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यहां फल-सब्जी नहीं लगता है पैसों का बाजार, सड़कों पर ऐसे पड़ रहते हैं नोट

देश की करेंसी शिलिंग हैं, जिसकी कहीं भी कोई वैल्यू नहीं है। एक अमेरिकी डॉलर के लिए 9000 शिलिंग के नोट देने पड़ते हैं।

Dainik Bhaskar

Feb 06, 2018, 01:59 PM IST
Somaliland vendors exchange stacks of money on road with huge cash

इंटरनेशनल डेस्क. हर शहर या कस्बे में फल-सब्जियों और फूड का मार्केट होता है। पर ऐसे ही सड़क पर नोट या कैश का मार्केट मिल जाए, तो फिर ये किसी के लिए भी चौंकाने वाला हो सकता है। हालांकि, अफ्रीकी देश सोमालीलैंड के लोगों के लिए ये नजारा आम है। यहां सड़कों पर फ्रूट और फूड वेंडर्स की तरह ही मनी वेंडर्स बैठते हैं। वो भी बिना किसी सिक्युरिटी या आर्म्ड फोर्स के। वजह है यहां कौड़ियों के भाव हुए करेंसी के दाम। लिहाजा, थोड़े से सामान के लिए भी बैग भरकर नोट ले जाना पड़ता है, तो लोगों ने सुविधा के लिए यहां कैशलेस सिस्टम को ही अपना लिया। क्यों लगता है ऐसे नोटों का बाजार...

- सिविल वॉर के दौरान 1991 में सोमालिया से अलग होकर सोमालीलैंड एक नया देश बना। हालांकि, अब तक इसे अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्यता नहीं मिली है।
- सोमालीलैंड बेहद गरीबी से जूझ रहा है। यहां न कोई सिस्टम हैं और न ही कोई रोजगार है। यहां से ऊंटों का सबसे ज्यादा निर्यात होता है और कुछ कमाई टूरिज्म से आती है।
- देश की करेंसी शिलिंग हैं, जिसकी किसी भी देश में कोई वैल्यू नहीं है। इसीलिए यहां सिर्फ बड़े नोट यानी 500 और 1000 के नोट चलन में हैं। एक अमेरिकी डॉलर के लिए 9000 शिलिंग के नोट देने पड़ते हैं।
- कैपिटल इंडिया न्यूज के मुताबिक, अगर आप चाहें तो सोमालियन करेंसी खरीद सकते हैं। आपको 50 किलो से ज्यादा नोट सिर्फ दस डॉलर में ही मिल जाएंगे।
- देश में एक भी इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त बैंक नहीं है और न ही कोई बैंकिंग सिस्टम या एटीएम है। दो प्राइवेट कंपनीज जाद और ई-देहाब ने मोबाइल बैंकिंग इकोनॉमी खड़ी की है।
- यहां पैसे कंपनी के जरिए जमा होते हैं और फोन में स्टोर होते हैं। इसी फोन पर पर्सनलनाइज नंबर के जरिए सामान बेचा या खरीदा जा सकता है।
- लिहाजा, मनी एक्सचेंज के लिए सड़कों पर ऐसे नोटों का बाजार लगता है। लोग आने वाले टूरिस्ट से डॉलर्स और यूरो से मनी को एक्सचेंज करके अपना गुजारा कर रहे हैं।

यहां सबकुछ है कैशलेस
- देश में रद्दी के भाव हो चुकी कैश की कीमत के चलते सबकुछ लोगों ने कैशलैस व्यवस्था को अपना लिया है, क्योंकि यहां थोड़े से सामान के लिए बैग भरकर करेंसी ले जानी पड़ती है, जो मुमकिन नहीं है।
- ज्वैलरी शॉप चलाने वाले 18 साल के इब्राहिम के मुताबिक, गोल्ड का छोटा सा नेकलैस लेने के लिए करीब 10 से 20 लाख रुपए लगते हैं। इतनी रकम किसी के लिए भी लेकर जाना आसान नहीं, इसलिए कैशलेस सिस्टम ही लोग फॉलो करते हैं।

आगे की स्लाइड्स में देखें यहां लगे नोटों के बाजार की फोटोज...

Somaliland vendors exchange stacks of money on road with huge cash
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