन में रॉयल पवेलियन पर जख्मी हालत में भारतीय जवान। ब्रिगटन में रॉयल पवेलियन पर जख्मी हालत में भारतीय जवान।
ब्रोकेनहर्स्ट के लेडी हार्डिंग अस्पताल में एक कार्यक्रम का मजा लेते भारतीय जवान। ब्रोकेनहर्स्ट के लेडी हार्डिंग अस्पताल में एक कार्यक्रम का मजा लेते भारतीय जवान।
प्रार्थना करते जवान। प्रार्थना करते जवान।
दूसरे देशों से भारत लाकर ट्रेन्ड किए जा रहे खच्चर और टट्टू। दूसरे देशों से भारत लाकर ट्रेन्ड किए जा रहे खच्चर और टट्टू।