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पाकिस्तान: 71 साल से एक गांव की महिलाओं ने नहीं डाला वोट, अब अपने हक के लिए आवाज उठाई

1947 में पुरुषों ने वोटिंग करने पर बैन लगा दिया था

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 13, 2018, 03:29 PM IST

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  • चुनाव आयोग ने जारी किया नया नियम- हर संसदीय क्षेत्र में 10 प्रतिशत महिलाओं का मतदान जरूरी
  • निकाय चुनाव के दौरान एक सीट पर नियमानुसार वोटिंग नहीं होने पर अमान्य घोषित कर दिया गया था परिणाम

इस्लामाबाद. मुल्तान से 60 किलोमीटर दूर स्थित मोहरीपुर गांव में 1947 से अब तक किसी भी महिला ने वोट नहीं डाला है। प्रतिबंध पुरुषों ने लगाया था, यह कहकर कि वोट डालने से औरतों की बदनामी होगी। लेकिन 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव में यहां की महिलाओं ने वोट डालने का इरादा पक्का कर लिया है। उधर, चुनाव आयोग ने भी नया नियम बनाया है। इसके मुताबिक हर संसदीय क्षेत्र के मतदान में महिलाओं की 10 फीसदी हिस्सेदारी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है तो चुनाव परिणाम अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।

मोहरीपुर की नाजिया तबस्सुम ने कहा- ज्यादातर पुरुष महिलाओं को किसी लायक नहीं समझते। कई दशक पहले गांव के बुजुर्गों ने महिलाओं के वोट न डालने का नियम बनाया था। उनका कहना था कि पोलिंग बूथ पर जाने से महिलाओं की बदनामी होगी। जब औरतें बाहर काम करती हैं और पुरुष घर में रहते हैं, तब उन्हें सम्मान की परवाह क्यों नहीं होती? वोट डालना अब हमारे सम्मान का विषय बन गया है।

महिलाओं की भागीदारी नहीं, तो चुनाव के नतीजे वैध नहीं: चुनाव आयोग ने कहा है कि हर संसदीय क्षेत्र में 10 प्रतिशत महिला वोटर्स की भागीदारी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है तो चुनाव के नतीजे वैध नहीं माने जाएंगे। पाकिस्तान में करीब 2 करोड़ नए मतदाता पंजीकृत हुए हैं। इनमें 91 लाख महिलाएं हैं।

2015 में अवैध घोषित हो चुके हैं चुनाव के नतीजे : पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता फरजाना बारी के मुताबिक, चुनाव में महिलाओं की सहभागिता की वजह उन्हें घर से बाहर निकलने की इजाजत न देना है। उन्होंने चुनाव आयोग की सक्रियता से कुछ बदलाव आने की उम्मीद जाहिर की। फरजाना के मुताबिक, 2015 में निकाय चुनाव के दौरान लोवर दीर में महिलाओं को वोट नहीं डालने दिया गया था। चुनाव आयोग ने नतीजों को अवैध घोषित कर दिया था। 2013 में अदालत ने दो गांवों के उन लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था, जो महिलाओं को वोट डालने से रोकते थे।

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