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दुनिया को बताए ऐसे रहस्य, मौत के दावों को भी साबित कर दिया था गलत

स्टीफन का जन्म 8 जनवरी 1942 में हुआ था। ठीक इसी दिन 300 साल पहले महान साइंटिस्ट गैलिलियो की मौत हुई थी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 14, 2018, 12:14 PM IST

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    व्हीलचेयर पर स्टीफन हॉकिन्स अपनी फैमिली के साथ।

    इंटरनेशनल डेस्क.दुनिया को ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी समझाने वाले स्टीफन हॉकिंग का 76 साल की उम्र में निधन हो गया। स्टीफन को महज 20 साल की उम्र में ही क्रैंबिज कॉस्मोलॉजी सब्जेक्ट में रिसर्च के लिए चुन लिया गया था। हालांकि, 21 साल की उम्र में उन्हें एक गंभीर बीमारी एएलएस ने जकड़ किया, जिससे तंग आकर उन्होंने सुसाइड की भी कोशिश की। हालांकि, वो गनीमत रही कि वो बच गए और कॉस्मोलॉजी के इस एक्सपर्ट ने दुनिया को बिग बैंग और ब्लैक होल्स की थ्योरी को नई परिभाषा दी। अगर उनकी मौत हो जाती तो दुनिया इन दो बड़े रहस्यों से महरूम रह जाती। यहां हम उनकी लाइफ से जुड़े ऐसे ही इस्ट्रेस्टिंग फैक्ट्स के बारे में बता रहे हैं।

    स्टीफन ने भी मानी थी सुसाइड की कोशिश की बात

    स्टीफन हॉकिंग ने तकरीबन 38 साल की उम्र में एक बार खुदकुशी की भी कोशिश की थी। इस बात को खुद स्टीफन ने भी माना था। उन्होंने ये बात स्वीकार करते हुए कहा था कि वे अपनी बीमारी से बेहद परेशान हो चुके थे। हॉकिंग ने यह कदम 1980 के दशक में उठाया था।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें हॉकिन्स की लाइफ से जुड़े ऐसे ही बाकी फैक्ट्स...

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    स्टीफन की ये फोटो 2007 की है, जब वो एयरक्राफ्ट में सवार होकर वेटलेसनेस का अनुभव ले रहे हैं।

    55 साल तक बीमारी से लड़कर मौत को दी मात

    महज 21 साल की उम्र में स्टीफन पर एक भयानक बीमारी एएलएस (एम्योट्रॉपिक लेटरल सलेरोसिस या लाउ गेहरिग्स डिसीस) उन पर हमला बोल चुकी थी। आम तौर पर यह बीमारी पांच साल में जान ले लेती है। बीमारी सामने आने के बाद डॉक्टरों ने भी कहा था कि वो दो साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे, लेकिन उन्होंने बीमारी के बाद 55 साल से ज्यादा जिंदगी गुजारकर डॉक्टर्स की भविष्यवाणी को भी गलत साबित करते हुए आगे बढ़ते गए। उनका शरीर लगभग पूरी तरह लकवाग्रस्त था।

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    स्टीफन वाइफ जेन के साथ।

    स्कूल जाने में आलसी थे स्टीफन

    स्टीफन हॉकिंग ने 8 साल की उम्र में स्कूल जाना शुरू किया था, लेकिन वो लिखना और पढ़ना सीखने में नाकाम रहे। जब वो 9 साल के थे तो उनकी क्लास में सबसे खराब रैंक आई। ऐसा नहीं था कि वो बुद्धिमान नहीं थे, बल्कि इसके पीछे असल वजह ये थी कि वो बहुत आलसी और पढ़ने-लिखने में ढीले थे। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी पढ़ाई में ध्यान दिया और अपनी ग्रेड ठीक की, लेकिन वो हमेशा एवरेज स्टूडेंट ही रहे। हालांकि, एवरेज परफॉर्मेंस के बाद भी उन्होंने ऑक्सफोर्ड इंटरेंस एग्जाम क्लियर किया और 17 साल की उम्र में फिजिक्स की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप जीती।

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    मौत और जन्म की तारीख के साथ जुड़ा है ऐसा इत्तेफाक
    स्टीफन हॉकिंग के जन्म और मौत की तारीख के साथ भी एक गजब का इत्तेफाक जुड़ा है। 14 मार्च को उनकी मौत ऐसे दिन हुई, जिस दिन 139 साल पहले महान साइंटिस्ट अलबर्ट आइंस्टाइन का जन्म हुआ था। उनके जन्मदिन को लेकर पर कुछ ऐसा ही इत्तेफाक है। उनका जन्म 8 जनवरी 1942 में हुआ था। ठीक इसी दिन 300 साल पहले महान साइंटिस्ट गैलिलियो की मौत हुई थी।

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    स्टीफन हॉकिन्स।

    मशीन के जरिए ऐसे करते थे बातचीत
    स्टीफन का शरीर लगभग पूरी तरह लकवाग्रस्त था। अपनी आवाज की जगह वे एक खास मशीन का इस्तेमाल करते थे। उनके वीलचेयर पर लगे कंप्यूटर के स्क्रीन पर शब्द आते-जाते रहते थे। चेहरे की एक मसल से वे अपने चश्मे पर लगे सेंसर के जरिए कंप्यूटर को निर्देशित करते थे। इस तरह धीरे-धीरे वो वाक्य बनाते और मशीनी आवाज के जरिए बातचीत करते थे। मशीन से आने वाली आवाज अमेरिकी लहजे में होती थी।

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    स्टीफन बेटी लूसी हॉकिन्स के साथ।

    हॉकिंग की जिंदगी पर बनी है फिल्म

    साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग की जिंदगी पर डायरेक्टर जेम्समार्श ने एक फिल्म भी बनाई है। फिल्म का नाम थ्योरी ऑफ एवरीथिंग है। फिल्म में हॉकिंग की भूमिका निभाने वाले ब्रिटिश एक्टर एडी रेडमायने ने एक्टिंग से पहले कई महीने तक बोलने की ट्रेनिंग ली थी। वे शारीरिक रूप से अक्षम मरीजों के बीच भी रहे।

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    स्टीफन हॉकिन्स।

    साइंस से जुड़ी सबसे ज्यादा बिकने वाली बुक लिखी
    1988 में उन्हें सबसे ज्यादा चर्चा तब मिली थी, जब उनकी पहली बुक 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम: फ्रॉम द बिग बैंग टु ब्लैक होल्स' मार्केट में आई। कॉस्मोलॉजी पर आई उनकी इस बुक की 20 साल में 1 करोड़ से ज्यादा कॉपीज बिकी थीं। इसे दुनिया भर में साइंस से जुड़ी सबसे ज्यादा बिकने वाली बुक माना जाता है।

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