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चीन से मदद ले रहे मालदीव ने भारत की सहायता ठुकराई, कहा- अपने हेलिकॉप्टर-सैनिक वापस बुलाओ

मालदीव में इस साल की शुरूआत में ही सरकार और सुप्रीम कोर्ट में विवाद छिड़ गया था, जिस पर भारत ने चिंता जताई थी

Danik Bhaskar | Aug 10, 2018, 09:30 PM IST
मालदीव में चीन ने काफी निवेश क मालदीव में चीन ने काफी निवेश क

  • मालदीव में इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था
  • भारत ने इस पर चिंता जाहिर की थी, जिसके बाद मालदीव ने खतरे की आशंका से चीन से करीबी बढ़ाना शुरू कर दिया

नई दिल्ली. मालदीव ने भारत से अपने सैन्य हेलिकॉप्टर और सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है। भारत के दो हेलिकॉप्टर और करीब 50 सैनिक इस वक्त मालदीव में हैं। दोनों देशों के बीच एक समझौते के तहत उन्हें वहां भेजा गया था। हालांकि, जून में समझौता खत्म होने के बाद अब मालदीव के राजदूत ने भारतीय विदेश मंत्रालय से इन्हें वापस बुलाने के लिए कहा है। भारत के लिए मालदीव में ये सबसे बुरी स्थिति मानी जा रही है, क्योंकि चीन पहले ही वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं में बड़े स्तर पर निवेश कर पैठ बना चुका है।

दरअसल, मालदीव में इसी साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राजनीतिक बंदियों को छोड़ने का आदेश दिया था। मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार करते हुए वहां 15 दिन की इमरजेंसी लागू कर दी थी। इस राजनीतिक संकट में मालदीव के विपक्षी नेता और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से सैन्य दखल की गुहार लगाई थी। भारत ने भी मालदीव के हालात पर चिंता जताई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद पैदा हो गया।

हमें भारतीय हेलिकॉप्टरों की जरूरत नहीं: भारत में मौजूद मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद ने न्यूज एजेंसी राॅयटर्स से कहा, “अभी हमारे पास भारत के दो मिलिट्री हेलिकॉप्टर हैं, जिन्हें राहत और बचाव कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब उनकी और जरूरत नहीं रह जाएगी, क्योंकि हम अपने बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के चलते खुद संसाधन बढ़ा सकते हैं।” मोहम्मद ने कहा कि भारत और मालदीव की सेनाएं अभी भी हर महीने साझा सैन्य अभियानों में हिस्सा ले रही हैं।

विदेश मंत्रालय संभाल रहा है स्थिति: मालदीव में अभी भारत के 50 सैन्यकर्मी हैं, जिनमें पायलट, मेंटेनेंस क्रू भी शामिल हैं। इनमें से कई लोगों की वीजा अवधि खत्म हो चुकी है, लेकिन नई दिल्ली ने अभी उन्हें वापस नहीं बुलाया है। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक, विदेश मंत्रालय इस स्थिति को संभालने में जुटा है।

भारत के लिए अहम क्यों है मालदीव?
सवा चार लाख की आबादी वाला मालदीव भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। हिंद महासागर में होने की वजह से ये देश भारत के लिए बेहद अहम है। अब तक कोई भी देश हिंद महासागर में भारत के विपक्ष में नहीं खड़ा हुआ है। हालांकि बीते कुछ समय में चीन ने वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत यहां निवेश करना शुरू किया है। 2011 तक चीन का मालदीव में कोई दूतावास भी नहीं था, लेकिन अब चीन वहां मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी में है। दोनों देशों के बीच हालिया समय में कई व्यापार समझौते भी हुए हैं। माना जा रहा है कि चीन मालदीव के बहाने भारत को घेरना चाहता है। उसने श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर भी निवेश किया है।