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बैंक ऑफ इंग्लैंड के गर्वनर नहीं बनना चाहते रघुराम राजन, कहा- मैं टीचर बनकर ही खुश हूं

रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के जल्द खाली होने वाले गर्वनर पद के लिए आवेदन नहीं करेंगे।

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 02:32 PM IST
Raghuram Rajan says won't apply for top Bank of England job

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के गर्वनर पद के लिए अप्लाई नहीं करेंगे। उन्होंने कहा है, 'मुझे उसकी कोई जरूरत नहीं है। मैं जहां हूं, खुश हूं।' राजन ने साफ किया है कि उनकी शिकागो यूनिवर्सिटी में जॉब अच्छी चल रही है और वह इससे खुश हैं। बता दें कि बैंक ऑफ इंग्लैंड में अगले साल गर्वनर की कुर्सी खाली हो रही है। इसके पद की दौड़ में दुनिया के टॉप बैंकर्स में से एक रघुराम राजन का नाम भी शामिल है। बैंक ऑफ इंग्लैंड, भारत के रिजर्व बैंक की तरह ही सेंट्रल बैंक है। प्रोफेशनल बैंकर नहीं हूं...

- राजन ने कहा है कि वह एक प्रोफेसर हैं और उनके पास शिकागो यूनिवर्सिटी की अच्छी नौकरी है। फिलहाल उनका नौकरी छोड़ने का कोई मन नहीं है। उन्होंने ये भी कहा है कि वह कोई प्रोफेशनल बैंकर भी नहीं हैं। वह एक एकेडमिक हैं। बता दें कि रघुराम राजन सितंबर, 2016 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके हैं और अब अमेरिका में प्रोफेसर की जॉब कर रहे हैं।

2019 में खाली होगा पद
जून 2019 में बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर का पद खाली हो जाएगा। अभी वहां पर मार्क कार्ने गवर्नर है, जो पहले कनाडा के सेंट्रल बैंक में भी प्रमुख रह चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की सरकार इस पद के लिए उम्मीदवारों की तलाश कर रही है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के तीन सदियों के इतिहास में 2013 में पहली बार किसी विदेशी ने इस बैंक के गवर्नर पद संभाला था।

कौन है रघुराम राजन?
- रघुराम राजन उन चुनिंदा लोगों में से थे, जिन्होंने 2008 की आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी की थी। उनकी भारतीय इकोनॉमी को संभालने के लिए उनकी तारीफ की जाती है।
- उन्होंने 2013 में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का पदभार संभाला था। इससे पहले भी वे शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ बिजनेस स्कूल में प्रोफेसर थे। जहां वे आरबीआई का कार्यकाल पूरा कर लौट गए।
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्में 55 साल के राजन आईआईटी नई दिल्ली, आईआईएम अहमदाबाद और मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र रह चुके हैं।
- वह हर जगह गोल्डमेडलिस्ट रहे हैं और बतौर आरबीआई गवर्नर उन्होंने भारत में सोने के आयात को कंट्रोल करने के अलावा नोटबंदी का दौर भी देखा था।
- उनके कार्यकाल में नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA), बैंकों की अंडर कैपिटलाइजेशन और रुपए को बचाने जैसे फैसलों पर प्राथमिकता दी गई। उस दौरान फॉरेन रिजर्व 100 अरब डॉलर बढ़ा गया था।
- आरबीआई गवर्नर बनने के पहले वह भारत की फाइनेंस मिनिस्ट्री में चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर के रूप में भी काम कर चुके थे।
- दूसरा कार्यकाल मिलने या न मिलने के कयासों के बीच राजन ने 2016 में ही घोषणा की थी कि वो उसी साल सितंबर में कार्यकाल खत्म होने के बाद पद से हट जाएंगे।

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