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चीन के खिलाफ 12 हजार लोगों के एक देश ने आवाज उठाई, चीनी दूत से कहा- अपनी बदसलूकी पर माफी मांगो

प्रशांत क्षेत्र में नउरु महज 21 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैला है, उसके ताइवान से मजबूत संबंध हैं

Danik Bhaskar | Sep 06, 2018, 05:14 PM IST

सिडनी. प्रशांत महासागर में स्थित 12 हजार लोगों का एक देश ‘नाउरु’ चीन के खिलाफ खड़ा हो गया है। नाउरु सरकार का आरोप है कि चीन के दूत ने एक कार्यक्रम के दौरान उनके राष्ट्रपति के साथ बदसलूकी की। इसके लिए नाउरु ने चीनी प्रशासन से आधिकारिक तौर पर माफी की मांग की है।

नाउरु ने हाल ही में 18 पैसिफिक देशों के फोरम के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें उसने अमेरिका और चीन को भी न्योता दिया। चीन की तरफ से कार्यक्रम में हिस्सा लेने उसके डिप्लोमैट दू किवेन पहुंचे थे। किवेन की मांग थी कि वे नउरु के प्रधानमंत्री से पहले ही फोरम को संबोधित करें। हालांकि, नउरु के राष्ट्रपति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी। यहीं से दोनों के बीच विवाद खड़ा हो गया और चीनी डेलिगेशन ने कार्यक्रम को बीच में छोड़ दिया। नउरु के राष्ट्रपति ने चीनी दूत की इस हरकत को बद्तमीजी करार देते हुए कहा कि चीन बड़ा देश होने की वजह से हमें डराना चाहता है।

संयुक्त राष्ट्र तक ले जाएंगे मामला: नउरु ने कार्यक्रम खत्म होने के बाद चीनी दूत से माफी की मांग की। उन्होंने कहा, “चीन के प्रतिनिधि उनके सामने कुछ नहीं हैं और हम पूरे फोरम से अपील करेंगे की वे चीन पर माफी के लिए दबाव बनाएं। हम इसे संयुक्त राष्ट्र तक ले जाने से भी नहीं चूकेंगे। चीन हमारा बड़ा साझेदार है, लेकिन उसे हमारी बेइज्जती नहीं करनी चाहिए थी।”

विवाद को ताइवान से जोड़ रहा चीन: चीन के विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर कहा कि नउरु ने अंतरराष्ट्रीय और फोरम के नियमों का उल्लंघन किया। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार को इस घटना को ताइवान से जोड़ते हुए लिखा- ताइवान को इससे खुश नहीं होना चाहिए। यह बेहद हास्यास्पद है कि उसका भविष्य एक छोटा सा पैसिफिक देश निर्धारित कर रहा है। राजनायिक तौर पर उसे इस विवाद से कुछ नहीं मिलने वाला। दरअसल, नउरु के स्वायत्त ताइवान से बेहतर संबंध हैं और वह बीजिंग के बजाय ताइपे को ही सरकार के तौर पर मान्यता देता है। इसी से चिढ़कर चीन ने घटना को ताइवान से जोड़ दिया।