Hindi News »International News »International» 5 Questions About Potential US-North Korea Talks

पहली बार मिलेंगे दुनिया के दो कट्टर दुश्मन, पर अब भी उठ रहे ये 5 सवाल

अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प और नॉर्थ कोरियाई तानाशाह किम जोन्ग उन एक दूसरे से मिलने को राजी हो गए हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 09, 2018, 02:30 PM IST

  • पहली बार मिलेंगे दुनिया के दो कट्टर दुश्मन, पर अब भी उठ रहे ये 5 सवाल, international news in hindi, world hindi news
    +4और स्लाइड देखें

    इंटरनेशनल डेस्क.अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प और नॉर्थ कोरियाई तानाशाह किम जोन्ग उन एक दूसरे से मिलने को राजी हो गए हैं। किम ने ट्रम्प को न्योता भेजा था, जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया है। इसे कोरियन पेनिन्सुइला में न्यूक्लियर गतिरोध रोकने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दुनियाभर को इस दिन का इतंजार है, जब ये दोनों देश मिलेंगे और इनकी मुलाकात के कुछ पॉजीटिव नतीजे सामने आएंगे। ट्रम्प ने भी ट्वीट कर इसे संभावित प्रगति का कदम बताया है। हालांकि, इस ताजा डेवलपमेंट के बीच अब भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    Q. क्या नॉर्थ कोरिया अपने न्यूक्लियर वेपन्स छोड़ने को लेकर गंभीर है?
    A. नॉर्थ कोरिया के न्यूक्लियर वेपन्स छोड़ने की उम्मीद तो नहीं है, लेकिन अगर वो बातचीत के बाद न्यूक्लियर टेस्ट सस्पेंड करने का दावा करता है तो निश्चित तौर पर ये तनाव को कम करने में एक बड़ा कदम साबित होगा। आर्म्स कंट्रोल एनालिस्ट रॉबर्ट एनहॉर्न के मुताबिक, इस मुलाकात में अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को छोड़ने या बंद करने को लेकर बिना शर्त कोई प्रतिबद्धता नहीं है। ये भी साफ नहीं है कि दोनों इस मुद्दे पर कितने प्रतिबद्ध हैं।

    हालांकि, एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि कई बार ऐसी मुलाकातों के नतीजे बहुत ही चौंकाने वाले होते हैं। जॉन हॉपकिन्स स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज में यूएस-कोरिया इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर जेनी टाउन ने कहा कि ये मुलाकात दोनों देशों को कई नए मौके देगी।

    आगे की स्लाइड्स में जानें आखिर क्या तानाशाह पर भरोसा कर पाएगा अमेरिका...

  • पहली बार मिलेंगे दुनिया के दो कट्टर दुश्मन, पर अब भी उठ रहे ये 5 सवाल, international news in hindi, world hindi news
    +4और स्लाइड देखें

    Q. क्या तानाशाह पर भरोसा कर पाएगा अमेरिका ?
    A. नॉर्थ कोरिया या तानाशाह पर भरोसा न कर पाने के बहुत सारे कारण हैं। जेनी टाउन ने कहा, ''हमें किसी भी भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि दोनों देश इतनी आसानी से न्यूक्लियर वेपन्स छोड़ देंगे।'' 1994 के एग्रिमेंट से लेकर नॉर्थ कोरिया के न्यूक्लियर वेपन्स रोकने की पिछली सभी कोशिशें नाकाम साबित हुईं। इसके पक्के सबूत हैं कि नॉर्थ कोरिया ने अमेरिका से डील के बावजूद अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को बहुत तेजी से आगे बढ़ाया। हाल के दिनों में नॉर्थ कोरियन लीडर किम जोन्ग उन ने एक के बाद एक बैलिस्टिक मिसाइल की टेस्टिंग कर अपने न्यूक्लियर आर्म्स प्रोग्राम को आगे बढ़ाया है। नॉर्थ कोरिया की मिसाइलें अब अमेरिकी शहरों तक पहुंचने में सक्षम हो गई हैं।

  • पहली बार मिलेंगे दुनिया के दो कट्टर दुश्मन, पर अब भी उठ रहे ये 5 सवाल, international news in hindi, world hindi news
    +4और स्लाइड देखें

    Q. आखिर इस बातचीत में सहमति बनाने के बदले में नॉर्थ कोरिया क्या चाहता है ?
    A. नॉर्थ कोरिया का कहना है कि न्यूक्लियर निशस्त्रीकरण के बदले में वो सुरक्षा की गारंटी चाहता है, लेकिन ये साफ नहीं किया है कि इससे उनका मतलब क्या है। प्योंगयांग लगातार अमेरिका और साउथ कोरिया की ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज को लेकर शिकायत करता रहा है और इसे नॉर्थ पर हमले का ड्राय रन करार देता रहा है। इसके अलावा नॉर्थ कोरिया साउथ कोरिया से अमेरिकी फोर्स को हटाने के बारे में भी कह सकते हैं। नॉर्थ कोरिया चाहता है कि अमेरिका और साउथ कोरिया के बीच सिक्युरिटी पैक्ट खत्म हो। बता दें, साउथ कोरिया के बेस में अमेरिका के करीब 25000 से ज्यादा जवान तैनात हैं।

    नॉर्थ कोरिया ये भी चाहेगा कि न्यूक्लियर प्रोग्राम के चलते उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हट जाएं, जो बार-बार संघर्ष करती इकोनॉमी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पिछली बातचीत में वो वित्तीय प्रोत्साहन के लिए भी कह चुके हैं।

  • पहली बार मिलेंगे दुनिया के दो कट्टर दुश्मन, पर अब भी उठ रहे ये 5 सवाल, international news in hindi, world hindi news
    +4और स्लाइड देखें

    Q. आखिर इस वक्त पर नॉर्थ कोरिया ने क्यों दिया मीटिंग का न्योता ?
    A. कोरियन पेनिन्सुइला में तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट मून जे इन की कोशिशों से शुरू हो रही है। पहला कदम मून ने बढ़ाया था। उन्होंने नॉर्थ कोरिया को प्योंगचांग में हुए ओलिंपिक में शामिल होने का न्योता दिया था, जिसमें वो शामिल भी हुए। इसके बाद इसी हफ्ते मून एडमिनिस्ट्रेशन के मेंबर्स किम से मिलने के लिए नॉर्थ कोरिया आए थे। हालांकि, किम के अमेरिका को दिए बातचीत के न्योते के पीछे सिर्फ ये वजहें ही नहीं हैं। कहीं न कहीं अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते लड़खड़ाती इकोनॉमी भी एक बड़ी वजह हो सकती है। रॉबर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरियन रेजिम प्रतिबंधों के दबाव को कम चाहती है।''

  • पहली बार मिलेंगे दुनिया के दो कट्टर दुश्मन, पर अब भी उठ रहे ये 5 सवाल, international news in hindi, world hindi news
    +4और स्लाइड देखें

    Q. अब अगला कदम क्या होगा ?
    A. साउथ कोरिया ने कहा कि मून और किम के बीच अप्रैल के आखिर में डिमिलिट्राइज्ड जोन में एक समिट हो सकती है। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के काफी बारीकी से इस पर नजर रखने की उम्मीद है। ताकि वो नॉर्थ कोरिया के कदम को भांप सके और इस बात का अंदाजा लगा सके कि किम मीटिंग से पहले न्यूक्लियर निशस्त्रीकरण को लेकर कितना राजी हैं।

Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए International News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: 5 Questions About Potential US-North Korea Talks
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From International

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×