ऑपरेशन ब्लू स्टार से जुड़ीं फाइलाें को सार्वजनिक किया जाए- ब्रिटेन के जज का आदेश / ऑपरेशन ब्लू स्टार से जुड़ीं फाइलाें को सार्वजनिक किया जाए- ब्रिटेन के जज का आदेश

एेसा करने के पीछे ब्रिटिश सरकार की इस ऑपरेशन में संलिप्तता को अाैर ज्यादा साफ करना है।

Jun 13, 2018, 01:27 AM IST

  • इन दस्तावेज के सार्वजनिक किए जाने से आॅपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की संलिप्तता साफ हो सकती है
  • ब्रिटेन के नियमों के मुताबिक, गोपनीय दस्तावेज 30 साल के बाद ही सार्वजनिक किए जाते हैं

लंदन. यूके के एक जज ने भारत में 1984 में हुए आॅपरेशन ब्लू स्टार से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के अादेश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एेसा करने के पीछे ब्रिटिश सरकार की इस ऑपरेशन में संलिप्तता को अाैर ज्यादा साफ करना है। कोर्ट ने ये फैसला ब्रिटिश सरकार की भारत के साथ राजनायिक संबंधों के खराब होने की दलीलों को दरकिनार करते हुए दिया है।

क्यों दिया गया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का फैसला?

- बता दें कि मार्च में लंदन में जस्टिस मुरे शैंक्स तीन दिन चली फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कर चुके हैं। जिसमें 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन के शामिल होने संबंधी कैबिनेट ऑफिस की गोपनीय फाइलों को फ्रीडम और इंर्फोमेशन (एफओआई) के तहत सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

- ब्रिटेन के ही स्वतंत्र पत्रकार फिल मिलर की तरफ से मानवाधिकार विधिक कंपनी केआरडब्ल्यू लॉ ने ये अपील दायर की। जिसमें कहा गया था कि ब्रिटेन में मार्गरेट थैचर की सरकार के दौरान लोग 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार में भारतीय सेना को ब्रिटेन की सहायता दिए जाने के बारे में जानना चाहते थे।

क्या कहा जस्टिस मुरे ने?

- हालांकि, जस्टिस मुरे ने माना कि यूके की ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमेटी की एक फाइल 'इंडिया: पॉलिटिकल' नाम की फाइल में कुछ ऐसी जानकारी हो सकती है, जो ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एम 15, एम 16 और जीसीएचक्यू (गवर्नमेंट कम्यूनिकेशन हेडक्वार्टर) से जुड़ी हों।

- जस्टिस मुरे ने कहा, "हमें लगता है कि जिस मामले पर हम बात कर रहे हैं, वह भारत के हालिया सबसे संवेदनशील दौर से जुड़ा है और इससे ही मामले को जाहिर किए जाने को बल मिलता है।"

30 साल बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन ने क्यों दिए थे जांच के अादेश?

- 2014 में ब्रिटेन में 30 साल पुराने कुछ गोपनीय दस्तावेज जारी किए गए। इनमें से एक में दावा किया गया कि 1984 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर ने स्पेशल एयर सर्विस (एसएएस) को तैयार रहने के आदेश दिए थे। ताकि ऑपरेशन ब्लू स्टार में मदद की जा सके। बता दें कि ब्रिटेन के नियमों के मुताबिक, गोपनीय दस्तावेज 30 साल के बाद ही सार्वजनिक किए जाते हैं।

- ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सांसद टॉम वाॅटसन और हाउस ऑफ लार्ड्स के सिख सदस्य इंदरजीत सिंह ने इन दावों की जांच की मांग की थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन ने कैबिनेट सचिव को इसकी जांच का आदेश दिए थे। जिसे 'हेवुड रिव्यू'(Heywood Review) नाम दिया गया। इसके पीछे मकसद था- संसद में इस बात को साबित करना कि पूरे मामले में ब्रिटेन की भूमिका महज सलाहकार के तौर पर थी और ये सलाह देश की स्पेशल एयर सर्विसेस की तरफ से दी गई थी।

भारत में भी किसने की तथ्यों से पर्दा उठाने की मांग?

भारत में एसपीजीसी, अकाली दल और भाजपा ने केंद्र से ब्रिटेन से तथ्य मंगाने की मांग की थी। एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा था कि कांग्रेस सफाई देती रही है कि हालात बिगडऩे की आशंका से अचानक हमला करना पड़ा। जबकि, ब्रिटिश दस्तावेज साबित करता है कि महीनों पहले से इसकी तैयारी चल रही थी।

क्या है दस्तावेज, कैसे जारी हुआ?

- 2014 में सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में शामिल एक पत्र पर 23 फरवरी 1984 की तारीख और सिख कम्युनिटी अर्थात सिख समुदाय शीर्षक अंकित है। यह पत्र ऑपरेशन ब्लूस्टार के होने के 4 महीने पहले लिखा गया है।

- कथित तौर पर पत्र में लिखा है, "भारत सरकार ने श्री दरबार साहिब से उग्रवादियों को निकाल बाहर करने की योजना में ब्रिटेन की सलाह मांगी है। विदेश मंत्री ने इस आग्रह को माना। तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर की सहमति से ब्रिटिश वायुसेना के एक अधिकारी को इंदिरा गांधी से मिलने भारत भेजा। इस अधिकारी ने ही ऑपरेशन की सारी योजनाएं बनाई। उन्हें गांधी ने मंजूर किया। ब्रिटिश सरकार को तब ही पता चला था कि गांधी जल्द ही ऑपरेशन ब्लू स्टार को अमल में लाएंगी।"

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