संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्ना का निधन, 2001 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था / संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्ना का निधन, 2001 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था

अन्नान जनवरी 1997 से दिसम्बर 2006 तक संयुक्त राष्ट्र के महासचिव रहे

DainikBhaskar.com

Aug 18, 2018, 04:01 PM IST
Kofi Annan, former UN secretary general, dies

बर्न (स्विट्जरलैंड). संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान का शनिवार को निधन हो गया। वे 80 साल के थे। अन्नान जनवरी 1997 में संयुक्त राष्ट्र के 17वें महासचिव बने थे और दिसम्बर 2006 तक इस पद रहे। कोफी संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने वाले पहले अश्वेत थे। 2001 में उन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। कोफी के निधन पर यूएन के मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, "किसी भी अच्छे काम के पीछे वे एक मार्गदर्शक की तरह थे।"

अन्नान के परिवार ने उनके निधन की जानकारी ट्वीट कर दी। उन्होंने बताया- " लंबी बीमारी की वजह से अन्नान का 18 अगस्त को निधन हो गया।" स्विट्जरलैंड के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अन्नान का जन्म 8 अप्रैल 1938 को कुमासी (घाना) में हुआ था।

कोफी के पुराने इंटरव्यू को वेबसाइट पर डाला गया : 2013 में टाइम मैगजीन ने कोफी अन्नान का इंटरव्यू लिया था। इसे 'इंटरवेंशन: अ लाइफ इन वॉर एंड पीस' नाम दिया गया। इसमें कोफी ने कहा था, "मुझे लगता है कि मेरा सबसे खराब वक्त इराक युद्ध (2003) के दौरान था। बड़ी बात ये कि मैं उसे रोक नहीं सका। मैंने बहुत कोशिश की। लोगों से फोन पर बात की। दुनियाभर के कई नेताओं से मिला। सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने सपोर्ट नहीं किया। उन्होंने सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना भी आगे जाने का फैसला ले लिया। परिषद ने भी युद्ध पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया। क्या आप सोच सकते हैं कि यूएन ने इराक में युद्ध कराया। उस वक्त हमारी साख का क्या हुआ होगा? उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा था कि यूएन के अब कोई मायने नहीं रह गए हैं क्योंकि हम युद्ध का समर्थन नहीं रहे। लेकिन आज हम बेहतर जानते हैं।" कोफी को डिप्लोमेटिकली तरीके से बात रखने की कला आती थी लेकिन वे सीधी-सपाट बात कहने से कभी नहीं डरे।

कई भाषाओं के जानकार थे : उनका पूरा नाम कोफी अट्टा अन्नान था। जन्म घाना के कुमासी के एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनके पिता प्रांतीय गवर्नर और दादा दो जनजातियों के प्रमुख थे। कोफी अपने नाम में अट्टा लगाते थे। घाना की अकान भाषा में अट्टा का मतलब जुड़वा होता है। कोफी की एक जुड़वा बहन एफुआ हैं। कोफी को अंग्रेजी, फ्रेंच और कई अफ्रीकी भाषाओं का ज्ञान था। कुमासी में उन्होंने स्कूली पढ़ाई की। 1961 में मिनेसोटा (अमेरिका) के सेंट पॉल कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़े। जेनेवा से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मामलों में ग्रेजुएशन किया और यूएन में करियर शुरू किया। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में नियुक्त होने से पहले वे यूएन में ही कई अहम पदों पर रहे।

ईस्ट तिमोर को अलग देश बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई: 1990 में इराक के कुवैत पर हमले के दौरान कोफी ने 900 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय स्टाफ और गैर-इराकी लोगों को उनके देश भेजने में मदद की। उन्होंने इराक को भी इस बात के लिए राजी किया कि मानवीय राहत के लिए तेल की बिक्री की जाएगी। 1999 में इंडोनेशिया से अलग ईस्ट तिमोर को अलग देश बनाने में कोफी की प्रमुख भूमिका रही। दुनिया में एड्स, टीबी और मलेरिया से निपटने के लिए ग्लोबल फंड बनाने में उनका प्रमुख योगदान था। कोफी के ही कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवाद निरोधक रणनीति बनाई।

दो शादियां कीं : कोफी ने 1965 में नाइजीरिया की टीटी अलाकीजा से शादी की। टीटी से उनकी एक बेटी एमा और बेटा कोजो है। 1970 के दशक में टीटी और कोफी अलग हो गए। 1984 में उन्होंने स्वीडिश वकील नेने लेगरग्रीन से शादी की।

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