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आतंकी समर्थक देशों की FATF ग्रे- लिस्ट में शामिल हुआ PAK, खकानी सरकार ने की पुष्टी

पाक ने पिछले दिनों इस लिस्ट में शामिल होने से बचने के लिए हाफिज सईद से जुड़े संगठनों पर कार्रवाई भी की थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 28, 2018, 09:09 PM IST

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    ग्रे लिस्ट में शामिल होने के बाद भी पाक को भरोसा है कि उसे एंटी मनी लॉन्ड्रिंग निगरानी की ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया जाएगा।- फाइल

    इस्लामाबाद. पाकिस्तान आतंकी देशों की मदद करने वाले देशों की लिस्ट में फिर शामिल कर लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाक सरकार ने खुद ये जानकारी दी है। इस कार्रवाई के बाद उसके दूसरे देशों से बैंकिंग लेनदेन खत्म हो जाएंगे, जिसका असर उसकी इकोनॉमी पर पड़ेगा। फोर्स टेरर एक्शन फाइनेंसिंग वॉचलिस्ट (एफएटीएफ) की यह ग्रे-लिस्ट में जून में जारी की जाएगी। बता दें कि एफएटीएफ उन देशों की एक्टिविटीज पर नजर रखता है जो आतंकियों को किसी भी तरह की मदद मुहैया कराते हैं। पाकिस्तान 2015 तक तीन साल इस लिस्ट में रहा।

    विदेश मंत्रालय ने की पुष्टी

    - पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल ने कहा कि पाक को एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में शामिल किया गया है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि उसे एंटी मनी लॉन्ड्रिंग वॉच की ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया जाएगा।

    - पाकिस्तान के अफसरों और विश्लेषकों को डर है कि एफएटीएफ लिस्ट में शामिल होने से पाक के दूसरे देशों से बैंकिंग कनेक्शन टूट जाएंगे। जिससे आम चुनाव नजदीक आते-आते अर्थव्यवस्था के लिए दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी।

    अमेरिका ने डाला था सदस्य देशों पर दबाव

    - पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में शामिल करने के लिए अमेरिका ने सदस्य देशों पर दबाव डाला।
    - अमेरिका पाकिस्तान पर लगातार आतंकी संगठनों से संपर्क खत्म करने और पड़ोसी देशों में हो रहे हमले में उनकी मदद करने पर नाराजगी जाहिर कर रहा है। चीन और सऊदी अरब शुरुआत में अमेरिका का विरोध कर रहे थे, लेकिन भारत से चीन की बातचीत के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे पर अकेला पड़ गया।

    बचने के लिए की थी हाफिज सईद पर कार्रवाई
    - पाक ने पिछले दिनों इस लिस्ट में शामिल होने से बचने के लिए हाफिज सईद से जुड़े संगठनों पर कार्रवाई भी की थी। लेकिन वह इस लिस्ट में शामिल होने से नहीं बच सका।


    कैसे लिस्ट में शामिल हुआ पाक
    - अमेरिका ने पिछले दिनों आतंकियों के खिलाफ सही कदम ना उठाने की वजह से पाकिस्तान को एफएटीएफ की लिस्ट में डालने का प्रस्ताव रखा था।
    - भारत, फ्रांस और ब्रिटेन ने अमेरिका के इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन, सउदी अरब और तुर्की ने पाकिस्तान को इस लिस्ट में डालने का विरोध किया था, लेकिन बाद में इन देशों ने भी अपना समर्थन वापस ले लिया।

    - बता दें कि एफएटीएफ की लिस्ट में अभी इथोपिया, श्रीलंका, सर्बिया, सीरिया, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, ट्यूनिशिया, वनुआतु, यमन और इराक जैसे देश शामिल हैं।

    कैसे काम करता है एफएटीएफ?
    - एफएटीएफ उन देशों की एक्टिविटीज पर नजर रखता है जो आतंकियों को किसी भी तरह की मदद मुहैया कराते हैं। ये फोर्स लिस्ट में शामिल देशों के आर्थिक संस्थानों पर भी कड़ी नजर रखती है, जिससे पाकिस्तान को बिजनेस में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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