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8 दिन पहले ट्रैफिक लाइट पर शुरू हुआ झगड़ा, अब इमरजेंसी में बदला

श्रीलंका में सांप्रदायिक हिंसा को देश के दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए पूरे राज्य में इमरजेंसी लगा दी गई है।

Danik Bhaskar | Mar 07, 2018, 11:38 AM IST
श्रीलंका में संघर्ष के बाद सड़क पर तैनात सेना के जवान। श्रीलंका में संघर्ष के बाद सड़क पर तैनात सेना के जवान।

कोलंबो. म्यांमार के बाद श्रीलंका में बौद्ध और मुसलमानों के बीच दंगे भड़के हैं। कैंडी में हुई हिंसा में दो लोगों के मारे जाने की खबर है। 10 से ज्यादा लोग जख्मी हुए है। मुसलमानों और मस्जिदों पर सिलसिलेवार हमलों के बाद सरकार ने पूरे देश में 10 दिनों के लिए इमरजेंसी लगा दी है। सात साल में पहली बार श्रीलंका में इमरजेंसी लगी है। इससे पहले तीन दशक तक सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच चले युद्ध के दौरान देश में इमरजेंसी रही थी। यह संघर्ष 2009 में खत्म हुआ था।

श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता दयासिरी जयाशेकरा ने कहा, 'सांप्रदायिक हिंसा को देश के दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए पूरे राज्य में इमरजेंसी लगा दी गई है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।' मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस दंगे की वजह पिछले दिनों से दोनों समुदाय के बीच चला आ रहा तनाव है। 27 फरवरी को पूर्वी प्रांत के अंपारा कस्बे में हिंसा हुई। यहां ट्रैफिक रेड लाइट पर हुए झगड़े के बाद कुछ मुसलमानों ने एक सिंहली बौद्ध युवक की पिटाई कर दी थी। तभी से वहां तनाव बना हुआ है। सोमवार को एक बौद्ध व्यक्ति की मौत के बाद भी इलाके में तनाव बना हुआ था।

बौद्ध मठ और चाय बागानों के लिए जाना जाता है कैंडी
श्रीलंका की कुल आबादी दो करोड़ 10 लाख है। इसमें 70 फीसदी बौद्ध, 9 फीसदी मुस्लिम, 13 फीसदी तमिल हिंदू और 7.6 फीसदी ईसाई हैं। कैंडी में कर्फ्यू लगा है। दंगा रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। कैंडी बौद्ध मठ और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। श्रीलंका की पहली स्मार्ट सिटी भी इसी क्षेत्र में प्रस्तावित है।


हिंसा क्यों...दो माह में बौद्ध और मुस्लिमों के बीच 20 से ज्यादा बार हुई हिंसा, दो की मौत
श्रीलंका में बीते छह साल से बौद्ध-मुस्लिमों के बीच तनाव बढ़ा है। बौद्ध संगठनों का आरोप है कि मुस्लिम लोगों का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। बौद्ध मठों को तोड़ रहे हैं। 2 महीने में दोनों समुदाय में 20 से ज्यादा बार हिंसा हुई।


तनाव कब से...म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण देने से बौद्ध नाराज हैं
म्यांमार भी बौद्ध और रोहिंग्या मुसलमानों के बीच संघर्ष हो रहा है। श्रीलंका ने रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण दी है। बौद्ध समूह इससे नाराज है। म्यांमार हिंसा के बाद से ही यहां बौद्ध मुस्लिम विरोधी मार्च निकाल रहे हैं।

हिंसा के पीछे कौन... कहा जा रहा है बौद्धों की बोदू बला सेना सद्भाव बिगाड़ रही है
हिंसा के पीछे बोदू बला सेना (बीबीएस) को बताया जा रहा है। 4 साल पहले अलुथगामा जिले में मुस्लिमों पर हुई हिंसा में 4 लोग मारे गए। ये हिंसा बीबीएस के मुस्लिम विरोधी मार्च के बाद हुई थी। हालांकि, उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हिंसा के पीछे दो अहम कारण

सामाजिक
दोनों वर्गों के खानपान, रहन-सहन में बड़ा अंतर

श्रीलंका में मुसलमानों का मुस्लिम परंपरा के तहत मांसाहार या पालतू पशुओं को मारना बौद्ध समुदाय के लिए एक विवाद का मुद्दा रहा है। बोदू बला सेना का कहना है कि जीव हत्या पर रोक लगनी चाहिए। वो मुस्लिमों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की बात करता है। इस संगठन को मुसलमानों की बढ़ती आबादी से भी शिकायत है।


आर्थिक
मुसलमानों की संपन्नता, बढ़ता राजनीतिक कद

श्रीलंका के मुस्लिम युवक सऊदी अरब में काम कर रहे हैं। इससे उनकी संपन्नता बढ़ रही है। श्रीलंका की मस्जिदों को भी अरब से फंड मिलता है। इससे बौद्धों को लगता है कि उनके देश में विदेशी दखल बढ़ रहा है। इसके अलावा स्थानीय रोजगार में मुस्लिमों की भागीदारी बढ़ रही है। श्रीलंका में इस बार सात मुस्लिम सांसद बने हैं।

श्रीलंका में मुस्लिम: ध्वज में हरी पट्‌टी मुस्लिम को समर्पित, 749 मुस्लिम स्कूल और 205 मदरसे

श्रीलंका में 19.97 लाख की मुस्लिम आबादी है, जो देश की कुल आबादी का 9.66% है। श्रीलंका मुस्लिम आबादी के प्रति नरम रुख रखता है। राष्ट्रीय ध्वज में हरे रंग की पट्‌टी मुस्लिम और मूर समुदाय के लिए रखी गई है। देश में 749 मुस्लिम स्कूल और 205 मदरसे भी हैं। मुस्लिमों के हितों की रक्षा के लिए 1980 में मुस्लिम धर्म एवं सांस्कृतिक मंत्रालय भी बनाया गया था।

श्रीलंका आर्मी के जवान कैंडी के दिगाना में तोड़फोड़ में तबाह हुई जगहों पर मलबा हटाते हुए। श्रीलंका आर्मी के जवान कैंडी के दिगाना में तोड़फोड़ में तबाह हुई जगहों पर मलबा हटाते हुए।
कैंडी में सड़कों पर पैट्रोलिंग करते सैनिक। कैंडी में सड़कों पर पैट्रोलिंग करते सैनिक।