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मोदी को दोस्त मानते हैं ट्रम्प, अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए नाटो बेकार - बॉब वुडवर्ड की किताब में दावा

किताब लिखने वाले पत्रकार ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के वॉटरगेट स्कैंडल का खुलासा किया था

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 11:19 PM IST

- मंगलवार को रिलीज हुई पत्रकार बॉब वुडवर्ड की किताब

- किताब में पाकिस्तान की सैन्य मदद रोकने का भी जिक्र

वॉशिंगटन. अमेरिकी पत्रकार बॉब वुडवर्ड की किताब ‘फियर: ट्रम्प इन द व्हाइट हाउस’ मंगलवार को रिलीज हो गई। इस किताब में ट्रम्प के आने के बाद से व्हाइट हाउस के कामकाज की बिगड़ती स्थिति के बारे में बताया गया है। लेखक का दावा है कि ट्रम्प भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना दोस्त मानते हैं। मोदी ने ही ट्रम्प को बताया था कि अफगानिस्तान से अमेरिका को कुछ भी हासिल नहीं हुआ।

ट्रम्प को अराजक, चंचल और अस्थिर बताने वाली यह किताब विवादों में है। व्हाइट हाउस ने इस किताब को ‘बेकार’ और मनगढ़ंत कहानियां करार दिया, जबकि ट्रम्प इसे ‘मजाक’ कहते हैं।

अफगानिस्तान से खनिज चाहते थे ट्रम्प : वुडवर्ड के मुताबिक, ट्रम्प ने मोदी के लिए यह बात 19 जुलाई 2017 को एक बैठक में कही थी। यह बैठक 26 जून को मोदी-ट्रम्प की मुलाकात के करीब तीन हफ्ते बाद हुई थी। ट्रम्प ने कहा था, ‘‘ मोदी ने मुझे बताया था कि अमेरिका को अफगानिस्तान से कुछ हासिल नहीं हो रहा, जबकि वहां कीमती खनिज पदार्थ हैं। हम चीन जैसे देशों की तरह काम नहीं कर सकते। अमेरिका अपनी मदद के बदले अफगानिस्तान से कीमती खनिज पदार्थ हासिल करना चाहता है। खनिज पदार्थ मिलने तक मैं कोई करार नहीं कर रहा हूं। जब तक मोदी मदद कर रहे हैं, तब तक पाकिस्तान को भुगतान बंद कर देना चाहिए।’’ इसके छह महीने बाद ट्रम्प ने एक जनवरी को ट्वीट करके पाकिस्तान को दी जाने वाली सभी सैन्य मदद रोकने की घोषणा की थी। ट्रम्प ने कहा था कि पाकिस्तान आतंकी संगठनों की हरकतें रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है।

नाटो को भी बेकार बोल चुके अमेरिकी राष्ट्रपति: किताब के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा था, ‘‘अफगानिस्तान में अमेरिका अपना नुकसान कर रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। हमारे सहयोगी मदद नहीं कर रहे हैं। वे आर्थिक मदद ले रहे हैं, लेकिन हमारे लिए काम नहीं कर रहे। नाटो बिल्कुल बेकार है। सेना मुझे बता चुकी है कि नाटो के कर्मचारी कुछ भी काम नहीं कर रही।’’ वुडवर्ड ने किताब में लिखा कि ट्रम्प का कहना था, ‘‘पाकिस्तान हमारी मदद नहीं कर रहा है, जबकि अमेरिका उसे हर साल 1.3 बिलियन डॉलर की मदद देता है।’’ इसके बाद ट्रम्प ने पाकिस्तान को अतिरिक्त सहायता राशि भेजने से इनकार कर दिया। उन्होंने अफगान नेताओं को भ्रष्ट कहा। साथ ही, बताया कि वे अमेरिका से पैसे कमा रहे हैं।