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अरुण पुदुर; 13 की उम्र में गैराज चलाते थे, 34 में एशिया के सबसे अमीर युवा बने

वेल्थ एक्स की लिस्ट, टॉप 10 में चीन के छह, जापान के तीन, भारतीय टॉप पर।

Danik Bhaskar | May 12, 2015, 10:29 AM IST
न्यूयॉर्क। चेन्नई में जन्मे अरुण पुदुर एशिया के सबसे धनी युवा उद्योगपति बन गए हैं। दुनियाभर के अमीरों का हिसाब-किताब रखने वाली एजेंसी 'वेल्थ एक्स' की 40 से कम उम्र के उद्यमियों की लिस्ट में अरुण टॉप पर हैं। 34 साल के अरुण की सेलफ्रेम नाम की सॉफ्टवेयर कंपनी है।
उनकी संपत्ति 25 हजार करोड़ रुपए है। सेलफ्रेम के वर्ड प्रोसेसर माइक्रोसॉफ्ट के बाद दूसरे नंबर पर हैं। दूसरे नंबर पर चीन के झोउ याहुई हैं। सबसे युवा उद्योगपति 32 साल के लीओ चेन हैं, जो चीन में ऑनलाइन कॉस्मेटिक कंपनी चलाते हैं।
जिंदगी में एक ही चैप्टर पढ़ते रहोगे, तो अगले चैप्टर तक नहीं पहुंच पाओगे- लिस्ट में नाम आते ही ट्वीट

सबसे पहले अरुण पुदुर का नाम इसी मार्च में फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग के साथ आया था। 40 से कम उम्र में अरबपति बनने वाले उद्योगपतियों की लिस्ट में। तब अरुण ने एक मैगजीन को अपनी कहानी बताई थी। पढ़िए...
मैं जब छठी क्लास में था, तब परिवार बेंगलुरू गया था। पिता कम बजट वाली फिल्मों में सिनेमैटोग्राफर थे। नसीब हर शुक्रवार को तय होता था। मैं नहीं चाहता था कि वो यह काम करें। घर के पास एक दुकान में एक तमिल लड़का काम करता था। उससे मेरी दोस्ती थी। एक दिन उसने बताया गैराज में अच्छी कमाई है। मैंने मां से 8000 रुपए लिए और गैराज डाल लिया। काम तो आता नहीं था। उसी लड़के को देख-देखकर सीखता गया। कुछ दिनों बाद ऐसा सीखा कि सवा घंटे में काइनेटिक होंडा का इंजन बांधने लगा। धंधा चल पड़ा। गोवा तक से हर महीने 60 काइनेटिक होंडा सर्विस के लिए आने लगीं। इसरो वैज्ञानिक हमारे कस्टमर हो गए। कुछ समय बाद गैराज बंद कर दिया, क्योंकि कॉलेज की पढ़ाई बिगड़ रही थी। बाद में डॉग्स सेल का काम करने लगा। 20-20 हजार में पपी बेचे। इससे मार्केटिंग सीखी। लाखों कमाए। 17 की उम्र में 1998 में सेलफ्रेम बनाई। लेकिन फंडरेजिंग में दिक्कत आई तो ठंडे बस्ते में डाल फिर नौकरी करने लगा। जिस कंपनी में गया, उसका बिजनेस 4 लाख से 1 करोड़ तक पहुंच गया। बॉस ने कमीशन का वादा किया, पर दिया नहीं। सबक सीखा कि जो भी सौदा करो लिखित में करो। 9 महीने बाद फिर सेलफ्रेम शुरू की। 2006 में पहला प्रोडक्ट सेलफ्रेम ऑफिस लॉन्च किया। सालभर में ही कंपनी एक अरब रुपए की हो गई। अब कंपनी का मुख्यालय अमेरिका में है। भारत के अलावा मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप तक कारोबार फैल चुका है। 38 देशों में इसके प्रोडक्ट उपलब्ध हैं।