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चीन के कई शहरों में चर्च बंद कराए, बाइबिल जलाईं; ईसाइयों को धर्म छोड़ने का आदेश

चीन में फिलहाल 3 करोड़ 80 लाख ईसाई रहते हैं

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 06:02 PM IST

बीजिंग. चीन सरकार अब ईसाई धर्म पर लगाम कस रही है। इसके तहत राजधानी बीजिंग समेत कई शहरों में अफसरों ने बाइबिल जलाई, होली (पवित्र) क्रॉस तोड़े और कई चर्चों को बंद करा दिया। ईसाई लोगों से एक पेपर पर दस्तखत कराए गए, जिसमें कहा गया था कि वे अपना धर्म छोड़ देंगे। ईसाई पादरियों और चीन के अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े एक ग्रुप ने यह जानकारी दी। बीते दिनों चीन सरकार ने एक मस्जिद गिराने के आदेश दिए थे लेकिन मुस्लिमों के प्रदर्शन के चलते आदेश वापस ले लिया।

अमेरिकी ग्रुप चाइना एड के बॉब फू के मुताबिक- हाल ही में सेंट्रल हेनान और बीजिंग में कई चर्चों को बंद करा दिया गया। धर्म की पूरी दुनिया को इसके लिए चिंतित होना चाहिए। फू ने एक वीडियो भी शेयर किया है जिसमें अफसरों को बाइबिल को जलाते हुए देखा जा सकता है। ईसाई लोगों से कहा जा रहा है कि वे अपने धर्म में आस्था न रखें।

चीन में ईसाई धर्म को खतरा : हेनान के एक अन्य पादरी ने कहा- 5 सितंबर को नानयांग में चर्च में रखा फर्नीचर, बाइबिल और होली क्रॉस जला दिए गए। सुबह 5 बजे कई लोग चर्च में घुसे और सामान को बाहर फेंकना शुरू कर दिया। रविवार को बीजिंग के जायन चर्च को बंद कराने 60 कर्मचारी पुलिस और दमकल लेकर आए। जायन बीजिंग का सबसे बड़ा चर्च है। इसकी 6 अन्य शाखाएं भी हैं।

जिनपिंग का सख्त रवैया : माओत्से तुंग के बाद मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन के सबसे ताकतवर नेता बनकर उभरे हैं। अन्य धर्मों के लोगों का मानना है कि उनकी धार्मिक स्वतंत्रता कम हो रही है। विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिनपिंग 1982 के बाद से ईसाई धर्म का व्यवस्थित तरीके से दमन कर रहे हैं। 36 साल पहले चीनी संविधान में धार्मिक आजादी की बात लिखी गई थी। सरकार का कहना है कि देश में कट्टरता खत्म की जा रही है। एक अनुमान के मुतािबक, चीन में 3.8 करोड़ ईसाई रहते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ दशकों में चीन में दुनिया की सबसे ज्यादा ईसाई आबादी रहेगी।