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स्विट्जरलैंड के कई ग्लेशियर सफेद कंबलों से ढंके, ताकि ग्लोबल वॉर्मिंग से बर्फ न पिघले

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 01:05 PM IST

इस पर्यटक स्थल को बचाने के लिए स्थानीय लोग खुद उठाते हैं ग्लेशियर ढंकने का खर्च

सफेद कंबल ऊष्मा को अंदर नहीं आने देते। साथ ही बर्फ और कंबल के बीच मौजूद हवा भी ऊष्मा की कुचालक होती है, जिससे बर्फ पिघलने से बचती है। सफेद कंबल ऊष्मा को अंदर नहीं आने देते। साथ ही बर्फ और कंबल के बीच मौजूद हवा भी ऊष्मा की कुचालक होती है, जिससे बर्फ पिघलने से बचती है।

- हर 10 साल में ग्लेशियर की मोटाई औसतन 33 फीट तक घट रही
- ग्लेशियोलॉजिस्ट ने बताया- इस तरीके से बर्फ को 70% तक पिघलने से बचाया जा सकता है

जिनेवा. ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से स्विट्जरलैंड के कई ग्लेशियर (रोन, सास-फी आदि ग्लेशियर) के पिघलने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में उन्हें सफेद कंबलों से ढंक दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है, ग्लोबल वॉर्मिंग और गर्मी की वजह से लगातार बर्फ पिघल रही है। इसे बचाने के लिए यह तरीका अपनाया जा रहा है।

बर्फ खत्म होने से सैलानियों में स्विट्जरलैंड का आकर्षण घटने की आशंका है। ऐसे में आसपास रहने वालों से भी ग्लेशियर ढंकने की अपील की जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सफेद कंबल धूप को अंदर नहीं आने देते। साथ ही, बर्फ और कंबल के बीच मौजूद हवा ऊष्मा से बचाती है, जिससे बर्फ पिघलने से बचती है। ग्लेशियोलॉजिस्ट डेविड वॉल्कन ने बताया, इस तरीके से बर्फ को पिघलने से 50% से 70% तक बचाया जा सकता है।

150 साल से पिघल रहे ग्लेशियर : डेविड के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में मौजूद ये ग्लेशियर करीब 150 साल से पिघल रहे हैं। फिलहाल इसकी ऊंचाई 1200 फीट तक है। स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क के हेड मैथिहास हस ने बताया कि हर 10 साल में ग्लेशियर की मोटाई औसतन 33 फीट तक घट जाती है। इस वजह से ग्लेशियर के पास झील बन गई। उनका कहना है कि अगर ग्लोबल वॉर्मिंग की यही स्थिति रही तो वर्ष 2100 तक ज्यादातर ग्लेशियर पिघल जाएंगे। पहाड़ी इलाकों में भी महज 10% बर्फ बचेगी।

स्थानीय लोग उठाते हैं ग्लेशियर ढंकने का खर्च : डेविड ने बताया कि समुद्र तल से 7500 फीट ऊपर स्थित इस ग्लेशियर को पूरी तरह ढंकने में कई घंटे लगते हैं। हजारों डॉलर का खर्च आता है। इस पर्यटक स्थल को बचाने के लिए यह खर्च ज्यादातर स्थानीय लोग ही उठाते हैं।

सर्दियों में पर्यटक ग्लेशियर टनल में घूमने आते हैं। सर्दियों में पर्यटक ग्लेशियर टनल में घूमने आते हैं।
रोन ग्लेशियर को ढंकने का खर्च स्थानीय नागरिक उठा रहे हैं। रोन ग्लेशियर को ढंकने का खर्च स्थानीय नागरिक उठा रहे हैं।
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सफेद कंबल ऊष्मा को अंदर नहीं आने देते। साथ ही बर्फ और कंबल के बीच मौजूद हवा भी ऊष्मा की कुचालक होती है, जिससे बर्फ पिघलने से बचती है।सफेद कंबल ऊष्मा को अंदर नहीं आने देते। साथ ही बर्फ और कंबल के बीच मौजूद हवा भी ऊष्मा की कुचालक होती है, जिससे बर्फ पिघलने से बचती है।
सर्दियों में पर्यटक ग्लेशियर टनल में घूमने आते हैं।सर्दियों में पर्यटक ग्लेशियर टनल में घूमने आते हैं।
रोन ग्लेशियर को ढंकने का खर्च स्थानीय नागरिक उठा रहे हैं।रोन ग्लेशियर को ढंकने का खर्च स्थानीय नागरिक उठा रहे हैं।
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