चीन

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चीन: इंटरनेट कंपनी के दफ्तर में एंट्री, खाने का ऑर्डर जैसे काम फेस रिकगनीशन से, 20 हजार कर्मचारियों को सुविधा

बायडू ने अपने एआई के जरिए गूगल और एपल को टक्कर देने लायक वॉयस असिस्टेंट तकनीक भी तैयार की

Danik Bhaskar

Sep 07, 2018, 11:22 AM IST

  • बायडू चीन की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी, 70% मार्केट पर कब्जा
  • बायडू के मुख्यालय में कोई भी पर्स और आईडी लेकर नहीं जाता, सभी काम फेस रिकगनीशन से

बीजिंग. चीन की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी बायडू की तकनीक गूगल से भी ज्यादा आधुनिक और आसान है। इसका सबूत है बायडू का बीजिंग स्थित हेडक्वार्टर। जहां कर्मचारियों का लगभग हर काम फेस रिकगनीशन (चेहरा पहचानने वाली) तकनीक से हो जाता है। फिर चाहे वो गेट से किसी की एंट्री हो, कॉफी का ऑर्डर हो या खाने का बिल पेमेंट।
बीजिंग में बायडू के मुख्यालय में 20 हजार लोग काम करते हैं। सभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक फेस रिकगनीशन का इस्तेमाल करना बेहतर ढंग से जानते हैं। दफ्तर में एंट्री से लेकर कुछ खरीदने तक हर काम इस तकनीक की मदद से करते हैं। किसी भी शख्स के हाथ में आईडी कार्ड नहीं होता। ना ही लोग अंदर अपना पर्स साथ लेकर घूमते हैं।

कंपनी के कैंपस में ड्राइवरलेस कार: चीन में ड्राइवरलेस कार बैन हैं, लेकिन कैंपस में इन्हें कर्मचारी कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इन कारों की खासियत है कि इन्हें सिर्फ बोलकर ही गंतव्य तक पहुंचाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। कंपनी के पास 100 ड्राइवरलेस बस भी हैं, जिन्हें अगले साल तक लॉन्च किया जा सकता है।
वॉयस असिस्टेंट तकनीक में भी गूगल-एपल से आगेः फोर्ब्स के मुताबिक, बायडू ने अपने एआई के जरिए दुनियाभर में गूगल और एपल को टक्कर देने लायक वॉयस असिस्टेंट (आवाज पर काम करने वाली) तकनीक भी तैयार की है। बायडू ने इसका नाम डुएरओस दिया है। यह सॉफ्टवेयर पहले ही अमेजन के अलेक्सा, एपल के सीरी और विंडोज के कोर्टाना से काफी एडवांस है। बायडू इसे आने वाले समय में टेलीविजन, स्पीकर्स और रेफ्रिजरेटर्स में लगाकर भारत, जापान और ब्राजील जैसे देशों में लॉन्च कर सकता है, जहां घर काफी हद तक चीनी घरों जैसे ही होते हैं। दरअसल, वॉयस असिस्टेंट के जरिए लोग मशीन से बात कर सकते हैं। मशीन उनकी आवाज को पहचान कर काम पूरा करती है। बायडू मुख्यालय में यह तकनीक बड़े स्तर पर इस्तेमाल होती है।

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