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हर 1 मिनट में यहां पहुंच रहे सैकड़ों मुस्लिम, ऐसे भयानक हो चुके हालात

हिंसा की वजह से अबतक लाखों रोहिंग्या जान बचाकर बांग्लादेश पहुंच चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 03, 2017, 07:10 PM IST

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इंटरनेशनल डेस्क.म्यांमार के रखाइन प्रांत में पिछले कई महीनों से हिंसा की आग भड़की हुई है। हिंसा की वजह से अब तक लाखों रोहिंग्या जान बचाकर बांग्लादेश पहुंच चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है। ‘इंटरनेशनल रिफ्यूजी ऑर्गनाइजेशन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां हरेक मिनट सैकड़ों रोहिंग्या पहुंच रहे हैं। इसके चलते रिफ्यूजी कैम्पों के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। रिफ्यूजी कैम्पों के चारों ओर पानी और दलदल है। नदी का पानी उतरने के चलते दलदल वाली जगह बढ़ती जा रही है। इससे म्यांमार से नदी पार कर यहां पहुंच रहे लोगों के लिए भयानक स्थिति पैदा हो गई है।हर पांच में से एक बच्चा कुपोषित...


- बांग्लादेश और म्यांमार की बॉर्डर पर शरण के लिए पहुंचे 6 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों में 58 फीसदी बच्चे हैं।
- न्यूज एजेंसी एफे के मुताबिक, बच्चों के लिए काम करने वाली यूनाइटेड नेशन्स की संस्था यूनिसेफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बच्चों पर संक्रमण से होने वाली बीमारियों का भी गंभीर खतरा है।
- यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक एंटोनी लेक ने एक बयान में कहा, "बांग्लादेश में कई रोहिंग्या शरणार्थियों ने म्यामांर में ऐसा अत्याचार देखा है, जैसा शायद पहले कहीं नहीं देखा गया होगा।
- रिपोर्ट तैयार करने वाले सिमोन इनग्राम ने बताया कि इलाके में हर पांच में से एक बच्चा ‘बेहद तेजी से बीमार और कुपोषित’ हो रहा है।

नदी पार करने में हजारों गंवा चुके हैं जान
- म्यांमार से बांग्लादेश तक पहुंचने के लिए रोहिंग्याओं को एक दलदलनुमा नदी पार करनी होती है।
- इस नदी में नाव पलटने से अब तक हजारों बच्चो, बूढ़ों और महिलाओं की मौत हो चुकी है।
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां के आर्मी अफसरों ने रोहिंग्या की करीब 20 नावों को तबाह कर दिया। अफसरों ने इन शरणार्थियों पर स्मग्लर होने का आरोप लगाया था।
- बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के दो शरणार्थी शिविरों में 25 अगस्त से पहले 34 हजार रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे थे, लेकिन अब इनकी संख्या करीब 6 लाख पहुंच चुकी है।
- इसके चलते लोगों के रहने के लिए जगह कम पड़ गई हैं। हालत ये है कि कैम्पों में शरणार्थियों को भोजन की कमी से भी जूझना पड़ रहा है।
- इसके अलावा, मेडिकल सुविधाओं में कमी की वजह से इन कैम्पों में बीमारियां फैलती जा रही हैं।

कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम?
- रोहिंग्या मुस्लिम प्रमुख रूप से म्यांमार के अराकान प्रांत में बसने वाले अल्पसंख्यक हैं। इन्हें सदियों पहले अराकान के मुगल शासकों ने यहां बसाया था।
- साल 1785 में बर्मा के बौद्ध लोगों ने देश के दक्षिणी हिस्से अराकान पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों को अपने इलाके से बाहर खदेड़ दिया।
- इसी के बाद से बौद्ध धर्म के लोगों और रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच से हिंसा और कत्लेआम का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।


आगे की स्लाइड्स में देखें म्यांमार से भागकर बांग्लादेश पहुंच रहे रोहिंग्या मुस्लिमों का दर्द दिखातीं PHOTOS...

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