ट्रम्प-किम में क्या बातचीत हुई, ये जानने के लिए हर हथकंडा अपनाएंगे चीन के जासूस: अमेरिकी अधिकारी

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि सिंगापुर में होने वाली ये मुलाकात दोनों देशों की बीच जासूसी जंग का मैदान बन गई है।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Jun 11, 2018, 05:43 PM IST

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How China could spy on Trump's summit with Kim
अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकारी ने बताया कि चीनी होटल की चाबियों और उपहारों में भी खुफिया डिवाइस लगा सकते हैं। - सिम्बॉलिक इमेज

- विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रम्प असुरक्षित मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से खतरा है
- अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, चीन तकनीक और अपने भेदियों की मदद से खुफिया जानकारी हासिल करना चाहेगा

 

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग के बीच मुलाकात को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, चीन इस मुलाकात का हिस्सा नहीं है, लेकिन उसके जासूस ऐसा हर हथकंडा अपनाएंगे; जिससे उन्हें ट्रम्प-किम के बीच हुई बातचीत का पता चल जाए। अधिकारी ने कहा कि सिंगापुर में होने वाली ये मुलाकात दोनों देशों की बीच जासूसी जंग का मैदान बन गई है। बता दें कि कपेला होटल में मंगलवार को सुबह 6.30 मिनट पर ट्रम्प और किम के बीच मुलाकात होगी।

 

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को किस बात का डर

1) बार-रेस्टोरेंट में चीन ने तैनात की होगी भेदियों की फौज
- अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों ने एनबीसी न्यूज को बताया, "चीनी होटल की चाबियों और अमेरिकी मेहमानों को दिए जाने वाले उपहारों में भी खुफिया डिवाइस लगाने के लिए मशहूर हैं। हमें उम्मीद है कि वे जानकारी जुटाने के लिए अपनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इंसानों और इलेक्ट्रॉनिक दोनों के जरिए करेंगे। हमें इस बात की फिक्र है कि चीन ने सिंगापुर के बार और रेस्टोरेंट में अपने भेदिए लगा दिए होंगे, जो अमेरिकी ग्राहकों से बटोरी हुई सूचनाएं पहुंचाएंगे। इस बात की उम्मीद है कि मीटिंग की जगह पर भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के जरिए नजर रखी जाएगी।"

 

2) बंद मोबाइल से भी डाटा चुरा लेते हैं चीनी
- खुफिया एजेंसी के अफसर ने बताया, "चीन के जासूसों की कोशिश नाकाम करने के लिए अमेरिकी कापेला होटल में हर ऐसी डिवाइस को हटा देंगे, जिससे जासूसी की कोशिश हो सकती है। छिपे हुए हर उस कैमरा को ब्लॉक कर दिया जाएगा, जो गोपनीय दस्तावेजों को देख सकते हों। अमेरिकी अफसरों को अपने मोबाइल से बैटरी निकालने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि चीन के पास ऐसी तकनीक भी है, जिसके जरिए वो मोबाइल फोन ऑफ होने पर भी उसका डाटा निकाल सकता है।"

 

3) चीन ने तकनीकी क्षमता को बढ़ा लिया है
- सीआईए निदेशक लिओन पेनेटा के चीफ ऑफ स्टाफ रहे जेरेमी बाश ने कहा, "समिट के दौरान चीन की खुफिया एजेंसियां बेहद सक्रिय होंगी। उन्होंने जानकारी रखने और नजर रखने की क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता को पिछले कुछ सालों में बेहद बढ़ा लिया है। चीन की कोशिश हमेशा से ही पश्चिम में अपने जासूसों को स्थापित करने की रही है। वे इंटरनेट के जरिए खुफिया जानकारी निकालने के लिए हैकर्स की फौज भी भर्ती कर सकते हैं।"
- नेशनल काउंटर इंटेलिजेंस एंड सिक्युरिटी सेंटर के प्रवक्ता डीन बॉयड ने कहा, "उन्होंने हाल के वर्षों में खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए आधुनिक तकनीक की क्षमता बढ़ाई है, जो अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है।"

 

4) अमेरिकी अफसर के होटल रूम की चाबी में लगा दिया था माइक्रोफोन
- अमेरिकी अधिकारी ने बताया, "चीन जासूसी के मामले में कितना आगे निकल चुका है, इसका हालिया उदाहरण चीन में काम कर रहा एक अमेरिकी अधिकारी बना। उसके होटल रूम की चाबी अक्सर खराब होती थी, जिसकी वजह से उसे बार-बार बदलना पड़ रहा था। अमेरिका लौटने पर वो अधिकारी एक चाबी अपने साथ ले आया, जिसकी जांच करने पर पता चला कि उसमें माइक्रोफन लगा है। वे क्रेडिट कार्ड, की चेन, ज्वेलरी में भी ट्रैकिंग और सुनने वाली डिवाइस लगा सकते हैं। इसका मकसद ज्यादातर अमेरिकी अधिकारियों की खुफिया बातचीत सुनना रहता है।"

 

5) जिनपिंग-ट्रम्प मुलाकात के दौरान भी बरती थी सावधानी

- 2017 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के दौरान भी अमेरिकी अधिकारियों ने जासूसी को लेकर बेहद सतर्कता बरती थी। 
- दल में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, "सभी सदस्यों के मोबाइल फोन ले लिए गए थे, ताकि इस बात की तस्दीक की जा सके कि उनके जरिए जानकारी तो नहीं हासिल की जा रही। इसके बाद जब ट्रम्प चीन के दौरे पर गए, तब भी अधिकारियों को बाताया गया कि चीन में हर पल आप पर नजर रखी जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों को फ्रैंडशिप पिन दी गई। लेकिन, इसे सुरक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी दल के सदस्यों को सुरक्षित एरिया में ये पिन ले जाने की इजाजत नहीं दी, क्योंकि उन्हें शक था कि इसके जरिए जासूसी की जा सकती है। इस दौरे पर अधिकारी अपनी हर ऐसी चीज एक बैग में रखते थे, जिसका पता वे चीनियों को नहीं लगने देना चाहते थे और ये बैग हमेशा अपने साथ लेकर चलते थे।"

 

 

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किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच 12 जून को सिंगापुर के कपेला होटल में मुलाकात करेंगे।
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