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फ्लैशबैक 2019 / दुनिया के पहले स्तनधारी चूहे और सुमात्रा गैंडे की अंतिम प्रजाति ने साथ छोड़ा; विलुप्त गुआम रेल चिड़िया की वापसी हुई

flashback 2019 The world's first mammal rat and the last species of Sumatra rhinoceros left along; Guam rail bird declared extinct, returned
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flashback 2019 The world's first mammal rat and the last species of Sumatra rhinoceros left along; Guam rail bird declared extinct, returned

  • जंगल की आवाज के नाम से मशहूर घोंघे जॉर्ज ने साथ छोड़ा जो सिर्फ पत्तियों पर पाया जाता था
  • जीव संरक्षणकर्ताओं ने विलुप्त माने जाने वाले 100 साल पुराने विशालकाय मादा कछुए को खोजा

Dainik Bhaskar

Dec 29, 2019, 11:48 AM IST

साइंस डेस्क. जलवायु परिवर्तन जीवों की कुछ दुर्लभ प्रजाति के लिए काल साबित हुआ। 2019 में लाल पूंछ वाले चूहे और सुमात्रा गैंडे इसका शिकार बने। जॉर्ज के नाम से मशहूर ट्री घोंघे की आखिरी प्रजाति ने भी साथ छोड़ा। लेकिन कुछ जीवों ने वापसी भी की। दक्षिण अमेरिका के जीव संरक्षणकर्ताओं ने विलुप्त माने जाने वाले 100 साल पुराने विशालकाय मादा कछुए को ढूंढ निकाला। विलुप्त घोषित चुकी गुआम रेल चिड़िया की वापसी हुई जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कभी सांपों का शिकार बनी थी। फ्लैशबैक 2019 में पढ़िए कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में...


पेड़ों को फफूंद से बचाने वाले घोंघे ने अलविदा कहा

जनवरी : जॉर्ज के नाम मशहूर दुनिया के एकमात्र हवाइएन ट्री घोंघा ने साल से पहले दिन अलविदा कहा। उम्र 14 साल थी। इसका नाम पिंटा आइलैंड के आखिरी कछुआ जॉर्ज के नाम पर रखा गया था। दशकों तक वैज्ञानिकों ने मेटिंग कराने के लिए इस घोंघे की प्रजाति को ढूंढा लेकिन सफलता नहीं मिली। इसका वैज्ञानिक नाम Achatinella apexfulva था। यह खास किस्म का घोंघा था जो अमेरिका के हवाई राज्य में पेड़ों की पत्तियों पर पाया जाता था और फफूंद को भोजन बनाता था। इसकी दूसरी प्रजातियां आवाज निकालती थीं या नहीं अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन इसे वॉयस ऑफ द फॉरेस्ट यानी जंगज की आवाज का तमगा जरूर मिला था। 

दुनिया के पहले स्तनधारी लाल पूंछ वाले चूहे ने साथ छोड़ा

फरवरी : जलवायु परिवर्तन की मार दुनिया के पहले स्तनधारी चूहे पर भी पड़ी। लाल पूंछ वाला चूहा ब्रैमबल केई मेलोमाइस विलुप्त हो गया। 2016 के इसके विलुप्त होने की आशंका जाहिर की गई। 2018 में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने इसे संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट में शामिल किया। यह खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया के आईलैंड पर पौधों के बीच पाया जाता था। 2004 से 2014 तक घटती पौधों की संख्या और समुद्री पानी का बढ़ता दायरा चूहे के लिए काल साबित हुआ। 

मलेशिया में अंतिम सुमात्रा गैंडे ने साथ छोड़ा, खत्म हुई प्रजाति

नवंबर : मलेशिया में सुमात्रा गैंडे की मौत हुई। उम्र 25 साल थी। यह मादा गैंडा अपनी प्रजाति की अंतिम सदस्य थी जो कैंसर से जूझ रही थी। इसी प्रजाति के नर मादा की मई में मौत हुई थी। जो मलेशिया के बोर्नियो द्वीप पर रहता था। बोर्नियो राइनो एलायंस के कार्यकारी निदेशक ऑगस्टीन तुगा के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के मुताबिक न ढल पाने के कारण गैंडे की मौत हुई। दुनियाभर में गैंडे की इस प्रजाति के घटने की वजह शिकार भी है। पारंपरिक चीनी चिकित्सा के लिए बड़े पैमाने पर इनका शिकार किया गया, नतीजा इनकी संख्या तेजी से घटी। 
 

दक्षिण अमेरिका के आईलैंड पर मिला 100 साल पुराना विशालकाय कछुआ

जीव संरक्षणकर्ताओं ने विलुप्त माने जाने वाले 100 साल पुराने विशालकाय मादा कछुए को ढूंढ निकाला। इस बड़े आकार वाले कछुए को केलोनोइडिस फेंटेस्टिकस कहा जाता है। जिसे आखिरी बार 1906 में देखा गया था। यह प्रजाति प्रशांत महासागर के एक द्वीपसमूह के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित फर्नेनडिना आईलैंड पर पाई गई जिसे नाव की मदद से सांता क्रूज आईलैंड के संरक्षण केंद्र लाया गया। यह आईलैंड दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर प्रांत के गैलापेगोस द्वीपीय क्षेत्र में स्थित है। 2017 में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने इसे बेहद विलुप्तप्राय: जीवों की श्रेणी में शामिल किया था। इसने प्रजाति ने वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन तक को प्रेरित किया था। जैव विकास के अध्ययन में उन्होंने 1859 में इसकी प्रजाति की उत्पत्ति का जिक्र भी किया था।

विलुप्त घोषित होने के बाद गुआम रेल चिड़िया की वापसी

दिसम्बर : इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की विलुप्त हो चुके पक्षियों की लिस्ट में शामिल होने के बाद 2019 में गुआम रेल चिड़िया की वापसी हुई है। गुआम की यह चिड़िया यह कभी पश्चिम प्रशांत महासागर वाले हिस्से के पास देखी जाती थीं। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान गुआम आइलैंड (अमेरिका) को जापानी सैनिकों ने घेर लिया था। 1944 में आइलैंड पर अमेरिकी सैनिकों ने कब्जा किया। सैनिकों के कब्जे के बाद आइलैंड पर सांप दिखने शुरू हो गए। जिनका शिकार चिड़िया बनीं। घटती संख्या के कारण इन्हें खासतौर पर 1987 में 38 हेक्टेयर के कुकूज आइलैंड पर पाला जा रहा है। उस दौरान इनकी संख्या 21 ही बची थी।
 

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