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भारतीय सैनिकों को ऐसे किया गया था टॉर्चर, हुए थे इतने जवान शहीद

सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौर में भारत ने सितंबर 1939 को जर्मनी के खिलाफ जंग का एलान कर दिया था।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 07:21 PM IST

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    ब्रिटिश आर्मी की ओर से लड़ रहे सिख रेजीमेंट के जवानों को टॉर्चर करते हुए जापानीज सैनिक।
    इंटरनेशनल डेस्क. सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौर में भारत ने सितंबर 1939 को जर्मनी के खिलाफ जंग का एलान कर दिया था। इस युद्ध में ब्रिटेन की ओर से भारत के करीब दो लाख सैनिक थे, जिनमें से 87 हजार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। ये अफ्रीका, यूरोप और एशिया में अलग-अलग मोचोर्ं पर लड़े थे। इसी तरह ब्रिटिश आर्मी के साथ भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी सिंगापुर में भी जापान के खिलाफ लड़ रही थी। इस दौरान जापानीज आर्मी ने हजारों सैनिकों को बंधक बना लिया था, जिनमें से कईयों की क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई थी।सजा देने के लिए भी अपनाए कई तरीके...
    - फोटो में दिखाई दे रहे ये भारतीय सैनिक ब्रिटिश आर्मी के साथ सिंगापुर में जापानी आर्मी के खिलाफ लड़ रहे थे।
    - इस दौरान (1942-1945) तक सिंगापुर को जापानी साम्राज्य ने अपने अधीन कर रखा था। इस दौरान ब्रिटिश आर्मी के 10 हजार से ज्यादा जवान मारे गए, जिनमें भारतीय सैनिक भी शामिल थे।
    - जापानीज सैनिकों द्वारा हजारों सैनिकों की कईयों की क्रूरतापूर्वक हत्या की गई। इसमें गोलियों से भूनने से लेकर सरेआम गर्दन काटना तक शामिल था।
    - इतना ही नहीं, जापान द्वारा नए सैनिकों को बंदूक चलाने की प्रैक्टिस के दौरान बंधुआ सैनिकों का ही उपयोग किया जाता था, जिनके सिर पर सटीक निशाना लगाने की ट्रेनिंग दी जाती थी।
    - इसके अलावा जापानीज आर्मी ने हजारों सैनिकों को बंधक बना लिया था, जिन्हें बंधुआ मजदूर बनाकर रेलवे ट्रैक बिछाने से लेकर फैक्ट्रियों तक में काम करवाया जाता था।

    1942 में पहली बार किया गया था भारतीय फौज का इस्तेमाल
    ब्रिटिश सरकार ने सबसे पहले भारतीय फौज का इस्तेमाल 1942 में तब किया, जब जापान ने म्यांमार पर हमला बोल दिया था।
    - इस दौरान भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार अविभाजित भारत का ही हिस्सा थे। इस दौरान ब्रिटिश सैनिकों के साथ हजारों भारतीय सैनिक म्यांमार भेजे गए थे। इससे जापान को काफी नुकसान उठाना पड़ गया था।
    - जमीनी लड़ाई में खुद को हारता हुआ देख जापान ने फिर म्यांमार पर भारी बमबारी शुरू कर दी थी, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक शहीद हुए।
    एक नजर में सेकंड वर्ल्ड वॉर
    - एक सितंबर, 1939 को जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने पोलैंड पर हमला कर जंग का एलान किया था।
    - उसके साथ इटली, जापान, हंगरी, रोमानिया और बुल्गारिया थे।
    - दूसरी ओर, अमेरिका, सोवियत यूनियन, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, पोलैंड, यूगोस्लाविया, ब्राजील, ग्रीस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नार्वे, दक्षिण अफ्रिका, मेक्सिको, चेकोस्लोवाकिया और मंगोलिया की सेना खड़ी थी।
    - छह साल चले इस युद्ध में दोनों ओर से 2 करोड़ 40 लाख सिर्फ सैनिक ही मारे गए। चार करोड़ 90 लाख नागरिकों ने जान गंवाई।
    - अमेरिका और सहयोगी देशों से छह करोड़ दस लाख और जर्मनी खेमे से एक करोड़ बीस लाख लोग मारे गए।
    - अमेरिका ने छह और नौ अगस्त 1945 को जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए।
    - 15 अगस्त 1945 को जापान के शासक हिरोहितो रेडियो जापान के सरेंडर का एलान किया।
    - इसके बाद दो सितंबर 1945 को जापान ने अमेरिका के सामने सरेंडर कर दिया। इसके साथ वर्ल्ड वॉर का अंत हो गया।
    आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...
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    सिख रेजीमेंट के जवानों को गोलियों से भूनते हुए जापानीज सैनिक।
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    गोली मारने से पहले सैनिकों की हाथ बांधकर उनकी आंखों पर पट्टियां बांध दी जाती थीं।
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    जापान द्वारा नए सैनिकों को बंदूक चलाने की प्रैक्टिस के दौरान बंधुआ सैनिकों का ही उपयोग किया जाता था, जिनके सिर पर सटीक निशाना लगाने की ट्रेनिंग दी जाती थी।
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    एक ब्रिटिश सैनिक की गर्दन काटते हुए जापानीज सोल्जर।
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    जापानीज आर्मी ने हजारों सैनिकों को बंधक बना लिया था, जिन्हें बंधुआ मजदूर बनाकर रेलवे ट्रैक बिछाने से लेकर फैक्ट्रियों तक में काम करवाया जाता था।
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    सिंगापुर में मार्च करते हुए जापानीज सैनिक। (फोटो: 1942)
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    सैनिकों को बंधुआ मजदूर बनाकर रेलवे ट्रैक बिछाने से लेकर फैक्ट्रियों तक में काम करवाया जाता था।
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    बंदूक की नोंक से एक बंधुआ मजदूर का कत्ल करता हुआ जापानीज सैनिक।
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    जनरल तोमोयुकी यामाशिता, जो सिंगापुर जीतने के समय जापानीज फोर्स का इंजार्च था। वर्ल्ड वॉर खत्म होने के बाद यामाशिता को सामूहिक नरसंहार के आरोप में फांसी पर लटका दिया गया था।
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