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मिस्र: IS के झंडे लेकर मस्जिद में घुसे थे आतंकी, पहनी थी मिलिट्री ड्रेस

मिस्र की सिनाई मस्जिद हमले में करीब एक दर्जन आतंकियों ने 300 से ज्यादा लोगों को उतार दिया मौत के घाट।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 26, 2017, 05:45 PM IST

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    इंटरनेशनल डेस्क. मिस्र के सिनाई प्रांत में शुक्रवार को हुए मस्जिद हमलों में 300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। मामले की जांच में जुटे अधिकारियों के मुताबिक, हमलावर मिलिट्री की ड्रेस में थे और उनके हाथ में आतंकी संगठन आईएसआईएस के झंडे थे। मिस्र के सरकारी वकील ने बताया कि हमले के लिए आए 30 में से करीब 25 आतंकी एसयूवी में सवार होकर आए थे। सभी ने मास्क पहने हुए थे और हमले से पहले मस्जिद के मुख्य दरवाजे के सामने खड़े थे। हालांकि, अबतक किसी भी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है। जवाबी कार्रवाई कर रहा मिस्र...

    - इस हमले के बाद पूरे मिस्र में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।
    - बता दें कि इस हमले के बाद ही मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सीसी ने इस हमले का बदला लेने की बात कही थी। जिसके बाद सेना ने हवाई हमलों से आतंकी ठिकानों को खत्म करना शुरू कर दिया था।

    कैसे हुआ था हमला?
    - हमला मिस्र के अल अरिश शहर की अल-रावदा मस्जिद पर हुआ। MENA स्टेट न्यूज एजेंसी के मुताबिक, "मस्जिद के पास बम प्लान्ट किया गया था। धमाके के बाद जब लोगों ने बचकर भागने की कोशिश की तो बाहर सड़क किनारे खड़ी चार गाड़ियों में बैठे आतंकियों ने उन पर फायरिंग कर दी।''

    किन लोगों को निशाना बनाया गया?
    - मिस्र के मसरिया टीवी स्टेशन के मुताबिक, जिस मस्जिद को निशाना बनाया गया, वह सूफी संत शेख ईद अल जरीरी की जन्मभूमि है। यहां सूफीवाद को मानने वाले लोग नमाज अदा करने आते थे। इन सूफियों को मिस्र के आतंकी संगठन इस्लाम विरोधी मानते हैं।
    - हमले के बाद मिस्र की सरकार ने 3 दिन के शोक का एलान किया। प्रेसिडेंट अब्देल फतह अल-सीसी ने इस घटना पर चर्चा के लिए इमरजेंसी मीटिंग बुलाई।

    2011 के बाद बढ़े हमले
    - जनवरी 2011 में पूर्व प्रेसिडेंट होस्नी मुबारक का शासन खत्म होने के बाद से ही नॉर्थ सिनाई इलाके में हमले बढ़ गए थे। पूर्व
    - इस्लामिस्ट प्रेसिडेंट मोहम्मद मुर्सी के निष्कासन (Expulsion) के बाद पुलिस और मिलिट्री पर हमले और तेज हो गए। तब से अब तक मिस्र में 700 से ज्यादा सिक्युरिटी पर्सनल्स ने जान गंवाई है। 2014 में यहां सुसाइड बॉम्बिंग की घटना में 31 सैनिक मारे गए थे। इसके बाद प्रेसिडेंट अल-सीसी ने यहां स्टेट ऑफ इमरजेंसी का एलान तक कर दिया था।

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