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पाकिस्तानी महिलाओं की आवाज बनी खदीजा; चाकू के 23 वार झेले, सुप्रीम कोर्ट पहुंची इंसाफ की लड़ाई

सोशल मीडिया पर भी खदीजा को इंसाफ दिलाने के लिए कैंपेन चलाए गए।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 14, 2018, 11:19 PM IST

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    लाहौर में कानून की पढ़ाई करने वाली खदीजा पर हमला तब हुआ था, जब वे अपनी बहन को लेने स्कूल गई थीं। -फाइल

    - खदीजा सिद्दीकी पर 2016 में तब हमला किया गया, जब वे बहन को स्कूल से लेने गई थीं

    - आरोपी को निचली अदालत ने सजा सुनाई, लेकिन लाहौर हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया था

    लाहौर.कॉलेज में पढ़ाई कर रही 23 साल की खदीजा सिद्दीकी पाकिस्तान में महिलाओं के लिए इंसाफ की आवाज बनकर उभरी हैं। दो साल पहले एकतरफा प्यार के चलते शाह हुसैन नाम के शख्स ने उन पर चाकू से 23 वार किए थे। पाकिस्तान की निचली अदालत ने तो हुसैन को 7 साल की सजा सुनाई, लेकिन लाहौर हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले पर लोगों ने गुस्सा जाहिर किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्वत: संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू कर दी।

    4 जून को कोर्ट ने हुसैन को बरी किया

    - खदीजा पर हमले के बाद लाहौर कोर्ट ने हुसैन को 7 साल कैद और करीब 3 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। लेकिन, पाकिस्तान के नामी वकील का बेटा होने के चलते पूरा सिस्टम खदीजा के खिलाफ खड़ा हो गया।

    - सजा के खिलाफ हुुसैन हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के बाद जजों ने उसे 4 जून को बरी कर दिया। अदालत ने कहा था कि शुरूआती जांच में खदीजा से हमलावर के बारे में पूछा गया तो उसने हुसैन का नाम नहीं लिया। हालांकि, चश्मदीद गवाहों ने कहा था कि हमले के बाद खदीजा बेहोश हो गई थीं।

    पाक सेलेब्रिटीज ने भी दिया खदीजा को समर्थन

    - हाईकोर्ट के फैसले को लोगों ने महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण करार दिया। सोशल मीडिया पर खदीजा को इंसाफ दिलाने के लिए कैंपेन चलाए गए। कई चर्चित हस्तियों ने इस बारे में बयान दिए। अभिनेत्री उर्वा होकेन ने फैसले को दिल तोड़ने वाला बताया था। साथ ही उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।

    - कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता हमजा अली अब्बासी ने फैसले के खिलाफ लोगों से एकजुट होकर खदीजा की आवाज बनने की अपील की थी। इसके बाद ही सोशल मीडिया पर #WeAreWithKhadija (हम खदीजा के साथ हैं) ट्रेंड करने लगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने दो जजों की बेंच को सौंपा केस

    - मामला बढ़ने पर पाकिस्तान के चीफ जस्टिस मियां साकिब निसार ने खुद संज्ञान लिया। उन्होंने 10 जून को खदीजा के मामले की सुनवाई दो जजों की बेंच को सौंपने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को औपचारिक रूप से याचिका को स्वीकार कर लिया। बुधवार को कोर्ट ने हुसैन को निर्देश दिया कि पेशी से पहले वह एक लाख रुपए जमा करे।

    'केस वापस लेने के लिए धमकी मिली'

    - खदीजा ने कहा, ''बाकी पाकिस्तानी महिलाओं की तरह ही मुझे भी केस वापस लेने के लिए धमकी मिली, पर मैंने हार नहीं मानी। वकीलों ने कहा है कि शायद मैं इतिहास की पहली महिला हूं, जिसने इंसाफ के लिए इतनी लड़ाई लड़ी। महिलाएं लड़ें तो वो सबकुछ बदल सकती हैं। कभी अन्याय सहन नहीं करना चाहिए।''

    हमले में खदीजा की बहन भी जख्मी हुई थी

    - खदीजा पर मई, 2016 में हुसैन ने हमला किया था। तब वह अपनी बहन को लेने स्कूल गई थीं। हुसैन ने उसकी गर्दन, पीठ और हाथों पर 23 वार किए थे। खदीजा को बचाव के दौरान उनकी बहन भी घायल हो गई थी।

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    पाकिस्तान के चीफ जस्टिस मियां निसार ने रविवार को ही खदीजा के वकील से कहा था कि सुप्रीम कोर्ट उनके मामले की सुनवाई करेगी। -फाइल
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Web Title: Pakistan Student Stabbed 23 Times Fights To See Her Attacker Jailed
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