कोविड-19 हो सकता है जिम्मेदार 

8-9 साल की उम्र में प्यूबर्टी

भारत में समय से पहले लड़कियों में प्यूबर्टी देखने
को मिल रही। पहले यह 12-14 साल की उम्र में
होता था, अब इसमें चार-पांच साल की कमी आई है। 

जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक एन्डोक्रनालजी एंड
मेटाबॉलिज्म की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के
दौरान समय से पहले प्यूबर्टी में 3.6% की वृद्धि हुई है।

कोविड से पहले भी भारत सहित पूरी दुनिया में प्यूबर्टी
की उम्र में गिरावट देखने को मिल रही थी। कोरोना
के कारण अर्ली प्यूबर्टी के केस दोगुने हो गए हैं।

जर्मनी की बॉन यूनिवर्सिटी के अनुसार, एक मेडिकल
सेंटर पर समय से पहले प्यूबर्टी के लगभग 10 केस
आते थे, अब 23 से अधिक मामले सामने आते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान बच्चे मोटापे
के शिकार हुए। फिजिकल एक्टिविटी कम होने और
लाइफस्टाइल बदलने से बच्चों की ग्रोथ प्रभावित हुई।

प्यूबर्टी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बच्चे का शरीर
किसी वयस्क के रूप में बदलने लगता है।
जैसे-ब्रेस्ट का उभार, प्यूबिक हेयर आदि।

सामान्य उम्र से पहले प्यूबर्टी को अब्नॉर्मल माना
जाता है। 8 वर्ष की उम्र में लड़कियों और 9 वर्ष की
उम्र से पहले लड़कों में प्यूबर्टी असामान्य है।

समय से पहले प्यूबर्टी के कारण बच्चे के
फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है।
हार्मोन्स में तेजी से बदलाव होता है।

सेक्शुअल एक्टिविटी बढ़ने की आशंका रहती है।
इसके कारण बच्चों में तनाव और डिप्रेशन होने का
डर रहता है। बच्चों की हाइट प्रभावित होती है।

लाइफ & स्टाइल की और
स्टोरीज के लिए क्लिक करें

Click Here