पाकिस्तान में खौफ के साए में सिख समुदाय, पेशावर से 60 % सिखों का पलायन

पाकिस्तान सिख कम्युनिटी के स्पोक्सपर्सन बाबा गुरपाल सिंह ने कहा- यहां पर सिखों का नरसंहार किया जा रहा है।

dainikbhaskar.com| Last Modified - Jun 13, 2018, 12:47 PM IST

Extremist attacks force minority Sikhs to flee Peshawar city of Pakistan
पाकिस्तान में खौफ के साए में सिख समुदाय, पेशावर से 60 % सिखों का पलायन
  • पेशावर में अल्पसंख्यक सिख समुदाय बढ़ते कट्टरपंथी हमलों से परेशान।
  • सिख देश के दूसरे हिस्सों और भारत की ओर कर रहे पलायन।
  • 30 हजार सिखों में से 60 फीसदी से ज्यादा ने किया पलायन।

 

पेशावर. पाकिस्तान के पेशावर में सिख बढ़ते कट्टरपंथी हमलों के चलते खौफ के साए में जी रहे हैं। नौबत ये आ गई है कि अब सिख देश के दूसरे हिस्सों में पलायन कर रहे हैं। पेशावर के 30 हजार सिखों में से 60 फीसदी से ज्यादा अब पलायन करके पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रह रहे हैं। या फिर भारत में आकर बस गए हैं। बता दें, अभी हाल ही में यहां एक सिख धर्मगुरु को भी गोलियों से भूनकर मार दिया गया था। 

 

- पाकिस्तान सिख कम्युनिटी के स्पोक्सपर्सन बाबा गुरपाल सिंह ने कहा कि यहां पर सिखों का नरसंहार किया जा रहा है। 
- पाकिस्तान सिख काउंसिल के एक सदस्य ने कहा कि हमारे समुदाय का सिर्फ इसलिए सफाया किया जा रहा है क्योंकिं हम अलग दिखते हैं। 
- एक अन्य सदस्य बलबीर सिंह ने पगड़ी की ओर इशारा करते कहा कि ये आपको आसान शिकार बनाता है। कुछ सिखों का ये भी कहना है कि आतंकी संगठन तालिबान अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की हत्याएं कर रहे हैं।
- 2016 में पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ पार्टी के सांसद और सिख समुदाय के सोरन सिंह की हत्या कर दी गई थी। तालिबान ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली थी। 
- हालांकि, इस सबके बावजूद स्थानीय पुलिस ने इस हत्या के आरोप में उनके पॉलिटिकल कॉम्पिटीटर और अल्पसंख्यक हिंदू राजनेता बलदेव कुमार को अरेस्ट कर लिया। 
- इसके बाद करीब दो साल तक इस मामले की सुनवाई चली। आखिरकार सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बलदेव को रिहा कर दिया। 
-  बता दें, पेशावर में हाल ही में किराने की दुकान चलाने वाले सिख धर्मगुरू और ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट चरणजीत सिंह की भी हत्या कर दी गई थी। 

 

सिखों के लिए श्मशान तक नहीं
- पेशावर में रह रहे सिख हिंसा, भेदभाव और नरसंहार ही नहीं, कई और परेशानियों का भी सामना कर रहे हैं। यहां उनके लिए एक श्मशान तक नहीं है। 

- खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने श्मशान के लिए बीते साल फंड दिया था, लेकिन अभी तक इसका काम शुरू नहीं हो पाया। यही नहीं, श्मशान के लिए आवंटित जमीन को अब प्राइवेट बैंक, वेडिंग हॉल और बाकी कंपनीज को दिया जा रहा है। 
- लोकल मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार लगातार इस बात को नजरअंदाज कर रही है कि सिख समुदाय को उसके सपोर्ट और सिक्युरिटी की जरूरत है। 
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालात ये हो गए हैं कि यहां रह रहे सिखों को अपनी पहचान छिपाने के लिए बाल कटवाने पड़ रहे हैं और पगड़ी हटानी पड़ रही है।  
- 20 साल के पालदीप सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मेरा अपने धर्म पर मजबूत विश्वास है, लेकिन मैं मरना नहीं चाहता। इसलिए मैंने अपने बाल कटवा लिए और पगड़ी पहनना छोड़ दिया। 

 

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