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इन देशों में होता है महिलाओं का खतना, दर्दनाक और खौफनाक है ये परम्परा

3 वर्ष पहले
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इंटरनेशनल डेस्क. मुस्लिम दाऊदी बोहरा समुदाय की लड़कियों का खतना करने के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'धर्म के नाम पर कोई भी किसी लड़की के यौन अंग को कैसे छू सकता है, यौन अंगों को काटना लड़कियों की गरिमा और उनके सम्मान के खिलाफ है।'
- ऐसे में बताते हैं कि उन देशों के बारे में, जहां आज भी महिलाओं के खतने की परंपरा जारी है।

मिस्र : मिस्र में आमतौर पर 9 से 12 साल की उम्र में ही लड़कियों का खतना कर दिया जाता है। मिस्र सरकार के मुताबिक, यहां 92 फीसदी शादीशुदा महिलाएं खतना की प्रक्रिया से गुजर चुकी है। यूएन के आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से गुजरने वाली सबसे ज्यादा महिलाएं मिस्र की हैं।

फ्रेंच गुयाना : दक्षिण अफ्रीकी देश गुयाना को आधिकारिक तौर फ्रेंच गुयाना के नाम से जाना जाता है। यहां खतना गैरकानूनी है, इसके बावजूद दुनिया में खतने के मामले में यह दूसरे नंबर पर है। एक सर्वे के मुताबिक, 15 से 49 साल की 96 फीसदी महिलाएं खतना की प्रक्रिया से गुजरीं। इसके लिए यहां धर्म या क्षेत्र का कोई भेद नहीं है।

माली : दक्षिण अफ्रीका में स्थित माली में भी खतना परंपरा आम है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, माली में 15-49 साल की उम्र की 85.2 फीसदी महिलाएं इस प्रक्रिया से गुजरीं। यहां के सोनरई, तामाचेक और बोजो लोगों में ही इसका आंकड़ा कम है। माली में 64 फीसदी महिलाएं एफएमजी को धार्मिक दृष्टि से जरूरी मानती हैं। यहां इसके खिलाफ अब तक कोई सख्त कानून भी नहीं है।

एरिट्रिया : दक्षिण अफ्रीकी देश एरिट्रिया में सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में FGM की दर 89 फीसदी बताई गई थी। यहां भी ग्रामीण इलाकों में धार्मिक दृष्टि से इसे जरूरी माना जाता है। ये मुस्लिम और ईसाई, दोनों ही धर्मों में प्रचलित है। मार्च 2007 में सरकार ने इसके खिलाफ कानून बनाया गया। इसके तहत जुर्माने से लेकर कैद तक की सजा का प्रावधान है।

सोमालिया : सोमालिया में करीब 80 से 98 फीसदी महिलाओं का खतना होता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि सोमालिया में 97.7 फीसदी महिलाएं और लड़कियां खतने की प्रक्रिया से गुजरीं। वहीं, यूनिसेफ ने भी अपनी रिपोर्ट में सोमालिया में खतने की दर को दुनिया में सबसे ज्यादा बताया था। अगस्त 2012 में संविधान के आर्टिकल 15 में खतना पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन इस पर रोक नहीं लग पाई है।

जिबूती : मुख्य रूप से मुस्लिम आबादी वाले जिबूती में 93 फीसदी से 98 फीसदी महिलाओं का खतना होता है। यूनिसेफ की रिपोर्ट में जिबूती को दुनिया का दूसरा ऐसा देश बताया गया था, जहां तीसरे स्तर के खतने की दर बहुत ज्यादा है। हालांकि, यहां के मौलवी भी इस प्रक्रिया को लेकर दो धड़ों में बंटे हैं। देश में इसके खिलाफ सख्त कानून है। जिसके तहत दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान भी है।

बुर्किना फासो : बुर्किना फासो को बुर्किना और आधिकारिक तौर पर रिपब्लिक ऑफ अपर वोल्टा के नाम से जाना जाता है। इस छोटे से देश की आबादी डेढ़ करोड़ से थोड़ी ज्यादा होगी। खतना यहां की संस्कृति में शामिल है। डब्ल्यूएचओ ने 2006 की अपनी रिपोर्ट में यहां खतने की दर 72.5 फीसदी बताई गई थी। 1996 में देश में इसके खिलाफ कानून बनाया गया, जो फरवरी 1997 से लागू है।

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