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बड़े मिलिट्री जोन में तब्दील हो रहा है चीन का आर्थिक कॉरिडोर, स्थानीय लोग बेरोजगार हो रहे हैं: रिपोर्ट

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर अवसर और खतरे' नाम से हालही में एक रिपोर्ट जारी की।

Danik Bhaskar | Jul 07, 2018, 08:29 AM IST

- सीपीईसी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके से भी गुजरता है

ब्रुसेल्स. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (आईसीजी) की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) की वजह से बलूचिस्तान के स्थानीय लोग बेरोजगार और बेघर हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह सीपीईसी वाले क्षेत्र में बड़ी संख्या में सेना की तैनाती है। स्थानीय लोग परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं। सीपीईसी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके से गुजरता है, जिस पर भारत का दावा है। इसी वजह से परियोजना को लेकर भारत शुरू से ही आपत्ति जताता रहा है।
इंटरनेशनल थिंक टैंक आईसीजी की 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर अवसर और खतरे' नाम से प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक, कोयले से संचालित होने वाले इस प्रोजेक्ट की वजह से सिंध क्षेत्र में पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा प्रोजेक्ट से और भी समस्याएं पैदा हो रहीं हैं। पाकिस्तान सरकार को प्राथमिकता के आधार पर इन समस्याओं से निपटना चाहिए, नहीं तो उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि सरकार को इस प्रोजेक्ट का विरोध करने वाले लोगों पर अत्याचार और उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगानी चाहिए, क्योंकि यह प्रोजेक्ट समाजिक बंटवारे, राजनीतिक गतिरोध और नए संघर्षों की वजह बनता जा रहा है।

आर्थिक लाभ न मिलने से बढ़ रहा विरोध: रिपोर्ट के मुताबिक, बलूचिस्तान प्रांत को ग्वादर पोर्ट से किसी भी प्रकार का सीधा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। इस वजह से भी इस्लामाबाद में स्थानीय लोगों द्वारा इसका विरोध तेज होता जा रहा है। कमर्शियल हब बनाए जाने के नाम पर शुरू हुए इस प्रोजेक्ट से यह इलाका विकास की बजाय सेना के बड़े ठिकाने में तब्दील होता जा रहा है। प्रोजेक्ट लोगों को बेघर कर उनका रोजगार छीनने का काम कर रहा है।