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पाक को अलग-थलग पड़ने की फिक्र, भारत से दोबारा शांति वार्ता शुरू करना चाहते हैं आर्मी चीफ: एनवाईटी

भारतीय अफसरों की मानें तो अगले साल चुनाव हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले बातचीत शुरू नहीं करना चाहेंगे

Dainik Bhaskar

Sep 05, 2018, 09:07 PM IST
nyt report says concerned pak isolation qamar javed bajwa talked to indian officers

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के आर्मी प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा भारत से दोबारा शांति वार्ता शुरू करना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने भारतीय अफसरों से बात भी की, लेकिन उन्हें गर्मजोशी भरी प्रतिक्रिया नहीं मिली। न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) ने पश्चिमी देशों और पाक अफसरों के हवाले से यह बात कही। माना जा रहा है कि पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ने और अपनी गिरती अर्थव्यवस्था से चिंतित है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान भारत समेत कई देशों से व्यापार प्रतिबंध हटाए जाने की कोशिशों में जुटा है। अगर पाक को इसमें कामयाबी मिलती है तो उसकी कई देशों के बाजारों में पहुंच हो जाएगी। भारत ने सितंबर 2016 में उड़ी हमले के बाद से पाक से बातचीत बंद कर दी थी।

'पूरे क्षेत्र की खुशहाली चाहते हैं बाजवा' : पाक आर्मी देश की गिरती अर्थव्यवस्था को एक खतरे के रूप में देख रही है, जिससे देश में आतंकवाद बढ़ेगा। पाक को आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 9 बिलियन डॉलर की मदद मिलने की उम्मीद है। पाक के सूचना मंत्री फवाद चौधरी के मुताबिक- हम अपने भारत समेत सभी पड़ोसियों से बेहतर रिश्ते चाहते हैं। बाजवा भी क्षेत्र की खुशहाली चाहते हैं, किसी देश की नहीं।

बातचीत से दूर होगा तनाव : बाजवा और भारत के आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत कांगो में करीब एक दशक पहले संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में एकसाथ काम कर चुके हैं। बाजवा पहले भी कह चुके हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव बातचीत से दूर हो सकता है। अफसरों की मानें तो बाजवा, रावत से चर्चा करना चाहते हैं। पाकिस्तान में आर्मी सबसे ताकतवर है और बाजवा उसके मुखिया हैं। वे फैसले लेने में स्वतंत्र हैं। वहीं, भारत में सरकार की मर्जी बगैर सेना फैसला नहीं ले सकती। इसी के चलते बात आगे नहीं बढ़ पा रही।

अगले साल तक शुरू हो सकती है बातचीत : दिल्ली के अफसरों का कहना है कि अगले साल भारत में चुनाव हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले बातचीत शुरू नहीं करना चाहेंगे। क्योंकि, यह कामयाब नहीं हुई तो चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। चौधरी भी कह चुके हैं कि भारत में चुनाव से पहले भारत-पाक के रिश्तों में कोई खास सुधार नहीं हो सकता। इमरान पहले ही साफ कर चुके हैं कि भारत एक कदम चलेगा तो हम दो कदम चलेंगे।

चीन के भी हित जुड़े हुए हैं : इस्लामाबाद के अफसरों का कहना है कि पाक के सकारात्मक रवैये के पीछे चीन भी हो सकता है। बीजिंग चाहता है कि भारत के साथ सीमा पर शांति रहे ताकि उसके आर्थिक लक्ष्य (इकोनॉमिक कॉरिडोर) पूरे होते रहें। चीन बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के जरिए पाक के ग्वादर पोर्ट से जुड़ेगा। अगर पाकिस्तान की सेना भारत से सटी सीमा पर गोलीबारी करती है तो इससे चीन के व्यापार पर असर पड़ेगा।

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