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पाकिस्तान का पर्दाफाश, क्या ये मोदी इंपैक्ट है

डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को धोखेबाज साथी बताते हुए उसकी 1628 करोड़ रुपए की मदद रोक दी है।

dainikbbhasakr.com | Last Modified - Jan 01, 2018, 08:10 PM IST

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    वॉशिंगटन.यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने नए साल के पहले दिन पाकिस्तान को तगड़ा झटका दिया है। उन्होंने पाकिस्तान को धोखेबाज साथी बताते हुए उसकी 1628 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद रोक दी है। ट्रम्प के इस बयान को फॉरेन एक्सपर्ट्स एक सोची समझी स्ट्रैटजी के तौर पर ले रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की मौजूदा हालत की बड़ी वजह भारत और अमेरिका की नजदीकियां हैं। मोदी के दौर में भारत की फॉरेन पॉलिसी से ये फर्क आया कि अमेरिका को भी पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोकनी पड़ी है। आइए, आपको बताते हैं कि मोदी और ट्रम्प की दोस्ती के बाद कैसे इंटरनेशनल कम्युनिटी में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। मोदी और ट्रम्प की दोस्ती आई काम...

    पाकिस्तान पर मोदी और ट्रम्प की एक जैसी सोच

    ट्रम्प का पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोकना इतना आसान नहीं था। इससे पहले भारत के नजदीकी रहे पूर्व यूएस प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश और बराक ओबामा भी पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा फैसला नहीं ले पाए थे। जानकार बताते हैं कि बीते साल अमेरिका में ट्रम्प के आने के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई। उन्होंने कई बार इलेक्शन कैम्पेन में पाकिस्तान का नाम लेकर उसके यहां आतंकी ठिकानों को नष्ट करने की बात कही थी। इसके अलावा अमेरिका का ये कदम पाकिस्तान पर मोदी और ट्रम्प की एक जैसी सोच का नतीजा भी है। पीएम मोदी ने भी बीते दो सालों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की काफी खिंचाई की है, जिससे वो इंटरनेशनल कम्युनिटी में अकेला हो गया है।

    आगे की स्लाइड्स में देखें, पाकिस्तान की कब-कब हुई फजीहत...

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    भारत से डरा फलस्तीन

    बीते दिनों पाकिस्तान की फजीहत का ताजा मामला सामने आया था, जब फलस्तीन ने अपने राजदूत को पाकिस्तान से वापस बुला लिया। दरअसल, फलस्तीनी राजदूत अमेरिका की आतंकी सूची में शामिल हाफिज सईद की रैली में देखे गए थे। जिस पर भारत ने फलस्तीन पर कड़ा एतराज जताया था। दबाव में फलस्तीन को अपना पाकिस्तान से राजदूत वापस बुला लिया। दरअसल, भारत और फलस्तीन के रिश्ते बेहद ही अच्छे रहे हैं और फलस्तीन किसी भी कारण से दुनिया के पावरफुल नेताओं में शामिल मोदी को नाराज पहीं करना चाहता है। इसके अलावा फलस्तीन ने पाकिस्तान को ये संदेश दे दिया है कि वो हाफिज सईद जैसे धार्मिक नेताओं को मान्यता नहीं देता।

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    इंटरनेशनल कोर्ट में जाधव मामले में पाक की हार


    जासूसी के आरोप में पकड़े भारतीय बिजनेसमैन कुलभूषण जाधव को पाक मिलिट्री कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन भारत

    इस फैसले के खिलाफ हेग इंटरनेशनल कोर्ट पहुंच गया। उसने बताया कि कैसे बिना किसी सबूत के पाकिस्तान ने जाधव को फांसी की

    सजा सुनाई है। सभी सबूतों को ध्यान में रखकर इंटरनेशनल कोर्ट ने पाकिस्तान के इस फैसले पर रोक लगा दी। इस फजीहत के बाद

    पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि जाधव को फांसी दे या नहीं।

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    ब्रिक्स में पाक समर्थित आतंकवाद का जिक्र


    बीते साल ब्रिक्स समिट के ज्वाइंट डिक्लेरेशन में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का पहली बार जिक्र किया गया था। माना जाता है कि

    ऐसा मोदी के दबाव के चलते हुआ। हालांकि, चीन शुरुआत में पाकिस्तान के नाम के बिना इस डिक्लेरेशन में आतंक का नाम जोड़ना चाहता था। लेकिन भारत के अलावा रूस, ब्राजील और साउथ अफ्रीका के सपोर्ट के कारण चीन ब्रिक्स में ऐसा करने को मजबूर हुआ।

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    सुषमा की स्पीच और पाकिस्तान का झूठ


    पाक समर्थित आतंकवाद पर यूएन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की स्पीच दुनियाभर में सराही गई। इसके अलावा यूएन में ही पाकिस्तान की विशेष दूत मलीहा लोधी ने एक घायल महिला का फोटो जारी करते हुए उसे कश्मीर पीड़ित बताया। लेकिन बाद में वो महिला फलस्तीन की निकली। इस घटना से अंतरराष्ट्रीय कम्युनिटी में पाकिस्तान की काफी किरकिरी हुई थी।

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    सार्क सम्मेलन का बायकॉट

    सार्क समिट 2016 का आयोजन पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होना था। इसमें सार्क देशों के पीएम को शामिल होना था। लेकिन उसी साल भारत के उड़ी में हमला हो गया। इसके बाद भारत ने इसका बायकॉट कर दिया। भारत में हुए हमले की निंदा करते हुए बाद में बांग्लादेश, अफगानिस्तान, भूटान, श्रीलंका और मालदीव ने भी इस समिट का बायकॉट कर दिया। ये सिर्फ मोदी इफेक्ट के कारण ही पॉसिबल हो सका।

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