एक चूक पड़ी थी भारी, एयर इंडिया प्लेन ब्लास्ट में चली गई थीं 300 जानें

4 वर्ष पहले
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इंटरनेशनल डेस्क. कनिष्क विमान हादसे को 30 से ज्यादा का वक्त गुजर गया, लेकिन इसके जख्म आज भी हरे हैं। इस विमान हादसे की वजह आतंकी हमला था। इसे इतिहास के बड़े विमान हादसों में एक माना जाता है। यह विमान 23 जून, 1985 को बम ब्लास्ट का शिकार हुआ था। इसमें प्लेन में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। कैसे और कब हुआ था हादसा...
 
- एअर इंडिया की फ्लाइट 182 ने 22 जून को कनाडा के मॉन्ट्रियल एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। 
- दूसरे दिन आयरिश हवाई क्षेत्र में आसमान में विमान में ब्लास्ट हुआ और वह टुकड़े-टुकड़े होकर अटलांटिक महासागर में जा गिरा। 
- जिस वक्त ये धमाका हुआ, उस वक्त विमान सी-लेवल (समुद्री जलस्तर) से 9,400 मीटर की ऊंचाई पर था। 
- विमान में सवार 22 क्रू मेंबर समेत सभी 307 यात्री मारे गए। यात्रियों में ज्यादातर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे।
- धमाके के वक्त प्लेन लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से करीब 45 मिनट की दूरी पर था। 
- कनिष्क विमान ब्रिटेन के समय के मुताबिक, सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर अचानक रडार से गायब हो गया था और विस्फोट के बाद विमान का मलबा साउथ आयरलैंड के कोस्टल इलाके में बिखरा मिला था। 
- इसके बाद अटलांटिक महासागर से यात्रियों के शव और विमान का कुछ मलबा निकाला गया। 
- कुछ पैसेंजरों के शव की जांच और मेडिकल चेकअप में पता चला था कि उनकी मौत ब्लास्ट के कारण नहीं, बल्कि समुद्र में डूबने से हुई। वे प्लेन में ऐसे हिस्से में बैठे थे, जहां वे ब्लास्ट से बच गए।
 
रोका जा सकता था ब्लास्ट
कनाडा सरकार, इंटेलिजेंस और सिक्युरिटी एजेंसियां अगर अलर्ट को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करतीं, तो ये हादसा रोका जा सकता था। कनाडा प्रशासन को इस बारे में भारतीय खुफिया एजेंसी और सरकार ने सतर्क किया था। भारत ने कनाडा से कहा था कि ऑपरेशन ब्लूस्टार का बदला लेने के लिए सिख उग्रवादी एअर इंडिया की फ्लाइट को निशाना बना सकते हैं। पीटीआई की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे की जांच करने वाले कनाडा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस जॉन मेजर ने 2010 में कहा था कि कनाडा सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। जॉन मेजर ने इस हादसे के लिए कनाडा सरकार, रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस और कनाडियन सिक्युरिटी इंटेलिजेंस सर्विस को जिम्मेदार ठहराया था।
 
सुरक्षा में रही खामियां
भारत से मिले अलर्ट के देखते हुए कनाडा सरकार को टोरंटो और मॉन्ट्रियल में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करना चाहिए था। वैसे, दोनों एयरपोर्ट पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, लेकिन इसके बावजूद कनाडा की फोर्स आतंकियों को रोक नहीं पाई। जांच के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था में खामी के कारण आतंकी प्लेन में बम रखने में कामयाब रहे।
 
आगे की स्लाइड्स में देखें कनिष्क विमान हादसे से संबंधित फोटोज...
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