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चीन ने पक्षियों की उड़ान की 90% नकल कर लेने वाले ड्रोन्स बनाए, भारत से सटी सीमा पर इस्तेमाल हो सकता है

चीन का कहना है कि अभी ऐसे ड्रोन्स कम ही बने हैं, लेकिन आने वाले वक्त में इन्हें और ज्यादा तैयार किया जा सकता है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 27, 2018, 07:19 PM IST

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बीजिंग. दुनिया में जहां दुश्मनों पर नजर रखने के लिए कई देश ड्रोन्स जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं, चीन इसका इस्तेमाल अपने ही नागरिकों पर निगरानी के लिए कर रहा है। फिलहाल इस तकनीक का इस्तेमाल पांच प्रांत में ही किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये ड्रोन्स पक्षियों की उड़ान की 90% नकल कर लेते हैं। इन्हें शिनजियांग प्रांत के उइघर स्वायत्त क्षेत्र में तैनात किया गया है। यहां चीन की सीमा पाकिस्तान, रूस और भारत समेत 8 अलग-अलग देशों से जुड़ती है। शिनजियांग प्रांत में ही भारत और चीन के बीच विवादित अक्साई चिन क्षेत्र आता है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस इलाके में भी इस ड्रोन्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पक्षियों की 90% नकल कर लेते हैं ड्रोन्स: रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन्स के पंखों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आप असली और नकली का फर्क नहीं कर पाते हैं। जमीन से देखने पर ये चिड़िया जैसे दिखते हैं। पंख हिलते तो ऐसा लगता है कि कोई चिड़िया उड़ रही है। ये 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकते हैं। इस वजह से इन पर कोई शक भी नहीं होता।

रडार की पकड़ से भी बच निकलते हैं:आकार छोटा होने की वजह से ये रडार की जद में नहीं आते। इनका वजन करीब 200 ग्राम है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, जीपीएस, आधुनिक कैमरे और सैटेलाइट डेटा लिंक भी मुहैया कराया गया है, जिससे हर वक्त लोगों पर नजर रखी जा सके। अभी पूरे देश में इन ड्रोन्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है, लेकिन टेस्टिंग के दौरान इन्हें सैन्य इस्तेमाल के लिए बेहतरीन बताया गया है। इस प्रोग्राम की टीम के सदस्य और चीन की नार्थवेस्ट पॉलिटेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यांग वेंकिंग ने बताया कि अभी ऐसे ड्रोन्स कम ही बने हैं, लेकिन आने वाले वक्त में इन्हें और ज्यादा तैयार किया जा सकता है।

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